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नया साल – नये संकल्प

हर साल जनवरी आते ही बहुतेरे जन अति उत्साह में आ जाते हैं. कोई अपने लिए नए संकल्प (रिजोल्यूशंस) की लिस्ट बनाता है तो कोई खुद में बदलाव लाने के लिए किसी जिम या क्लास की सदस्यता ले लेता है. नया साल लोगों में एक अजीब सी उर्जा भर देता है.

बहुत कुछ बेहतरीन करने की चाह में जिस बात की ओर हमारा ध्यान नहीं जाता वह यह है कि अपनी ज़िंदगी में कुछ नया जोड़ने के लिए हम कुछ जगह बनाने की बजाय उसे नयी चीज़ों से लाद देते हैं.

नए साल की शुरुआत अपनी ऊर्जा का नवीनीकरण करने और कुछ पुरानी इच्छाओं और संकल्पों को पूरा करने का बढ़िया मौका है – स्वास्थ्य, परिवेश में व्यवस्था, कोई नया और सुरुचिपूर्ण काम, आर्थिक नियोजन, और ऐसे ही बहुत से मोर्चों पर लोग कुछ-न-कुछ नया करने का सोच-विचार करते हैं. नया साल ज़िंदगी को बुहारने-चमकाने का बेहतरीन बहाना है. यह ज़िंदगी की किताब का कोरा सफा पन्ना या चैप्टर है जिसपर अगले 12 महीने, या 52 सप्ताह, या 365 दिनों में बहुत कुछ लिखा जाना है.

ऐसे में, जबकि हर शख्स ने अपने लिए कम या ज्यादा कुछ सोचा हो, या न भी सोचा हो, मैं यह बताने जा रहा हूँ कि मैंने अपने लिए क्या सोचा है:

* मैं अपने पिछले साल का आकलन करूंगा. मैंने कहाँ-कहाँ गलतियाँ की, और उनसे मैंने कुछ सीखा भी या नहीं. मैंने क्या खोया, क्या पाया.

* अपने शेड्यूल को मैं यथासंभव सहज बनाऊंगा. इसके लिए मुझे दूसरों को ‘ना’ कहना सीखना ही पड़ेगा.

* पुरानी और आधी-अधूरी योजनाओं को समेट लूँगा और लोगों से अनिच्छुक होते हुए भी वादे नहीं करूंगा. इस तरह मेरे कामकाज का माहौल कुछ सिलसिलेवार और सहज हो जाएगा.

* अपने स्वास्थ्य और खानपान में बदलाव लाने के लिए नियत किये गए पुरानी योजनाओं का पुनरावलोकन करूंगा ताकि मुझे कुछ नयी चीज़ें आजमाने का मौका मिले.

* अपने इनबॉक्स को खंगालूँगा. यदि मैंने किसी ईमेल का जवाब हाल में नहीं दिया है तो शायद जवाब देना गैरज़रूरी होगा. इस मेल को आर्काइव करके दूसरी मेल्स पर तवज्जोह दूंगा ताकि इनबॉक्स कुछ व्यवस्थित हो जाए. ऐसा ही कुछ सोशल नेट्वर्किंग के साथ करना भी ठीक रहेगा. जिन वेबसाइट्स से मैं बस यूंही जुड़ गया था उनसे अपने प्रोफाइल हटा लूँगा. दस जगह अपनी मौजूदगी बनाए रखने की बजाय एक-दो जगह नियमित रहना ही सही रहेगा.

* कम्प्यूटर की फाइलें भी व्यवस्थित करूगा. जिन फाइलों को मैंने बहुत लंबे अरसे से नहीं छुआ है उन्हें डिलीट करने के बारे में सोचूंगा. यदि डिलीट करना सही न हो तो उन्हें किसी पोर्टेबल हार्ड ड्राइव या क्लाउड में सहेज दूंगा.

