Category Archives: Paulo Coelho

Narcissus – नरगिस की कहानी

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अल्केमिस्ट ने वह किताब पढ़ने के लिए उठाई जिसे कारवां में कोई अपने साथ लाया था. पन्ने पलटने पर उसे किताब में नारसिसस की कहानी दिखी.

अलकेमिस्ट को नारसिसस की कहानी के बारे में पता था. नारसिसस एक युवक था जिसने किसी झील के किनारे बैठकर पानी में अपना अक्स देखा. अपने अप्रतिम रूप को देखकर वह खुद पर इतना मोहित हो गया कि सुध-बुध खो बैठा और झील में गिरकर डूब गया (एक दूसरी कहानी यह कहती है कि वह खुद को देखकर सब कुछ भूल गया और वहीं बैठे-बैठे उसने भूख-प्यास से दम तोड़ दिया).

कहते हैं कि जिस जगह वो गिरा था वहां एक सुंदर फूल उगा, जिसे हम नरगिस के नाम से जानते हैं.

लेकिन उस किताब में नारसिसस की इस कहानी के अलावा और कुछ भी बयां किया गया था. उसमें लिखा था कि नारसिसस की मौत के बाद उस वन की देवियां उस झील तक आईं, और उन्होंने देखा कि झील का मीठा पानी खारा हो चुका था.

“तुम क्यों रो रही हो?”, वनदेवियों ने झील से पूछा.

“ये आंसू नारसिसस के लिए हैं”, झील ने कहा.

“हम जानते हैं कि नारसिसस के गुज़र जाने का तुम्हें सबसे ज्यादा दुख है” उन्होंने कहा, “क्योंकि हमने उसे हमेशा दूर से ही देखा जबकि तुमने उसकी सुंदरता को करीब से जी भर के निहारा”.

“लेकिन… क्या वो बहुत सुंदर था?”, झील ने पूछा.

“तुमसे बेहतर इस बात को कौन जान सकता है?”, वनदेवियों ने अचरज से कहा, “तुम्हारे किनारे पर बैठकर ही तो वह पानी में अपनी छवि को निहारता रहता था!”

यह सुनकर झील कुछ पल को चुप रही, फिर वह बोली:

“मैं नारसिसस के लिए रोती रही लेकिन मुझे यह पता न था कि वह सुंदर था. मेरे रोने की वज़ह कुछ और थी. जब वह मेरे किनारों पर बैठकर मुझे देखता था तो मुझे उसकी आंखों में अपनी खूबसूरती नज़र आती थी.”

“कितनी सुंदर है यह कहानी”, अल्केमिस्ट ने खुद से कहा.


The Alchemist picked up a book that someone in the caravan had brought. Leafing through the pages, he found a story about Narcissus.
The Alchemist knew the legend of Narcissus, a youth who daily knelt beside a lake to contemplate his own beauty. He was so fascinated by himself that, one morning, he fell into the lake and drowned.
At the spot where he fell, a flower was born, which was called the narcissus.
But this was not how the author of the book ended the story. He said that when Narcissus died, the Goddesses of the Forest appeared and found the lake, which had been fresh water, transformed into a lake of salty tears.
“Why do you weep?” the Goddesses asked.
“I weep for Narcissus,” the lake replied.
“Ah, it is no surprise that you weep for Narcissus,” they said, “for though we always pursued him in the forest, you alone could contemplate his beauty close at hand.”
“But….. was Narcissus beautiful?” the lake asked.
“Who better than you to know that?” the Goddesses said in wonder, “After all, it was by your banks that he knelt each day to contemplate himself!”
The lake was silent for some time. Finally it said:
“I weep for Narcissus, but I never noticed that Narcissus was beautiful. I weep because, each time he knelt beside my banks, I could see, in the depths of his eyes, my own beauty reflected.”
“What a lovely story,” the Alchemist thought.
(From the blog of Paulo Coelho)

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पेंचकस – Screwdriver

इस घटना का ज़िक्र पाउलो कोएलो ने अपने ब्लॉग में किया है:

अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले मेरे श्वसुर ने अपने पूरे परिवार को बुलाया.

वे बोले, “मैं यह मानता हूँ कि मृत्यु हमारे लिए दूसरी दुनिया में प्रवेश करने का मार्ग है. मेरे चले जाने के बाद मैं तुम्हें एक संकेत भेजूंगा कि दूसरों के भले के लिए काम करते रहना ही जीवन का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है”.

उनकी इच्छा के अनुसार उनका दाह-संस्कार किया गया और उनकी अस्थियों को अर्पोआदार के समुद्रतट पर बिखेर दिया गया. पार्श्व में उनका पसंदीदा संगीत टेप-रिकॉर्डर पर बजता रहा.

