जैसा बांटोगे, वैसा पाओगे

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किसी गांव में एक किसान रहता था जो मक्का उगाता था. उसे हर साल सबसे अच्छे मक्का उगानेवाले किसान का पुरस्कार मिलता था. एक अखबार का रिपोर्टर उसका इंटरव्यू लेने के लिए आया और उसने किसान से बेहतरीन मक्का उगाने का राज़ पूछा. कई बातों के साथ किसान ने उसे यह भी बताया कि जिन […]

खोटा सिक्का

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यह एक सूफी कथा है. किसी गाँव में एक बहुत सरल स्वभाव का आदमी रहता था. वह लोगों को छोटी-मोटी चीज़ें बेचता था. उस गाँव के सभी निवासी यह समझते थे कि उसमें निर्णय करने, परखने और आंकने की क्षमता नहीं थी. इसीलिए बहुत से लोग उससे चीज़ें खरीदकर उसे खोटे सिक्के दे दिया करते […]

जिंदगी की U ट्यूब

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संजय सिन्हा पेशे से पत्रकार हैं और दिल्ली में रहते हैं. फेसुबक पर उनके लंबे स्टेटस जिंदगी और उससे जुड़े मसलों पर संजीदगी से सोचने को मजबूर करते हैं. उन्हें पढ़ने पर यह अहसास गहरा होता है कि अपनी तमाम दुश्वारियों और लाचारियों के बावजूद हमारी ज़िंदगी और ये दुनिया यकीनन बहुत सुंदर है. प्यार, […]

नीर-क्षीर विवेक

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कुछ लोग कहते है कि हमें किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए. किसी को भला, किसी को बुरा कहना राग-द्वेष है. सही भी है, किसी की निंदा करना बुरा है. किन्तु भले और बुरे में सम्यक भेद करना उससे भी कहीं अधिक उत्तम है. भला-बुरा, हित-अहित और सत्यासत्य का विवेक रखकर, बुरा अहितकारी और असत्य […]

How to Purify the World? – संसार की शुद्धि

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सूफी गुरु इब्न-अल-हुसैन से एक शिष्य ने पूछा – “दुनिया में शांति और पवित्रता कैसे आएगी?” हुसैन ने कहा – “दमिश्क में अबू मूसा अल-कुमासी नामक एक शेख रहता था. उसके इल्म और अच्छाई की सब मिसाल देते थे लेकिन हक़ीक़त में किसी को यह पता नहीं था कि वह वाकई भला आदमी है भी […]

मन और पत्थर

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एक ज़ेन शिष्य ने गुरु से प्रश्न किया, “ज़ेन में ऐसा क्या है जो बहुत बुद्धिमान लोग भी इसे समझ नहीं पाते?” ज़ेन गुरु उठे, उन्होंने एक पत्थर उठाया और पूछा, “यदि झाड़ियों से एक शेर निकलकर हमारी ओर बढ़ने लगे और हमपर हमले के लिए तैयार हो तो क्या इस पत्थर से हमें कुछ […]

“अच्छा” आदमी बने रहने के खतरे

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“आप बहुत अच्छे आदमी हैं” या “you are very nice”. अक्सर ही किसी से भी यह सुनकर मुझे बहुत ख़ुशी होती थी. मुझे लगता था कि यह किसी भी व्यक्ति से मिलनेवाली सबसे बढ़िया प्रशंसोक्ति है. फिर मुझे अपने और अन्य “अच्छे आदमियों” के जीवन को ध्यान से देखने पर यह अनुभव होने लगा कि […]

क्षमा : Forgiveness

चेरनोबिल के रब्बाई नाहुम को उनका पड़ोसी दुकानदार अपशब्द आदि कहकर अपमानित करता रहता था. एक समय ऐसा आया कि दुकानदार का धंधा मंदा चलने लगा. “इसमें ज़रूर रब्बाई का हाथ है. वही ईश्वर से प्रार्थना करके अपना बदला निकाल रहा है” – उसने सोचा. फिर वह नाहुम के पास अपनी गलतियों के लिए क्षमा […]

मरू-संहिता : The Code of Desert

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सहारा रेगिस्तान को पार करते हुए दो यात्रियों ने एक खानाबदोश बद्दू की झोपड़ी को देखा और उसमें रुकने की इज़ाज़त मांगी. जैसे सभी बंजारा जातियां करतीं हैं, बद्दू  ने बहुत हर्षोल्लास से उनका स्वागत किया और उनकी दावत के लिए एक ऊँट को जिबह करके बेहतरीन भोजन परोसा. अगले दिन दोनों यात्री तड़के ही […]

दो भेड़िये : Two Wolves

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एक गुरु नदी के किनारे अपने शिष्य के साथ बैठकर वार्तालाप कर रहा था. शिष्य अभी बहुत छोटा था और उसने गुरु से अच्छाई और बुराई के बारे में कुछ पूछा. “तुम जानते हो, हमारे भीतर हमेशा एक युद्ध चलता रहता है” – गुरु ने शिष्य से कहा – “दो भेड़ियों के बीच एक अंतहीन […]