* कागज़ के उपयोग में कटौती करूंगा. अब मैंने कागज़ का इस्तेमाल पहले से बहुत कम कर दिया है. धीरे-धीरे सब कुछ डिजिटल होता जा रहा है. डाक-सामग्री को प्राप्ति के समय ही सहेजने या ठिकाने लगाने के बारे में तय कर लूँगा अन्यथा वह टेबल पर कई दिनों तक धूल खाती रहेगी.

* अनावश्यक चीज़ों से छुटकारा पाऊंगा. कमरे के जो कोने अस्त-व्यस्त लगेंगे उन्हें देर किये बिना जमा दूंगा. जिन चीज़ों की मुझे ज़रुरत नहीं है उन्हें किसी को दे दूंगा.

* अपनी आलमारी, दराजें, और फ्रिज को बेकार की चीज़ें से नहीं भरूँगा. पुराने कपड़े, कबाड़, और जंक फ़ूड (यदि हो तो)… सब निकाल बाहर करूंगा. किचन और फ्रिज में सिर्फ वही चीज़ें जायेंगीं जो स्वास्थ्यप्रद हों.

* रोज़मर्रा के काम नियत समय पर ही निबटा दूंगा. बिलों को अंतिम तिथि से पहले ही चुका दूंगा. जिन कामों को लंबे समय से टालता आ रहा हूँ उन्हें वरीयता के अनुसार पूरा कर दूंगा.

* अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनाऊंगा. अपनी आय और बचत पर नज़र बनाए रखूंगा. क्रेडिट/डेबिट कार्ड का उपयोग कम-से-कम करूंगा.

* उन छोटी-छोटी बातों का हमेशा ध्यान रखूंगा जिन्हें नज़रंदाज़ करने पर बाद में बड़ी समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं.

इन सबको करने और साधने में बड़ी मेहनत और दृढ़-संकल्प लगेगा. कुछ चीज़ें बारंबार करने पर भी ध्यान से उतर जायेंगीं. अंततः, यदि मैं इनमें से आधी बातें भी अमल में ला सका तो यह साल मेरे लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगा और मैं अधिकाधिक सक्रिय और रचनात्मक बनूँगा.

ईमानदारी से कहूं तो मैं यह सभी चीज़ें साल भर करता ही रहता हूँ, लेकिन नए साल की शुरुआत के साथ इन्हें दोहराने के कई फायदे हैं. सफा-कोरा स्लेट की तरह लगभग पूरा साल आनेवाली घटनाओं का रास्ता जोह रहा है. ऐसे में खुद से किये कुछ वादे-इरादे ताज़िंदगी काम आयेंगे.

लियो बबौटा की यह पोस्ट साल की शुरुआत में ही आ जानी चाहिए थी लेकिन अभी कौन सी देर हो गयी है!

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कितनी आदतें? कितने उपाय?

इंटरनेट पर व्यक्तित्व विकास के ऊपर बहुत उपयोगी लेखों की भरमार सी हो गयी है. यह स्वाभाविक है कि हर व्यक्ति अपने जीवन के किसी-न-किसी पक्ष में हमेशा ही कुछ सुधार लाना चाहता है इसलिए यहाँ ऐसे बहुत से लोग हैं जो इसकी उपयोगिता को समझते हैं और दूसरों को जाग्रत करने के लिए इसके बारे में बहुत कुछ लिखते भी हैं. जो कोई भी इसपर कुछ लिखता है उसका अपना कुछ अनुभव और रणनीतियां होती हैं इसलिए मैं यह मानता हूँ कि उसकी सलाह में कुछ वज़न होना चाहिए. किसी दूसरे के अनुभव से कुछ सीखने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि यह ज़रूरी तो नहीं कि हम सदैव स्वयं ही गलतियाँ करके सीखते रहें!

