चेरनोबिल के रब्बाई नाहुम को उनका पड़ोसी दुकानदार अपशब्द आदि कहकर अपमानित करता रहता था. एक समय ऐसा आया कि दुकानदार का धंधा मंदा चलने लगा.
“इसमें ज़रूर रब्बाई का हाथ है. वही ईश्वर से प्रार्थना करके अपना बदला निकाल रहा है” – उसने सोचा. फिर वह नाहुम के पास अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगने गया.
“मैं तुम्हें उसी भावना से क्षमा करता हूँ जिस भावना के वशीभूत होकर तुम क्षमा मांगने आये हो” – रब्बाई ने दुकानदार से कहा.
लेकिन दुकानदार का धंधा गिरता ही गया और अंततः वह बर्बाद हो गया. नाहुम के अनुयाइयों ने उससे दुकानदार के बारे में पूछा.
“मैंने उसे क्षमा कर दिया था परन्तु वह अपने मन में मेरे प्रति घृणा का पालन-पोषण करता रहा. इसके परिणामस्वरूप उसकी अच्छाई भी दूषित हो गयी और उसे मिला दंड कठोर होता गया.”
(A motivational / inspiring story about a Jew priest – in Hindi)

















