Category Archives: Quotations

To the Living : जीवन के प्रति


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किसी ने दलाई लामा से पूछा, “मनुष्यों के संबंध में वह कौन सी चीज़ है जो आपको सबसे अधिक आश्चर्यचकित करती है?”
दलाई लामा ने कहा. “स्वयं मनुष्य…
क्योंकि वह पैसे कमाने के लिए अपने स्वास्थ्य को गंवाता है.
फिर वह उसी पैसे से अपने स्वास्थय को संजोने का प्रयास करता है.
वह अपने भविष्य को लेकर इतना चिंतित रहता है कि वर्तमान को ठीक से नहीं जी पाता है.
इसके फलस्वरूप वह न तो वर्तमान में और न भविष्य में ही सुखपूर्वक जीता है,
वह ऐसे जीता है जैसे उसे कभी नहीं मरना है, और पूरी तरह जिए बिना ही मर जाता है”

(~_~)

The Dalai Lama, when asked what surprised him most about humanity, he said:
“Man.
Because he sacrifices his health in order to make money.
Then he sacrifices money to recuperate his health.
And then he is so anxious about the future that he does not enjoy the present;
the result being that he does not live in the present or the future;
he lives as if he is never going to die, and then dies having never really lived.”

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हारुकी मुराकामी – Haruki Murakami Quotes


हारुकी मुराकामी का यह फोटो न्यूयॉर्क टाइम्स से लिया गया है

हारुकी मुराकामी का यह फोटो न्यूयॉर्क टाइम्स से लिया गया है

हारुकी मुराकामी (जन्म 1949) हमारे दौर के सबसे महत्वपूर्ण लेखकों में हैं. मुझे उनकी कही तकरीबन हर बात बहुत गहरी प्रतीत होती है. मैंने उनकी किताबों से कुछ quotes लेकर उनका अनुवाद करने का प्रयास किया है.


यदि तुम वही किताबें पढ़ रहे हो जो और लोग भी पढ़ रहे हैं तो तुम वही सोच पाओगे जो वे सोच रहे हैं.

If you only read the books that everyone else is reading, you can only think what everyone else is thinking.

स्मृतियां हमारे भीतर गर्माहट पैदा करती हैं लेकिन वे हमें छिन्न-भिन्न भी कर देती हैं. 

Memories warm you up from the inside. But they also tear you apart.

और जब तूफ़ान गुज़र जाएगा तो तुम भूल जाओगे कि तुमने इसका सामना कैसे किया, तुम इससे कैसे बच पाए. शायद तुम्हें यह भी लगे कि तूफ़ान वाकई बीत भी गया है या नहीं. इस सबमें सिर्फ एक ही चीज़ नियत है- यह कि तूफ़ान का सामना कर चुकने के बाद तुम वही शख्स नहीं रहोगे जो तुम पहले थे.

And once the storm is over, you won’t remember how you made it through, how you managed to survive. You won’t even be sure, whether the storm is really over. But one thing is certain. When you come out of the storm, you won’t be the same person who walked in.

मैं सपने देखता हूं. कभी-कभी मुझे लगता है सिर्फ यही एक करने लायक काम है.

I dream. Sometimes I think that’s the only right thing to do.

कौन जानता है किसके लिए क्या सही है? इसीलिए मैं कहता हूं कि तुम्हें खुशी का जो भी मौका मिले उसे तुम गंवाओ मत और दूसरों की परवाह नहीं करो. मैं अपने अनुभव से कहता हूं कि हमें ज़िंदगी में ऐसे मौके दो-तीन से ज्यादा नहीं मिलते और अगर हम उन्हें हाथ से जाने दें तो हमें ताउम्र उसका अफ़सोस सालता रहेगा.

But who can say what’s best? That’s why you need to grab whatever chance you have of happiness where you find it, and not worry about other people too much. My experience tells me that we get no more than two or three such chances in a life time, and if we let them go, we regret it for the rest of our lives.

तुम्हें कभी देखता हूं तो लगता है जैसे दूर किसी तारे को निहार रहा हूं. इसमें चमक है लेकिन ये रौशनी हजारों साल पुरानी है. हो सकता है वह तारा अब अस्तित्व में ही न हो. फिर भी यह रौशनी मुझे हर चीज से कहीं ज्यादा वास्तविक जान पड़ती है.