तो यह अच्छी बात है कि बहुत से लोग जीवन और कामकाज को बेहतर बनाने के लिए अपने विचार और अनुभव हमसे बांटते हैं. मैं तो यही मानकर चलता हूँ कि ये व्यक्ति जेनुइन हैं और इन विषयों पर जितना पढ़ा-लिखा जाये उतना ही अच्छा होगा. सफलता का कोई एक मार्ग नहीं है जिसपर चलकर आप निश्चित रूप से इसे पा सकें. हर व्यक्ति अपनी बनाई राह पर चलकर ही सफल होता है या स्वयं में उल्लेखनीय परिवर्तन कर पाता है – यह बात और है कि आप दूसरों द्वारा बनाई पगडंडियों का सहारा लेकर आगे बढ़ने का हौसला जुटाते हैं.

इतना सब होने के बाद भी यहाँ ऐसा कुछ है कि बहुत सारे लोग (मैं भी) व्यक्तित्व विकास के भंवर में कूदकर फंस जाते हैं. ज्यादातर लोग ढेरों ब्लॉग्स को बुकमार्क या सबस्क्राइब कर लेते हैं. वे ऐसे बिन्दुओं के बारे में तय कर लेते हैं जिनपर उन्हें काम करना है और अगले दिन से ही जीवन में आशातीत परिवर्तन की अपेक्षा करने लगते हैं. उसके दूसरे दिन वे अपने जीवन में उतारने के लिए कुछ और बातें छांट लेते हैं और नित-नए खयाली पुलाव बनाने लगते हैं.

यहाँ एक ही समस्या है जिससे सभी जूझते हैं और वह यह है कि शॉर्ट-टर्म उपाय कभी भी लॉंग-टर्म सुधार की ओर नहीं ले जा सकते. अपने व्यक्तित्व में दस नए सुधार लाने के स्थान पर यदि लोग केवल चार सुधार ही लागू करने के बारे में सोचें तो भी इसमें सफलता पाने का प्रतिशत नगण्य है. किसी भी व्यक्ति के चित्त की दशा और उसके कामकाज की व्यस्तता के आधार पर तीन या अधिकतम दो सुधार ला सकना ही बहुत कठिन है.

आप चाहें तो एक झटके में ही स्वयं में पांच सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं. उदाहरण के लिए: आप सुबह जल्दी उठना, रोजाना व्यायाम करना, शक्कर का कम सेवन करना, अपनी टेबल को व्यवस्थित रखना, स्वभाव में खुशमिजाजी लाना आदि कर सकते हैं हांलांकि लंबी अवधि के लिए इन सरल उपायों को साध पाना ही कठिन है और अक्सर ही इनमें से एक-एक करके सभी सकारात्मक उपाय आपका साथ छोड़ देते हैं.

आपकी असफलता के पीछे आपका मानसिक अनुकूलन (mental conditioning) है. कुछ रिसर्च में यह पता चला है कि एक सरल आदत को व्यवहार में लाने के लिए अठारह दिन लग जाते हैं और कठिन आदत को साधने में तीस से चालीस दिन लगते हैं. ऐसी रिसर्च कई बार बेतुकी भी होती हैं पर क्या आपको वाकई यह लगता है कि आप अपनी घोर व्यस्त दिनचर्या में तमाम ज़रूरी काम को अंजाम देते हुए अपना पूरा ध्यान पांच नयी आदतें ढालने या सुधारने में लगा सकते हैं?

नहीं. मुझे तो ऐसा नहीं लगता.

ठहरिये. ज़रा सांस लीजिये…

कुछ पल के लिए रुकें. ऐसी एक दो बातों को तलाशिये जो आप वाकई कर सकते हों और अगले दो-तीन सप्ताह तक पूरे मनोयोग से उन्हें साधने का प्रयत्न करें. कुछ समय बाद आपको उन्हें यत्नपूर्वक नहीं करना पड़ेगा और वे आपकी प्रकृति का अंग बन जायेंगीं.

और ऐसा कर लेने के बाद ही आपको यह पता चल पायेगा कि आप किसी नयी आदत या कौशल को साधने के लिए कितने अनुकूल हैं.

