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ये खेल होगा नहीं दोबारा
ये ज़िंदगी… ये ज़िंदगी… ये ज़िंदगी आज जो तुम्हारे बदन की छोटी-बड़ी नसों में मचल रही है, तुम्हारे पैरों से चल रही है. ये ज़िंदगी… ये ज़िंदगी… तुम्हारी आवाज़ में गले से निकल रही है, तुम्हारे लफ़्ज़ों में ढल रही है. ये ज़िंदगी… ये ज़िंदगी… ये ज़िंदगी जाने कितनी सदियों से यूंही शक्लें बदल रही है. ये ज़िंदगी… ये ज़िंदगी… बदलती शक्लों, [...]
स्टीव जॉब्स और चीनी किसान
मैं स्टीव जॉब्स की रचनात्मकता और जीवट का हमेशा से ही कायल रहा हूँ हांलांकि मैंने उसके बिजनेसमैन रूप की सदा ही आलोचना की है. ऐपल के प्रोडक्ट शानदार हैं पर सभी जानते हैं कि वे ऐसे बनाये गए हैं ग्राहक को कुछ भी करने के लिए ऐपल पर ही निर्भर रहना पड़ता है. आज [...]
दो साल बाद…
यह पोस्ट इस ब्लौग के दो साल पूरे होने के विषय पर लिखी है. यदि इसे पढ़ने में आपकी रूचि न हो तो अन्य पोस्ट पढ़ने के लिए कृपया आर्काइव पर क्लिक करें. हिंदीज़ेन ब्लॉग पर मैं पिछले दो सालों से काम कर रहा हूँ. यह पहले ब्लॉगर में था और 1 मई, 2009 से [...]
भारत के बारे में 30 रोचक (?) बातें
मेरे तीस वर्षीय अमेरिकन मित्र राम देव ब्लौगर और शोशल उद्यमी (social entrepreneur) हैं एवं स्वयं को digital nomad (डिजिटल बंजारा) कहते हैं. राम देव अपने ब्लॉग में चिरस्थाई समृद्धि और व्यावहारिक अपरिग्रह के बारे में लिखते हैं. कुछ समय पहले वे भारत में थे और भारत दर्शन के बारे में उन्होंने अपने ब्लॉग raamdev.com [...]
हिंदू विवाह पद्धति का विवेचन
श्री देवदत्त पटनायक का यह आलेख अंग्रेजी पत्रिका ‘फर्स्ट सिटी’ में 11 जनवरी, 2011 को प्रकाशित हो चुका है. उनकी अनुमति से मैं इसका हिंदी अनुवाद करके यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ. यदि आप मूल अंग्रेजी आलेख पढना चाहें तो यहाँ क्लिक करें. आधुनिक विश्व में विवाह अब अनगिनत विकल्पों और समझौतों का विषय बन गया है. लड़का और [...]

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