अपने परिवार को संबोधित करने के दो दिन के बाद वे चल बसे. एक मित्र ने साओ पाउलो में उनकी अंतिम क्रिया की व्यवस्था की. रियो में वापसी पर हम अस्थिपात्र, संगीत के कैसेट, और टेप-रिकॉर्डर लेकर सीधे समुद्रतट पर गए. वहां पहुँचने पर एक मुश्किल खड़ी हो गयी. अस्थिपात्र के ढक्कन को कई पेंच लगाकर मजबूती से बंद किया हुआ था. हम उसे खोल नहीं पा रहे थे.

वहां मदद के लिए कोई नहीं था. पास मौजूद एक भिखारी हमारी उलझन देखकर हमारे पास आया और उसने पूछा, “कोई परेशानी है क्या?”

मेरे श्याले ने कहा, “मेरे पिता की अस्थियाँ इसमें बंद हैं और हमारे पास इसे खोलने के लिए पेंचकस नहीं है”.

“आपके पिता यकीनन बहुत अच्छे आदमी रहे होंगे, क्योंकि मेरे पास यह है”, उसने अपने झोले में हाथ डाला और एक पेंचकस निकालकर दिया.

(~_~)

From the blog of Paulo Coelho

Shortly before he died, my father-in-law summoned his family.

‘I know that death is only a passageway into the next world. When I have gone through it, I will send you a sign that it really is worthwhile helping others in this life.’ He wanted to be cremated and for his ashes to be scattered over Arpoador Beach while a tape recorder played his favourite music.

He died two days later. A friend arranged the cremation in São Paulo and – once back in Rio – we went straight to the beach armed with a tape recorder, tapes and the package containing the cremation urn. When we reached the sea, we got a surprise. The lid of the urn was firmly screwed down. We couldn’t open it.

 The only person around was a beggar, and he came over to us and asked: ‘What’s the problem?’

 My brother-in-law said: ‘We need a screwdriver so that we can get at my father’s ashes inside this urn.’

 ‘Well, he must have been a very good man, because I’ve just found this,’ said the beggar.

 And he held out a screwdriver.

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दोस्ती की आग – The Fire of Friendship

अली नामक एक नौकर को रुपयों की सख्त ज़रूरत थी. उसने अपने मालिक से मदद मांगी. मालिक ने उसके सामने एक शर्त रखीः यदि अली पहाड़ की चोटी पर पूरी एक रात बिता देगा तो मालिक उसे बड़ा ईनाम देगा, अन्यथा उसे पूरी उम्र मुफ्त में काम करना पड़ेगा.

मालिक की दुकान से बाहर निकलते वक्त अली ने बर्फीली हवाओं के थपेड़ों को महसूस किया. वह घबरा गया और अपने दोस्त ऐदी से पूछने के लिए गया कि उसे मालिक की शर्त माननी चाहिए या नहीं.

ऐदी ने कुछ सोचकर कहाः

“तुम परेशान मत हो. मैं तुम्हारी मदद करूंगा. कल रात पहाड़ की चोटी पर बैठकर तुम अपनी आंखों की सीध में देखना.”

“मैं तुम्हारे ठीक सामने वाले पहाड़ की चोटी पर पूरी रात तुम्हारे लिए आग जलाकर बैठूंगा.”

“आग को देखते हुए तुम हमारी दोस्ती के बारे में सोचना और तुम्हें इसकी गर्माहट मिलेगी.”

“इस तरह तुम वहां पूरी रात बिता पाओगे. अगले दिन मैं तुमसे इसके बदले में कुछ मांगूंगा.”

अली ने ऐसा ही किया और वह बाजी जीत गया. ईनाम मिलने के बाद वह ऐदी के घर गया और बोलाः

“तुमने कहा था कि तुम्हें बदले में कुछ चाहिए था…”

“हां”, ऐदी ने कहा, “लेकिन मुझे रूपये नहीं चाहिए. वादा करो कि मेरी ज़िंदगी में भी कभी कोई सर्द बर्फीली रात आएगी तो तुम मेरे लिए भी दोस्ती की आग भड़काओगे.”

(पाउलो कोएलो की किताब ‘अलेफ़’ से)

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* * * * * * * * * * * * * * *

A man called Ali is in need of money and asks his boss to help him out. His boss sets him a challenge: if he can spend all night on the top of a mountain, he will receive a great reward; if he fails, he will have to work for free. The story continues:

When he left the shop, Ali noticed that an icy wind was blowing. He felt afraid and decided to ask his best friend, Aydi, if he thought he was mad to accept the wager.

After considering the matter for a moment, Aydi answered:

‘Don’t worry, I’ll help you. Tomorrow night, when you’re sitting on top of the mountain, look straight ahead.

‘I’ll be on the top of the mountain opposite, where I’ll keep a fire burning all night for you.