मैं आपसे यह नहीं कह रहा हूँ कि व्यक्तित्व विकास के ब्लॉग्स पढ़ना बंद कर दें. कई बार तो ऐसा होता है कि किसी चीज़ को पढ़ने से होनेवाले मनोरंजन से भी उसे पढ़ने का महत्व बढ़ जाता है. जब भी आप मेरे ब्लॉग या अन्य ब्लौगों की पोस्ट पढ़ें तो यह न सोचें कि आपको इन बातों को अपने रोज़मर्रा के जीवन में उतारना ही है – यदि ऐसा है तो आप मेरे प्रयासों को व्यर्थ ही कर रहे हैं. यदि आपको कुछ अच्छा लगे तो आप उसे कहीं लिख डालें और प्राथमिकता के अनुसार उन्हें सूचीबद्ध कर लें. इस सूची में आप वरीयता के अनुसार अपने जीवन में छोटे-छोटे परिवर्तन लाने के लिए किये जाने वाले उपायों को लिख सकते हैं. केवल एक या दो उपायों को अपना लें, उन्हें अच्छी आदत में विकसित करें, और आगे बढ़ जाएँ. इस तरह आप वाकई अपने में कुछ सुधार का अनुभव करेंगे अन्यथा आप केवल सतही बदलाव का अनुभव की करते रह जायेंगे. ध्यान दें, यदि मनोयोग से कुछ भी नहीं किया जाए तो सारे प्रयत्न व्यर्थ जाते हैं और झूठी सफलता को उड़न-छू होते देर नहीं लगती.

अब सबसे ज़रूरी काम यह करें कि इस पोस्ट को स्वयं में सुधार लाने का सबसे पहला जरिया बनाएं… न पांचवां, न सातवाँ, बल्कि सबसे पहला.

Editor/translator’s Note: This is a guest post from Ross Hudgens. He blogs at Authentic Marketing, where he brings together insights about personal development, marketing, search and social media.

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आदतों से छुटकारा : सफलता की सीढ़ी

यह पोस्ट मेरे प्रिय ब्लौगर लियो बबौटा की एक पोस्ट का अनुवाद है जिसमें हमेशा की तरह मैंने मामूली फेरबदल किये हैं. मूल अंग्रेजी पोस्ट पढ़ने के लिए आप यहाँ क्लिक करें.

बहुत से लोग अपने जीवन के बहुत से पक्षों में इतना फेरबदल करना चाहते कि उन्हें समझ में ही नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से करें.

यह मुश्किल जान पड़ता है: लोग अपनी जीवन शैली में सुधार लाना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि उनकी कुछ आदतें जैसे स्मोकिंग करना और जंक फ़ूड खाना नियंत्रित हो जाएँ, वे बेहतर तरीकों से काम कर सकें, उनके खर्चे सीमा में हों, उनके जीवन में सरलता-सहजता आये, उन्हें परिवार के साथ समय व्यतीत करने को मिले, वे अपने शौक पूरे कर सकें…

लेकिन शुरुआत कहाँ से करें?

यह मुश्किल नहीं है – पांच साल पहले मेरी हालत भी ऊपर जैसी ही थी. एक-एक करके मैंने अपनी आदतें बदलीं.:

* मैंने स्मोकिंग छोडी (और बाद में तो मैंने कई मैराथन दौड़ भी पूरी कीं).
* स्वास्थ्यकर भोजन अपनाया (अब मैं पूर्णतः शाकाहारी बन गया हूँ).
* कर्जे से मुक्ति पाई और पैसे बचाए (अब मुझे धनाभाव नहीं है).
* अपने जीवन को सरल-सहज बनाया.
* वह काम किया जो मुझे प्रिय है.
* सुबह जल्दी उठना शुरू किया और रचनात्मकता बढ़ाई.

यह लिस्ट और भी लंबी हो सकती है. मैं कोई डींगें नहीं हांक रहा हूँ बल्कि यह बताना चाहता हूँ कि यह सब संभव है. यह सब मैंने छः बच्चों के पालन-पोषण के साथ और तीन अलग-अलग तरह के काम करते हुए किया (जिसमें मुझे मेरी पत्नी इवा की भरपूर मदद मिली).

