Category Archives: Mulla Nasruddin

इशारे

एक सूफी रहस्यवादी ने मुल्ला नसरुद्दीन और उसके एक शागिर्द का रास्ता रोक लिया. यह जांचने के लिए कि मुल्ला के भीतर आत्मिक जागृति हो चुकी है या नहीं, सूफी ने अपनी उंगली उठाकर आसमान की ओर इशारा किया.

इस इशारे से सूफी यह प्रदर्शित करना चाहता था कि ‘एक ही सत्य ने सम्पूर्ण जगत को आवृत कर रखा है’.

मुल्ला का शागिर्द आम आदमी था. वह सूफी के इस संकेत को समझ नहीं सका. उसने सोचा – “यह आदमी पागल है. मुल्ला को होशियार रहना चाहिए”.

सूफी का यह इशारा देखकर मुल्ला ने अपने झोले से रस्सी का एक गुच्छा निकाला और शागिर्द को दे दिया.

शागिर्द ने सोचा – “मुल्ला वाकई समझदार है. अगर पागल सूफी हमपर हमला करेगा तो हम उसे इस रस्सी से बाँध देंगे”.

सूफी ने जब मुल्ला को रस्सी निकालते देखा तो वह समझ गया कि मुल्ला कहना चाहता है कि ‘मनुष्य की क्षुद्र बुद्धि सत्य को बाँध कर रखने का प्रयास करती है जो आकाश पर रस्सी लगाकर चढ़ने के समान ही व्यर्थ और असंभव है’.

 

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मुल्ला नसरुद्दीन के गुरु की मज़ार

मुल्ला नसरुद्दीन इबादत की नई विधियों की तलाश में निकला. अपने गधे पर जीन कसकर वह भारत, चीन, मंगोलिया गया और बहुत से ज्ञानियों और गुरुओं से मिला पर उसे कुछ भी नहीं जंचा.

उसे किसी ने नेपाल में रहनेवाले एक संत के बारे में बताया. वह नेपाल की ओर चल पड़ा. पहाड़ी रास्तों पर नसरुद्दीन का गधा थकान से मर गया. नसरुद्दीन ने उसे वहीं दफ़न कर दिया और उसके दुःख में रोने लगा. कोई व्यक्ति उसके पास आया और उससे बोला – “मुझे लगता है कि आप यहाँ किसी संत की खोज में आये थे. शायद यही उनकी कब्र है और आप उनकी मृत्यु का शोक मना रहे हैं.”

“नहीं, यहाँ तो मैंने अपने गधे को दफ़न किया है जो थकान के कारण मर गया” – मुल्ला ने कहा.

“मैं नहीं मानता. मरे हुए गधे के लिए कोई नहीं रोता. इस स्थान में ज़रूर कोई चमत्कार है जिसे तुम अपने तक ही रखना चाहते हो!”

नसरुद्दीन ने उसे बार-बार समझाने की कोशिश की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. वह आदमी पास ही गाँव तक गया और लोगों को दिवंगत संत की कब्र के बारे में बताया कि वहां लोगों के रोग ठीक हो जाते हैं. देखते-ही-देखते वहां मजमा लग गया.

संत की चमत्कारी कब्र की खबर पूरे नेपाल में फ़ैल गयी और दूर-दूर से लोग वहां आने लगे. एक धनिक को लगा कि वहां आकर उसकी मनोकामना पूर्ण हो गयी है इसलिए उसने वहां एक शानदार मज़ार बनवा दी जहाँ नसरुद्दीन ने अपने ‘गुरु’ को दफ़न किया था.

यह सब होता देखकर नसरुद्दीन ने वहां से चल देने में ही अपनी भलाई समझी. इस सबसे वह एक बात तो बखूबी समझ गया कि जब लोग किसी झूठ पर यकीन करना चाहते हैं तब दुनिया की कोई ताकत उनका भ्रम नहीं तोड़ सकती.

