Category Archives: Tao Stories

बचपन – Childhood

कन्फ्यूशियस अपने शिष्यों के साथ लंबी यात्रा पर था. मार्ग में उसने किसी गाँव में रहनेवाले एक बुद्धिमान बालक के बारे में सुना. कन्फ्यूशियस उस बालक से मिला और उससे पूछा:

“विश्व में मनुष्यों के बीच बहुत असमानताएं और भेदभाव हैं. इन्हें हम किस प्रकार दूर कर सकते हैं?”

“लेकिन ऐसा करने की आवश्यकता ही क्या है?”, बालक ने कहा, “यदि हम पर्वतों को तोड़कर समतल कर दें तो पक्षी कहाँ रहेंगे? यदि हम नदियों और सागर को पाट दें तो मछलियाँ कैसे जीवित रहेंगीं? विश्व इतना विशाल और विस्तृत है कि इन असमानताओं और विसंगतियों का उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता.”

कन्फ्यूशियस के शिष्य बालक की बात सुनकर बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने बालक की भूरि-भूरि प्रशंसा की. लेकिन कन्फ्यूशियस ने कहा:

“मैंने ऐसे बहुत से बच्चे देखे हैं जो अपनी अवस्था के अनुसार खेलकूद करने और बालसुलभ गतिविधियों में मन लगाने की बजाय दुनिया को समझने की कोशिश में लगे रहते हैं. और मैंने यह पाया कि उनमें से एक भी प्रतिभावान बच्चे ने आगे जाकर अपने जीवन में कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं किया क्योंकि उन्होंने अपने बचपन की सरलता और सहज अनुत्तरदायित्व का कोई अनुभव नहीं किया.


 

Confucius was travelling with his disciples when he learned that a very intelligent boy lived in a certain village. Confucius went there to talk to him and asked:

“What if you helped me put an end to inequality?

“Why put an end to inequality?” asked the boy. “If we flatten the mountains, the birds will no longer have shelter. If we put an end on the depth of the rivers and oceans, all fish will die. If the chief of the village has the same authority as the fool, no one will understand one another right. The world is very vast, let us keep its differences.”

The disciples left very impressed with the boy’s wisdom. As they were already on their way to another city, one of them said all children should be like that.

“I have met many children who instead of playing and doing things of their age, sought to understand the world,” said Confucius. “And none of these precocious children was able to something important later, because they never experienced innocence and the healthy irresponsibility of childhood.”

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चंद्रमा की ओर इशारा – Finger Pointing to the Moon

भिक्षुणी वू जिन्कांग ने आचार्य हुइनेंग से पूछा, “मैं कई वर्षों से महापरिनिर्वाण सूत्र का पारायण कर रही हूं लेकिन इनमें कही अनेक बातों को समझ नहीं पा रही हूं. कृपया मुझे उनका ज्ञान दें.”

आचार्य ने कहा, “मुझे पढ़ना नहीं आता. यदि तुम मुझे वे अंश पढ़कर सुना दो तो शायद मैं तुम्हें उनका अर्थ बता पाऊं.”

भिक्षुणी ने कहा, “आपको लिखना-पढ़ना नहीं आता फिर भी आप इन गूढ़ शास्त्रों का ज्ञान कैसे आत्मसात कर लेते हैं?”

“सत्य शब्दों पर आश्रित नहीं होता. यह आकाश में दीप्तिमान चंद्रमा की भांति है, और शब्द हमारी उंगली हैं. उंगली से इशारा करके आकाश में चंद्रमा की स्थिति को दर्शाया जा सकता है, लेकिन उंगली चंद्रमा नहीं है. चंद्रमा को देखने के लिए दृष्टि को उंगली के परे ले जाना पड़ता है. ऐसा ही है न?”, आचार्य ने कहा.

finger-moon-hoteiइस दृष्टांत का सार यह है कि चंद्रमा की ओर इंगित करने वाली उंगली चंद्रमा नहीं है. क्या इसका कोई गहन अर्थ भी है? हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन से इसका क्या संबंध है? इस दृष्टांत के अर्थ का हम किस प्रकार उपयोग कर सकते हैं?