आप लोगों में से कई मेरे हालात से गुज़र चुके होंगे. मेरे एक पाठक क्रेग ने मुझे बताया:

“मानसिक, शारीरिक, और आर्थिक तौर पर पिछले पांच-सात साल मेरे लिए नर्क की तरह रहे हैं. उसके पहले मैं आत्मविश्वास से लबरेज खुशनुमा आदमी था और जो चाहे वह कर सकता था. मुझे नहीं पता कि मेरी ज़िंदगी किस तरह से ढलान पर आ गयी पर अब मैं अपना आत्मविश्वास खो चुका हूँ. मैं तनाव और चिंताओं से बोझिल हूँ. मेरा वजन लगभग 15-20 किलो बढ़ गया है. दिनभर में एक पैकेट सिगरेट फूंक देता हूँ. सच कहूं तो मैं अब खुद को आईने में देखना भी पसंद नहीं करता.”

आगे वह लिखता है:

“रोज़ सबेरे पेट में कुलबुलाहट के साथ ही मेरी नींद खुलती है और मुझे लगता है कि आज का दिन बुरा गुजरेगा. मैं अक्सर देर से सोता हूँ और सुबह उनींदा महसूस करता हूँ. इन मुश्किलों से निबटने के लिए मैंने हर तरह की चीज़ें करके देखीं पर कुछ काम नहीं बना. मैं बस यही चाहता हूँ कि कम-से-कम मेरे दिन की शुरुआत की कुछ बेहतर हो जाए”.

फिर उसने मुझसे सबसे ज़रूरी प्रश्न पूछा: “आपने अपने जीवन को रूपांतरित करने के लिए 2005 में इतने बड़े बदलाव कैसे कर लिए? आपने सुबह जल्दी उठकर सकारात्मत्कता के साथ अपने दिन की शुरुआत करना कैसे सीखा?”

वर्ष 2005 में मैं ज़िंदगी के बुरे दौर से गुज़र रहा था और अपने जीवन में इतने सारे बदलाव कर रहा था कि मैं उनमें उलझ कर रह गया. इस सबसे मन में बड़ी गहरी हताशा घर कर रही थी.

फिर मैंने (इवा से शादी करने के अलावा) अपने जीवन का एक बेहतरीन निर्णय लिया.

मैंने सिर्फ एक ही आदत का चुनाव किया.

बाकी आदतें पीछे आतीं रहीं. एक ही आदत को ध्येय बनाकर शुरुआत करने के ये चार परिणाम निकले.

1. एक आदत को ढाल पाना मेरे बस में रहा. एक आदत विकसित की जा सकती है – 15 आदतों को बदलने का प्रयास करना कठिन है.

2. इससे मैं एक जगह फोकस कर सका. मैं अपनी समस्त ऊर्जा को एक जगह लगा सका. जब आप बहुत सी आदतें एक-साथ बदलना चाहते हैं तो वे एक-दूसरे में उलझकर आपकी ऊर्जा नष्ट करतीं हैं और आप असफल हो जाते हैं.

3. इससे मुझे यह भी पता चला कि आदतों को कैसे बदला जाता है – और इस ज्ञान को मैं दूसरी आदतें बदलने में प्रयुक्त कर सका.

4. इसमें मिली सफलता से मैंने अपनी ऊर्जा और उत्साह को अगली चीज़ हासिल करने में लगाया.

ऊपर कही गयी बातों में प्रत्येक का बहुत महत्व है. मैं पहली तीन बातों के विस्तार में नहीं जाऊंगा क्योंकि मुझे लगता है कि वे स्वयं अपने बारे में बहुत कुछ कह देतीं हैं. चौथा बिंदु इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण है और इसपर कुछ चर्चा की जा सकती है (नीचे पढ़ें).

कौन सी आदत चुनें?