Sometimes when I look at you, I feel I’m gazing at a distant star. It’s dazzling, but the light is from tens of thousands of years ago. Maybe the star doesn’t even exist any more. Yet sometimes that light seems more real to me than anything.

खोए हुए अवसर, खोई संभावनाए, और अनुभूतियां जो हमें फिर कभी नहीं मिलेंगीं- जीवित होने की ये कुछ निशानियां हैं. हमारे सिरों के भीतर… मुझे लगता है शायद उसी जगह… वहां एक छोटे से कमरे में हमने ये स्मृतियां रख छोड़ी हैं. किसी लाइब्रेरी के रैक जैसा है यह कमरा. और अपने दिल की कारगुज़ारियों को समझने के लिए हम नए रेफरेंस कार्ड्स बनाते रहते हैं. कभी-कभार हम धूल झाड़ देते हैं, ताज़ा हवा भीतर आने देते हैं और गुलदस्तों का पानी बदल देते हैं. दूसरे लफ्ज़ों में कहूं तो हम अपनी प्राइवेट लाइब्रेरी में ही हमेशा बने रहते हैं.

Lost opportunities, lost possibilities, feelings we can never get back. That’s part of what it means to be alive. But inside our heads – at least that’s where I imagine it – there’s a little room where we store those memories. A room like the stacks in this library. And to understand the workings of our own heart we have to keep on making new reference cards. We have to dust things off every once in awhile, let in fresh air, change the water in the flower vases. In other words, you’ll live forever in your own private library.

मुझे एक अजीब सा अहसास हो रहा है जैसे कि मैं ‘मैं’ नहीं हूं. इसे शब्दों में कहना मुश्किल है- यह कुछ ऐसा ही है जैसे मैं गहरी नींद में था और किसी ने आकर मुझे मुझे अलग-अलग करके जल्दबाजी में दोबारा जोड़ दिया. ऐसे ही अहसास से मैं गुज़र रहा हूं.

I have this strange feeling that I’m not myself anymore. It’s hard to put into words, but I guess it’s like I was fast asleep, and someone came, disassembled me, and hurriedly put me back together again. That sort of feeling.

ध्यान से सुनो. ऐसा कोई युद्ध नहीं है जो सभी युद्धों का अंत कर दे.

Listen up – there’s no war that will end all wars.

“क्या होता है जब लोग अपने दिलों को खोल देते हैं?” … “वे बेहतर बन जाते हैं.”

“What happens when people open their hearts?” … “They get better.”

तुम्हारी लाख कोशिशों के बाद भी लोग नाराज़ हो जाएंगे जब उनके नाराज़ होने का वक्त करीब आ जाएगा.

Despite your best efforts, people are going to be hurt when it’s time for them to be hurt.

आंखें बंद कर लेने से कुछ बदल नहीं जाएगा. तुम उसे देख नहीं पाओगे तो वह गायब नहीं हो जाएगा. यह भी हो सकता है कि अगली बार जब तुम आंखें खोलो तो हालात और भी बिगड़ चुके हों. हम ऐसी ही दुनिया में जी रहे हैं. अपनी आंखें पूरी खुली रखो. कायर ही अपनी आंखें मूंद लेते हैं. तुम्हारे आंखें और कान बंद कर लेने से वक्त थम नहीं जाएगा.

Closing your eyes isn’t going to change anything. Nothing’s going to disappear just because you can’t see what’s going on. In fact, things will even be worse the next time you open your eyes. That’s the kind of world we live in. Keep your eyes wide open. Only a coward closes his eyes. Closing your eyes and plugging up your ears won’t make time stand still.

सबकी ज़िंदगी में ऐसा एक बिंदु आता है जहां से लौटना मुमकिन नहीं होता. और बहुत थोड़े मामलों में एक बिंदु ऐसा भी होता है जिसके आगे तुम जा नहीं सकते. उस बिंदु पर पहुंचने के बाद हम यही कर सकते हैं कि उस स्थिति को चुपचाप स्वीकार कर लें. इसी तरह हम बचे रहते हैं.

In everybody’s life there’s a point of no return. And in a very few cases, a point where you can’t go forward anymore. And when we reach that point, all we can do is quietly accept the fact. That’s how we survive.

यह मुमकिन है कि एक साथ सोनेवाले दो लोग आंखें बंद करते ही अकेले हो जाएं.

Two people can sleep in the same bed and still be alone when they close their eyes.