चित्र में लॉफ़िंग बुद्ध होतेई चंद्रमा की ओर इशारा कर रहा है. होतेई चीन के परवर्ती लियांग राजवंश (907–923 ईसवी) में महात्मा था. प्रसन्नता और संतोष होतेई के चित्र व चरित्र का रेखांकन करने वाले प्रमुख तत्व हैं. उसकी थलथलाते हुए पेट और प्रसन्नचित्त मुखमंडल की छवि विषाद हर लेती है.

* * * * *

The nun Wu Jincang asked the Sixth Patriach Huineng, “I have studied the Mahaparinirvana sutra for many years, yet there are many areas i do not quite understand. Please enlighten me.”

The patriach responded, “I am illiterate. Please read out the characters to me and perhaps I will be able to explain the meaning.”

Said the nun, “You cannot even recognize the characters. How are you able then to understand the meaning?”

“Truth has nothing to do with words. Truth can be likened to the bright moon in the sky. Words, in this case, can be likened to a finger. The finger can point to the moon’s location. However, the finger is not the moon. To look at the moon, it is necessary to gaze beyond the finger, right?”

The finger pointing to the moon is not the moon is the essence here. But what does this mean on a deeper level? How does it relate to todays everyday life? How can we understand the meaning in an useful manner?

The laughing Buddha Hotei is pointing to the moon, who was a monk who lived during the Later Liang Dynasty (907–923 AD) of China. Contentment and happiness being his defining attributes, Hotei has a cheerful face and a big belly.

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मछली पकड़ने की कला

लाओ-त्ज़ु ने एक बार मछली पकड़ना सीखने का निश्चय किया। उसने मछली पकड़ने की एक छड़ी बनाई, उसमें डोरी और हुक लगाया। फ़िर वह उसमें चारा बांधकर नदी किनारे मछली पकड़ने के लिए बैठ गया। कुछ समय बाद एक बड़ी मछली हुक में फंस गई। लाओ-त्ज़ु इतने उत्साह में था की उसने छड़ी को पूरी ताक़त लगाकर खींचा। मछली ने भी भागने के लिए पूरी ताक़त लगाई। फलतः छड़ी टूट गई और मछली भाग गई।

लाओ-त्ज़ु ने दूसरी छड़ी बनाई और दोबारा मछली पकड़ने के लिए नदी किनारे गया। कुछ समय बाद एक दूसरी बड़ी मछली हुक में फंस गई। लाओ-त्ज़ु ने इस बार इतनी धीरे-धीरे छड़ी खींची कि वह मछली लाओ-त्ज़ु के हाथ से छड़ी छुडाकर भाग गई।

लाओ-त्ज़ु ने तीसरी बार छड़ी बनाई और नदी किनारे आ गया। तीसरी मछली ने चारे में मुंह मारा। इस बार लाओ-त्ज़ु ने उतनी ही ताक़त से छड़ी को ऊपर खींचा जितनी ताक़त से मछली छड़ी को नीचे खींच रही थी। इस बार न छड़ी टूटी न मछली हाथ से गई। मछली जब छड़ी को खींचते-खींचते थक गई तब लाओ-त्ज़ु ने आसानी से उसे पानी के बाहर खींच लिया।

उस दिन शाम को लाओ-त्ज़ु ने अपने शिष्यों से कहा – “आज मैंने संसार के साथ व्यवहार करने के सिद्धांत का पता लगा लिया है। यह समान बलप्रयोग करने का सिद्धांत है। जब यह संसार तुम्हें किसी ओर खींच रहा हो तब तुम समान बलप्रयोग करते हुए दूसरी ओर जाओ। यदि तुम प्रचंड बल का प्रयोग करोगे तो तुम नष्ट हो जाओगे, और यदि तुम क्षीण बल का प्रयोग करोगे तो यह संसार तुमको नष्ट कर देगा।”

(A Tao story of Lao-tzu – Fishing and Life – in Hindi)

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उपाय

ज़िज्हांग पूरे चीन में कन्फ्यूशियस को खोज रहा था. देश बहुत बड़े उतार-चढ़ाव से गुज़र रहा था और सभी के मन में अराजकता और रक्तपात का भय समाने लगा था.