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परंपरा : मुल्ला नसरुद्दीन

कई लोगों की भीड़ में मुल्ला नसरुद्दीन नमाज़ अदा करने के दौरान आगे झुका. उस दिन उसने कुछ ऊंचा कुरता पहना हुआ था. आगे झुकने पर उसका कुरता ऊपर चढ़ गया और उसकी कमर का निचला हिस्सा झलकने लगा.

मुल्ला के पीछे बैठे आदमी को यह देखकर अच्छा नहीं लगा इसलिए उसने मुल्ला के कुरते को थोड़ा नीचे खींच दिया.

मुल्ला ने फ़ौरन अपने आगे बैठे आदमी का कुरता नीचे खींच दिया.

आगेवाले आदमी ने पलटकर मुल्ला से हैरत से पूछा – “ये क्या करते हो मुल्ला?”

“मुझसे नहीं, पीछेवालों से पूछो” – मुल्ला ने कहा – “शुरुआत वहां से हुई है”.

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मुल्ला नसरुद्दीन की दो बीवियाँ

blue pearlमुल्ला नसरुद्दीन की दो बीवियाँ थीं जो अक्सर उससे पूछा करती थीं कि वह उन दोनों में से किसे ज्यादा चाहता है.

मुल्ला हमेशा कहता – “मैं तुम दोनों को एक समान चाहता हूँ” – लेकिन वे इसपर यकीन नहीं करतीं और बराबर उससे पूछती रहतीं – “हम दोनों में से तुम किसे ज्यादा चाहते हो?”

इस सबसे मुल्ला हलाकान हो गया. एक दिन उसने अपनी प्रत्येक बीवी को एकांत में एक-एक नीला मोती दे दिया और उनसे कहा कि वे इस मोती के बारे में दूसरी बीवी को हरगिज़ न बताएं.

और इसके बाद जब कभी उसकी बीवियां मुल्ला से पूछतीं – “हम दोनों में से तुम किसे ज्यादा चाहते हो?” – मुल्ला उनसे कहता – “मैं उसे ज्यादा चाहता हूँ जिसके पास नीला मोती है”.

दोनों बीवियां इस उत्तर को सुनकर मन-ही-मन खुश हो जातीं.

*  *  *  *  *

मुल्ला की दो बीवियां थीं जिनमें से एक कुछ बूढ़ी थी और दूसरी जवान थी.turkish women

“हम दोनों में से तुम किसे ज्यादा चाहते हो?” – एक दिन बूढ़ी बीवी ने मुल्ला से पूछा.

मुल्ला ने चतुराई से कहा – “मैं तुम दोनों को एक समान चाहता हूँ”.

बूढ़ी बीवी इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुई. उसने कहा – “मान लो अगर हम दोनों बीवियाँ नदी में गिर जाएँ तो तुम किसे पहले बचाओगे?”

“अरे!” – मुल्ला बोला – “तुम्हें तो तैरना आता है न?”

(दोनों चित्र यहाँ और यहाँ से लिए गए हैं)

(Funny stories of Mulla Nasruddin / Mulla Nasiruddin – in Hindi)

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मुल्ला नसरुद्दीन की बीवी का नाम

turkishएक दिन मुल्ला नसरुद्दीन और उसका एक दोस्त साथ में टहलते हुए अपनी-अपनी बीवी के बारे में बातचीत कर रहे थे. मुल्ला के दोस्त का ध्यान इस बात की और गया कि मुल्ला ने कभी भी अपनी बीवी का नाम नहीं लिया.

“तुम्हारी बीवी का नाम क्या है, मुल्ला?” – दोस्त ने पूछा.

“मुझे उसका नाम नहीं मालूम” – मुल्ला ने कहा.

“क्या!?” – दोस्त अचम्भे से बोला – “तुम्हारी शादी को कितने साल हो गए?”

“अट्ठाईस साल” – मुल्ला ने जवाब दिया, फिर कहा – “मुझे शुरुआत से ही ये लगता रहा कि हमारी शादी ज्यादा नहीं टिकेगी इसलिए मैंने उसका नाम जानने की कभी ज़हमत नहीं उठाई”.

(चित्र यहाँ से लिया गया है)

(A story/anecdote of Mulla Nasruddin – in Hindi)

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