वह सबसे बड़ी बात जो हमने स्कूल में सीखी वो यह है कि सबसे बड़ी बातें स्कूल में नहीं सीखी जा सकतीं हैं.

The most important thing we learn at school is the fact that the most important things can’t be learned at school.

समय बीतते-बीतते तुम समझ जाते हो कि जो बच रहता है वो बच रहता है, जो छूट जाता है वो छूट जाता है. समय बहुत से मसले हल कर देता है, और जिसे समय हल नहीं कर पाता उन्हें तुम्हें खुद हल करना पड़ता है.

As time goes on, you’ll understand. What lasts, lasts; what doesn’t, doesn’t. Time solves most things. And what time can’t solve, you have to solve yourself.

अपना पैसा उन चीजों पर खर्च करो जिन्हें तुम खरीद सकते हो. अपना वक्त वह सब करने में लगाओ जिसे पैसे से खरीदा नहीं जा सकता.

Spend your money on the things money can buy. Spend your time on the things money can’t buy.

कोई भी सत्य हमें अपने किसी प्रिय को खो देने के दुःख से मुक्त नहीं कर सकता. न सच, न ईमानदारी, न ताकत, और न ही करुणा उस दुःख का उपचार कर सकती है. हम सिर्फ यही कर सकते हैं कि हम इसे अंत तक देखते रहें और इससे कुछ सीखें- लेकिन जो भी हम सीखेंगे वह हमें चेतावनी दिए बिना आनेवाले अगले दुःख का सामना करने में मददगार नहीं होगा.

No truth can cure the sorrow we feel from losing a loved one. No truth, no sincerity, no strength, no kindness can cure that sorrow. All we can do is see it through to the end and learn something from it, but what we learn will be no help in facing the next sorrow that comes to us without warning.

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जहाँ ज़िंदगी है, वहां उम्मीद है


मार्कस तूलियस सिसेरो (जन्म – 106 ईसा पूर्व और मृत्यु 43 ईसा पूर्व) रोमन राजनीतिज्ञ, विधिवेत्ता, और वक्ता था. उसके कई कथन दो हज़ार साल बाद भी उद्घृत किये जाते हैं:

1. जहाँ ज़िंदगी है, वहां उम्मीद है.

2. क्या ज़माना आ गया है… बच्चे अब मां-बाप का कहना नहीं मानते और हर ऐरा-गैरा लेखक बन जाता है. (दो हज़ार साल पहले भी ऐसा होता था!)

3. अगर तुम्हारे पास एक उद्यान और पुस्तकालय है तो तुम्हें किसी और चीज़ की ज़रुरत नहीं है.

4. मनुष्य हजारों वर्षों से ये छः गलतियाँ करता आ रहा है – पहली: यह मानना कि दूसरों को कुचलकर ही आगे बढ़ा जा सकता है. दूसरी: उन चीज़ों की चिंता करना जिन्हें कोई भी न तो बदल सकता है और न ही सुधार सकता है. तीसरी: यह समझना कि जो काम हमारे बस में नहीं है वह नामुमकिन है. चौथी: तुच्छ प्राथमिकताओं को दरकिनार नहीं करना. पांचवीं: मन के परिमार्जन और परिवर्धन को महत्व न देना. छठवीं: दूसरों पर हमारे विचार और जीवनशैली को थोपना.

5. हमें ज़िंदगी कम ही मिलती है पर बेहतर तरीके से बिताई गयी ज़िंदगी की स्मृति शाश्वत है.

6. दर्शन का अध्ययन और कुछ नहीं बल्कि स्वयं को मृत्यु के लिए तैयार करना है.

7. जो बात नैतिक मानदंडों पर खरी न उतरे उससे किसी का हित नहीं सधता भले ही उससे तुम्हें कुछ लाभ हो जाए. यह सोचना ही दुखदाई है कि किसी अपकृत्य से भी कुछ लाभ उठाया जा सकता है.

8. मुसीबत के वक्त अपने बाल नोचना बेवकूफी है. गंजे हो जाने पर दुःख-तकलीफें कम नहीं हो जातीं.

9. सिर्फ विक्षिप्त जन ही नाचते समय गंभीर रह सकते हैं.

10. जन-कल्याण का ध्येय ही सर्वोत्तम विधि है.