उसने कन्फ्यूशियस को बरगद के पेड़ के नीचे ध्यानमग्न देखा.

“मास्टर! हम चाहते हैं कि आप सरकार की सहायता करें. आपके मार्गदर्शन के बिना यह देश बिखर जाएगा”

कन्फ्यूशियस बस मुस्कुरा दिया.

“मास्टर, आपने हमें हमेशा कर्म करने की ही शिक्षा दी है”, ज़िज्हांग ने कहा, “आपने ही यह बताया है कि देश और दुनिया के प्रति हमारे क्या कर्तव्य हैं!”

“मैं देश के लिए प्रार्थना कर रहा हूं”, कन्फ्यूशियस ने कहा, “और उसके बाद मैं मोहल्ले के व्यक्तियों की मदद करने के लिए जाऊँगा. अपनी सीमाओं और परिवेश के भीतर रहकर ज़रूरी काम करके हम सभी का हित कर सकते हैं.”

“यदि हम दुनिया को बचाने के उपाय ही खोजते रहेंगे तो हमारे हाथ कुछ नहीं आएगा. हम अपनी सहायता भी नहीं कर पायेंगे.”

“राजनीति से सम्बद्ध होने के सैंकड़ों तरीके हैं, उसके लिए मुझे सरकार का अंग बनने की आवश्यकता नहीं है”.

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बुद्धिमान बालक

stop eating animalsकिसी नगर में रहनेवाला एक धनिक लम्बी तीर्थयात्रा पर जा रहा था। उसने नगर के सभी लोगों को यात्रा की पूर्वरात्रि में भोजन पर आमंत्रित किया। सैंकडों लोग खाने पर आए। मेहमानों को मछली और मेमनों का मांस परोसा गया। भोज की समाप्ति पर धनिक सभी लोगों को विदाई भाषण देने के लिए खड़ा हुआ। अन्य बातों के साथ-साथ उसने यह भी कहा – “परमात्मा कितना कृपालु है कि उसने मनुष्यों के खाने के लिए स्वादिष्ट मछलियाँ और पशुओं को जन्म दिया है”। सभी उपस्थितों ने धनिक की बात में हामी भरी।

भोज में एक बारह साल का लड़का भी था। उसने कहा – “आप ग़लत कह रहे हैं।”

लड़के की बात सुनकर धनिक आश्चर्यचकित हुआ। वह बोला – “तुम क्या कहना चाहते हो?”

लड़का बोला – “मछलियाँ और मेमने एवं पृथ्वी पर रहनेवाले सभी जीव-जंतु मनुष्यों की तरह पैदा होते हैं और मनुष्यों की तरह उनकी मृत्यु होती है। कोई भी प्राणी किसी अन्य प्राणी से अधिक श्रेष्ठ और महत्वपूर्ण नहीं है। सभी प्राणियों में बस यही अन्तर है कि अधिक शक्तिशाली और बुद्धिमान प्राणी अपने से कम शक्तिशाली और बुद्धिमान प्राणियों को खा सकते हैं। यह कहना ग़लत है कि ईश्वर ने मछलियों और मेमनों को हमारे लाभ के लिए बनाया है, बात सिर्फ़ इतनी है कि हम इतने ताक़तवर और चालक हैं कि उन्हें पकड़ कर मार सकें। मच्छर और पिस्सू हमारा खून पीते हैं तथा शेर और भेड़िये हमारा शिकार कर सकते हैं, तो क्या ईश्वर ने हमें उनके लाभ के लिए बनाया है?”

च्वांग-त्ज़ु भी वहां पर मेहमानों के बीच में बैठा हुआ था। वह उठा और उसने लड़के की बात पर ताली बजाई। उसने कहा – “इस एक बालक में हज़ार प्रौढों जितना ज्ञान है।”

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