‘Look at the fire and think of our friendship; and that will keep you warm.

‘You’ll make it through the night, and afterwards, I’ll ask you for something in return.’

Ali won the wager, got the money, and went to his friend’s house.

‘You said you wanted some sort of payment in return.’

Aydi said, ‘Yes, but it isn’t money. Promise that if ever a cold wind blows through my life, you will light the fire of friendship for me.’

(From ‘Aleph’, a book by Paulo Coelho)

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सत्य का मार्ग – The True Path

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गुरु गेहूं के एक खेत के समीप खड़े थे, तब उनका शिष्य एक समस्या लेकर उपस्थित हुआ और बोलाः

“सत्य की प्राप्ति की ओर ले जानेवाला मार्ग कौन सा है? मैं उसकी खोज कैसे करूं?”

गुरू ने उससे पूछा, “तुम अपने दाएं हाथ में कौन सी अंगूठी पहने हो?”

“यह मेरे पिता की निशानी है जो उन्होंने निधन से पहले मुझे सौंपी थी”, शिष्य ने कहा.

“इसे मुझे देना”, गुरू ने कहा.

शिष्य ने अपनी उंगली से अंगूठी निकालकर विनयपूर्वक गुरु के हाथ में दे दी. गुरु ने अंगूठी को खेत के बीच में गेंहू की बालियों की ओर उछाल दिया.

“यह आपने क्या किया?!”, शिष्य अचरज मिश्रित भय से चिल्लाया, “अब मुझे सब कुछ छोड़कर अंगूठी की खोज में जुटना पड़ेगा! वह मेरे लिए बहुमूल्य है!”

“वह तो तुम्हें मिल ही जाएगी, लेकिन उसे पा लेने पर तुम्हें तुम्हारे प्रश्न का उत्तर भी मिल जाएगा. सत्य का पथ भी ऐसा ही होता है… वह अन्य सभी पथों से अधिक मूल्यवान और महत्वपूर्ण है”.

* * * * * * * *

The master was strolling through a field of wheat when a disciple came up to him: “I can’t tell which is the true path. What’s the secret? What does that ring on your right hand mean?” asked the master.

“My father gave it to me before dying.”

“Well, give it to me.”

The disciple obeyed, and the master tossed the ring into the middle of the field of wheat.

“Now what?” shouted the disciple.

“Now I have to stop doing everything I was doing to look for the ring! It’s important to me!”

“When you find it, remember this: you yourself answered the question you asked me. That is how you tell the true path: it is more important than all the rest.”

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बेल्ट – Belt

82 वर्षीय वांग त्सिंग अर्जेंटीना में रहते हैं और इस उम्र में भी युवाओं को चीनी मार्शल आर्ट “ताई ची” सिखाते हैं. ताई ची एक प्राचीन मार्शल आर्ट है, जिसमें अनेक शारीरिक क्रियाएं करते समय सांस पर नियंत्रण रखा जाता है.

वांग त्सिंग के एक शिष्य ने एक बार उनसे यह पूछा, “अन्य मार्शल आर्ट पद्धतियों की भांति ताई ची में योद्धा का स्तर प्रदर्शित करने के लिए रंगीन बेल्टों का प्रयोग क्यों नहीं किया जाता.”

3995134601_41d46cf63cवांग ने उत्तर दिया, “यदि तुम्हारे पास धन हो तो तुम उसे हाथ में लेकर नहीं घूमते हो बल्कि उसे अपनी जेब में रखते हो. यदि तुम्हारे पास बहुत अधिक धन हो तो तुम उसे अपनी जेब में ठूंसकर नहीं रखते बल्कि तिजोरी या बैंक में रख देते हो.”

“सभी को प्रत्यक्ष दिखनेवाली बड़ी सी बेल्ट पहनकर घूमने में क्या तुक है? यह सबको बता देती है कि तुम्हारे कौशल की सीमा क्या है. प्रवीण योद्धा यह भलीभांति जानता है कि रणनीति अधिक महत्वपूर्ण है, प्रदर्शन नहीं.”

* * * * *

Wang Tsing, who is a professor of Tai Chi Chuan, now lives in Argentina, after having spent almost a decade in São Paulo. At the age of 82, he still teaches his pupils that inner harmony is fundamental for outer happiness.

One of his disciples told me that once he wanted to know from Wang Tsing why Tai Chi does not use the system of colored belts that other martial arts use (to indicate the grade of apprenticeship).

“If you have money, you don’t carry it in your hands, you carry it in your pockets,” answered Wang. “If you have lots of money, you don’t stuff your pockets with it, you keep it in the bank.”

“What is the sense of walking around wearing a big belt that everyone can see, revealing all that you know?” “A good warrior knows that strategy is far more important than vanity.”

पाइलो कोएलो के ब्लॉग से – From the blog of Paulo Coelho

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