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मनुष्यता से दिव्यता की ओर


तुम्हारी आत्मा, चेतना, और जीवन दिव्यता का अंश है. यह ईश्वर का ही विस्तार है. तुम स्वयं को ईश्वर तो नहीं कह सकते पर ईश्वर से एकात्म्य तुम्हारा जन्मसिद्द अधिकार है. पानी की एक बूँद सागर नहीं हो सकती लेकिन यह सागर से ही निकली है और इसमें सागर के सारे गुण हैं. ~ एकहार्ट टोल

Eckhart Tolle

“कोई भी तुम्हें यह नहीं बता सकता कि तुम कौन हो, क्या हो. वह जो कुछ भी कहेगा वह एक नयी अवधारणा होगी, इसलिए वह तुम्हें बदल न सकेगी. तुम जो भी हो इसका संबंध किसी मान्यता से नहीं है. वास्तव में, हर मान्यता, हर विश्वास एक अवरोध ही है. तुम्हें इसके लिए बोधिसंपन्न होने की आवश्यकता भी नहीं है क्योंकि तुम उसके साथ ही जन्मे हो. लेकिन जब तक तुम्हें इस तथ्य का ज्ञान नहीं होता तब तक तुम इस जगत में अपनी आभा नहीं बिखेर सकते. तुम्हारा बोध, तुम्हारी जागृति वही कहीं छुपी रहती है जो तुम्हारा वास्तविक आश्रय है. यह ऐसा ही है जैसे कोई दरिद्र व्यक्ति सड़कों पर ठोकर खाने के लिए बाध्य हो और उसे इस बात का पता ही न हो कि उसके नाम कहीं एक खाता भी खुला है जिसमें लाखों करोड़ों रुपये उसकी राह देख रहे हैं.”

“जीवन के प्रति किसी भी प्रतिरोध का न होना ही ईश्वरीय कृपा, आत्मिक शांति और सहजता की दशा है. जब यह दशा उपलब्ध हो तो आसपास बिखरे हुए संसार के शुभ-अशुभ का द्वंद्व मायने नहीं रखता. यह विरोधाभास प्रतीत होता है पर जब नाम-रूप आदि पर हमारी आतंरिक निर्भरता समाप्त हो जाती है तब जीवन की बाहरी-भीतरी स्वाभाविक अवस्था अपने शुद्ध रूप में प्रकट होती है. जिन वस्तुओं, व्यक्तियों, और परिस्थितियों को हम अपनी प्रसन्नता के लिए अनिवार्य मानते हैं वे हमारी ओर निष्प्रयास ही आने लगती हैं और हम उनका आनंद मुक्त रूप से उठा सकते हैं… और जब तक वे टिके रहें तब तक के लिए उनके महत्व को आंक सकते हैं. सृष्टि के नियमों के अंतर्गत वे सभी वस्तुएं और व्यक्ति कभी-न-कभी हमारा साथ छोड़ ही देंगीं, आने-जाने का चक्र चलता रहेगा, लेकिन उनपर निर्भरता की शर्त टूट जाने पर उनके खोने का भय नहीं सताएगा. जीवन की सरिता स्वाभाविक गति से बहती रहेगी.”

एकहार्ट टोल जर्मन मूल के कनाडावासी आध्यात्मिक गुरु और बेस्ट सेलिंग लेखक हैं. इनकी दो पुस्तकों यथा The Power of Now और The New Earth की लाखों प्रतियाँ बिक चुकी हैं.

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सत्य वचन – एपिक्टेटस (1)


एपिक्टेटस (जन्म वर्ष 55 – मृत्यु  वर्ष 135) यूनानी महात्मा और स्टोइक दार्शनिक थे. उनका जन्म वर्तमान तुर्की में एक दास परिवार में हुआ था. उनके शिष्य आरियन ने उनकी शिक्षाओं को संकलित किया जिन्हें ‘उपदेश’ कहा जाता है. एपिक्टेटस ने बताया कि दर्शन केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका है. नियति ही सब कुछ निर्धारित और नियंत्रित करती है अतः मनुष्य उसे भोगने को विवश है पर हम उसे निरपेक्ष और शांत रहकर स्वीकार कर सकते हैं. अपने कर्मों के लिए हम ही उत्तरदायी हैं एवं कठोर आत्मानुशासन द्वारा हम उन्हें सुधार सकते हैं. जो कुछ भी हमारी सीमा में है उसे नज़रंदाज़ करने पर या अपनी सीमा के परे स्थित चीज़ों को नियंत्रित करने का प्रयास करने पर दुःख उत्पन्न होता है. संपूर्ण विश्व एक नगर की भांति है और हम सभी उसके रहवासी हैं, इसलिए यह हमारा कर्तव्य है कि हम एक दूसरे का हितचिंतन करें. एपिक्टेटस की शिक्षाओं को अंगीकार करनेवाला व्यक्ति सुख-शांति पाता है.