मैंने सबसे पहले स्मोकिंग छोड़ने के बारे में सोचा क्योंकि मेरे लिए यह सबसे ज्यादा ज़रूरी था. आज पीछे मुड़कर देखने पर लगता है कि इस आदत को बदलना वाकई सबसे ज्यादा कठिन था. मैं सभी को यह सलाह दूंगा कि सबसे पहले उस आदत को बदलने की सोचें जिससे बाहर निकलना सबसे आसान हो.

लेकिन सच तो यह है कि इस बात का कोई ख़ास महत्व नहीं है. यदि अप अपनी 15 आदतों को बदलना चाहते हों और वे सभी एक समान महत्वपूर्ण हों तो उनमें से किसी का भी चुनाव randomly किया जा सकता है.

लंबी योजना में इस बात का अधिक महत्व नहीं है कि आपने किस चीज़ से शुरुआत की. आज से पांच साल बाद आप पलटकर देखेंगे तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि आपने किन आदतों को बदलने से शुरुआत की थी. अभी आपको यह बात ज़रूरी लगती है पर सवाल आपने एक महीने भर का नहीं है – यह आपके पूरे जीवन की बेहतरी के लिए है.

कोई एक आदत चुन लें. कोई सी भी. कोई आसान सी चुन लें. बात सिर्फ इतनी है कि आप शुरुआत भर कर दें.

सफलता की सीढ़ियाँ

एक आदत का चुनाव कर लेने से उसे आधार बनाकर स्वयं में महत्वपूर्ण और दूरगामी परिवर्तन किये जा सकते हैं. यदि आपने इसके बारे में पहले नहीं सोचा है तो यह समय बहुत महत्वपूर्ण है. आपको इस क्षण स्वयं को टटोलना शुरू कर देना चाहिए. आप परिपूर्ण नहीं हैं. यदि आप प्रयास करेंगे तो आप अपने भीतर उन कमियों या खामियों को खोज सकेंगे जिनके निराकरण से आपके जीवन में बेहतर बदलाव आयें.

90 के दशक में मैंने बिल गेट्स की एक किताब पढ़ी थी जिसमें उसने अपनी ‘सफलता की सीढ़ियों’ के बारे में लिखा है. उसने MS-DOS बनाया और उसकी सफलता को आधार बनाकर MS-Word और फिर विन्डोज़, फिर विन्डोज़ 95, फिर एक्सेल, ऑफिस, इंटरनेट एक्स्प्लोरर… और भी बहुत कुछ (यह क्रम गड़बड़ हो सकता है पर उसकी बात गैरज़रूरी है)

मैं बिल गेट्स का कोई फैन नहीं हूँ लेकिन उसका परखा और सुझाया गया सिद्धांत न केवल बिजनेस में बल्कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में लागू किया जा सकता है और वह यह है कि एक आदत बदलने से मिलनेवाली सफलता से आप शानदार अनुभव करेंगे. आप इससे इतने उत्साह में डूब जायेंगे कि आप फ़ौरन दूसरी आदत से पीछा छुड़ाने की सोचेंगे. यदि शुरुआत में आपने अपना ध्यान केवल एक ही आदत पर केन्द्रित रखा तो आपको आगे और भी सफलता मिलेगी और आप और आगे बढ़ते चले जायेंगे.

फिर जल्द ही आप शिखर पर होंगे और लोग आपसे पूछेंगे कि आपने यह कैसे किया. तब आप मेरा नाम नहीं लेना पर बिल गेट्स के बारे में ज़रूर बताना क्योंकि उसका अहसान चुकाना बहुत ज़रूरी है:)

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‘नये साल में यह नया करें’ – प्रीतीश नंदी

समय बड़ी जल्दी बीत जाता है. कुछ ही दिनों पहले नए साल की धूमधाम हो रही थी और देखते-देखते जनवरी ख़त्म होने को आ गया. यदि आपने नए साल में कुछ बेहतर करने या बेहतर बनने का सोचा हो तो आपको श्री प्रीतिश नंदी जी के लेख से प्रेरणा मिलेगी जिसे मैंने रविवार वेब पत्रिका से साभार लिया है. पढ़ें और मनन करें:

आमतौर पर वर्षगांठ या सालगिरह के मौके पर कोई न कोई प्रण लिया जाता है या कोई कसम खाई जाती है. अक्सर तो कोई लत या बुरी आदत छोडऩे का ही प्रण लिया जाता है. मैंने अपने कई दोस्तों को यह कसम खाते हुए देखा है कि आज के बाद वे सिगरेट छोड़ देंगे, शराब से तौबा कर लेंगे, चॉकलेट को हाथ न लगाएंगे, गाड़ी तेज न चलाएंगे, वक्त पर दफ्तर पहुंचेंगे वगैरह-वगैरह. यह फेहरिस्त बहुत लंबी हो सकती है, लेकिन अमूमन ये कसमें लंबे समय तक निभाई नहीं जातीं. शायद ये कसमें लंबे समय तक निभाए जाने के लिए होती भी नहीं हैं.

पिछले शनिवार को मेरा जन्मदिन था. मैंने हर बार की ही तरह अपना जन्मदिन मनाया. मैंने अपने रोजमर्रा के कामकाज से छुट्टी ली और उन बातों पर विचार किया, जो मेरे लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं. इनमें से कोई भी बात ऐसी न थी, जिससे किसी को बहुत फर्क पड़ता या जिससे दुनिया इधर-उधर हो जाती. मैं अपना जन्मदिन मनाने के लिए एक ऐसी जगह पर चला गया, जिसे मैं अपनी ‘शरणस्थली’ कहता हूं. मैं कभी-कभी वहां कुछ दिनों के लिए चला जाता हूं. यह एक दिन है, जिसे मैं अपने लिए बचाकर रखता हूं. अपने जन्मदिन पर मैं किन्हीं नकारात्मक बातों पर विचार नहीं करता, इसलिए कोई प्रण भी नहीं लेता. इसके उलट मैं तो कुछ नई आदतें डाल लेने की कोशिश करता हूं. मैं अपने जीवन को अधिक समृद्ध और संपूर्ण बनाना चाहता हूं. मैं कुछ नया सीखना चाहता हूं.

हमें ‘हां’ को अपने जन्मदिन का प्रण बनाना चाहिए, ‘ना’ को नहीं. मैं स्वीकारता हूं कि दुनिया बदल गई है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि लोगों ने जो कुछ किया, वह सब गलत था. फिर चाहे वे ऑड्रे हापबर्न हों, जिन्होंने ब्रेकफास्ट एट टिफनी में सिगरेट पीकर स्मोकिंग को एक चलन बना दिया था या फिर चाहे डिलन टॉमस हों, जो दिन-रात शराबनोशी करते थे, लेकिन उन्होंने अपने समय की सबसे अच्छी कविता लिखी. यदि आपको मेरी बात पर यकीन नहीं होता तो रिचर्ड बर्टन, जो सर्वकालिक महान अभिनेताओं में से एक हैं, को डिलन टॉमस की कविताओं का पाठ करते सुनिए. इसे ही मैं सही मायनों में एक बदलाव कहता हूं.

हमें न्यायाधीश बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. हम ड्रग्स लेने वाले जिम मॉरिसन के लिए कोई फैसला क्यों लें क्या हम जिम मॉरिसन के गीतों और उनके संगीत को सुनकर उसके बारे में विचार नहीं कर सकते? अल्डुअस हक्सले ने कहा था कि मेस्कलिन के बिना दिमाग की खिड़कियां और विचारों के दरवाजे कभी नहीं खुल सकते. उन्होंने नोबेल पुरस्कार जीता. एलेन गिंसबर्ग ने अपनी श्रेष्ठ कविताएं गंगा नदी के किनारे श्मशान पर सिगरेट फूंकते हुए लिखीं. कैनेडी ने इतनी अच्छी तरह से अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वाह किया था. तब क्या हमें उनके निजी जीवन के अविवेकपूर्ण कार्यों के आधार पर उनके बारे में कोई निर्णय लेना चाहिए?

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