एपिक्टेटस की सूक्तियों का अनुवाद करना सरल नहीं है इसलिए यहाँ यथासंभव सरल भाषा का प्रयोग किया गया है. यह उनकी सूक्तियों के संकलन की पहली कड़ी है.

1. प्रसन्नता का एक ही मार्ग है, और वह यह है कि हम उन विषयों की चिंता न करें जो हमारे संकल्प और शक्तियों के परे हैं.

2. संपन्नता अधिकाधिक अर्जन में नहीं बल्कि अल्प आवश्यकताओं में निहित है.

3. यदि तुम स्वयं में सुधार लाना चाहते हो तो दूसरों की दृष्टि में मूढ़ ही बने रहने से परहेज़ न करो.

4. अपने दर्शन की व्याख्या नहीं करो, उसे जियो.

5. उन व्यक्तियों के साथ संयुक्त रहो जो तुम्हें ऊपर उठाते हों एवं जिनकी उपस्थिति में तुम अपना सर्वोत्कृष्ट दे सको.

6. यदि कोई तुम्हें बताये कि अमुक व्यक्ति तुम्हारे बारे में बुरा कह रहा है तो उसका प्रतिवाद मत करो, बल्कि उससे कहो, “हाँ, वह मेरे अन्य दोष नहीं जानता अन्यथा उसने उनका भी उल्लेख किया होता”.

7. दूसरों की धारणाएं एवं समस्याएं संक्रामक हो सकती हैं. उन्हें अनजाने में ही अपनाकर स्वयं की हानि मत करो.

8. जो व्यक्ति स्वयं पर हँस सकता हो उसे हँसने के लिए विषयों की कमी कभी नहीं होती.

9. अपनी दुर्दशा के लिए दूसरों को उत्तरदायी ठहराने से यह पता चलता है कि व्यक्ति में सुधार की आवश्यकता है. स्वयं को दोषी ठहराने से यह पता चलता है कि सुधार आरंभ हो गया है. और किसी को भी दोषी नहीं ठहराने का अर्थ यह है कि सुधार पूर्ण हो चुका है.

10. कुछ भी कहने से पहले तुम उसका अर्थ समझ लो, फिर कहो.

11. परिस्थितियां मनुष्य का निर्माण नहीं करतीं. वे तो उसे स्वयं से परिचित कराती हैं.

12. मनुष्य वास्तविक समस्याओं के कारण नहीं बल्कि उनके बारे में अपने दिमागी फितूर के कारण चिंतित रहता है.

13. संकट जितना गहन होता है, उसे विजित करने पर प्राप्त होनेवाला गौरव उतना ही विशाल होता है. तूफानों और झंझावातों का सामना करने से ही नाविकों का कौशल प्रकट होता है.

14. तुम्हारे भीतर क्रोध उत्पन्न करनेवाला व्यक्ति तुमपर विजय प्राप्त कर लेता है.

15. यदि कोई तुम्हें बुरा कहे, और वह बात सत्य हो, तो स्वयं में सुधार लाओ. यदि वह झूठ हो तो उसे हंसी में उड़ा दो.

16. बाहरी वस्तुओं में श्रेष्ठता मत खोजो, वह तुम्हारे भीतर होनी चाहिए.

17. ईश्वर या तो बुराई को मिटा सकता है या नहीं मिटा सकता… या वह मिटा सकता है, पर मिटाना नहीं चाहता.

18. वह मनुष्य स्वतंत्र नहीं है जो स्वयं का स्वामी नहीं है.

19. एक दिन मैं मर जाऊँगा. तो क्या मैं विलाप करते हुए मरूं? मुझे कभी बेड़ियों में जकड़ दिया जाए तो क्या मैं उसका भी शोक मनाऊँ? यदि मुझे कभी देशनिकाला भी मिल जाए तो क्या मैं अपनी मुस्कुराहटों, प्रसन्नता, और संतुष्टि से भी वंचित कर दिया जाऊं?

20. तुम नन्ही आत्मा हो जो एक शव का बोझा ढो रही है.

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