Category Archives: Folk Tales

रेड इंडियन लोक-कथा : परमेश्वर ने सत्य कहाँ छुपाया

indian chiefएक बार परमेश्वर ने मनुष्य के सिवाय सभी प्राणियों को अपने पास बुलाया और उनसे कहा – “मैं मनुष्यों से कुछ छुपाना चाहता हूँ. मैं परमसत्य को मनुष्यों से छुपाना चाहता हूँ लेकिन समझ नहीं पा रहा कि उसे कहाँ रखूं”!

गरुड़ ने कहा – “वह मुझे दे दो. मैं उसे चाँद में छुपा दूंगा”.

परमेश्वर ने कहा – “नहीं. एक दिन वे वहां पहुंचकर उसे ढूंढ लेंगे”.

सालमन मछली ने कहा – “मैं उसे सागरतल में गाड़ दूँगी”.

“नहीं. एक दिन वे वहां भी पहुँच जायेंगे”.

भैंस ने कहा – “मैं उसे चारागाहों में छुपा दूँगी”.

परमेश्वर ने कहा – “एक दिन वे धरती की खाल को उधेड़ देंगे और उसे खोज लेंगे”.

सभी प्राणियों की दादी छछूंदर धरती माँ की छाती से चिपकी रहती थी. परमेश्वर ने उसे भौतिक नेत्र नहीं बल्कि अलौकिक ज्योति प्रदान की थी. वह बोली – “उसे उन्हीं के भीतर रख दो”.

परमेश्वर ने कहा – “बहुत अच्छा”.

चित्र साभार – फ्लिकर

(A native American / Indian folktale – in Hindi)

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अफ्रीकी लोक-कथा : चींटियाँ भारी बोझा क्यूँ ढोती हैं

droughtअनानसी और उसका बेटा कवेकू – दोनों बहुत चतुर किसान थे. उन दोनों के खेत अलग-अलग थे और हर साल उनमें लहलहाती फसल होती थी. एक साल दुर्भाग्यवश उन्होंने अपने सबसे अच्छे बीज खेत में बोए लेकिन बारिश नहीं होने के कारण उनके खेत में कुछ भी न उगा.

उदास कवेकू अपने सूखे खेत में घूम रहा था और सोच रहा था कि इस साल उसके परिवार को अन्न कहाँ से मिलेगा. उसने खेत की मेड़ पर एक कुबड़े बौने को बैठा देखा. बौने ने कवेकू से उदास होने का कारण पूछा. कवेकू के बताने पर बौने ने कहा कि वह खेत में बारिश लाने में उसकी मदद करेगा. उसने कवेकू से कहा कि वह कहीं से दो छोटी लकडियाँ ले आए और उन्हें उसके कूबड़ पर ढ़ोल की तरह बजाए. कवेकू ने ऐसा ही किया. वे दोनों गाने लगे:

“पानी, पानी ऊपर जाओ;
बारिश बनकर नीचे आओ!”

यह देखकर कवेकू की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा कि गाते-गाते ज़ोरदार बारिश होने लगी और खेत की मिटटी ने पूरे पानी को सोख लिया. अगले ही दिन बीजों से अंकुर फूट पड़े और बढ़िया फसल होने लगी.

अनानसी को जल्द ही कवेकू के खेत में बढ़िया फसल होने की खबर मिल गई. उसका खुद का खेत तो सूखा ही पड़ा था. वह कवेकू के पास गया और उसने कवेकू से बारिश होने का कारण पूछा. कवेकू का मन साफ़ था और उसने कुबड़े बौने वाली बात अपने पिता को बता दी.

अनानसी ने भी उसी तरह से अपने खेत में पानी लाने का निश्चय किया. उसने दो मोटी लकडियाँ ले लीं और सोचा – “मेरे बेटे ने कुबड़े बौने से छोटी लकड़ियों से काम लिया. मैं मोटी लकडियां इस्तेमाल करके उससे दुगनी बारिश करवाऊँगा.”

जब उसने कुबड़े बौने को अपनी ओर आते देखा उसने सावधानी से दोनों लकडियाँ छुपा दीं. पहले की तरह कुबड़े बौने ने अनानसी से उदास होने का कारण पूछा और अनानसी ने उसे अपनी समस्या बता दी. कुबड़े ने उससे कहा – “कहीं से दो छोटी लकडियाँ ले आओ और उन्हें मेरे कूबड़ पर ढोल की तरह बजाओ. मैं बारिश को बुला दूंगा.”

लेकिन अनानसी ने अपनी मोटी लकडियां निकाल लीं और उनसे उसने कुबड़े बौने को इतनी जोर से पीटा कि बेचारा बौना मर गया. अनानसी यह देखकर बहुत डर गया क्योंकि उसे मालूम था कि बौना वहां के राजा का चहेता जोकर था. वह सोचने लगा कि इस घटना का दोष वह किसके मत्थे मढे. उसने बौने का मृत शरीर उठाया और उसे एक कोला के पेड़ के पास ले गया. उसने मृत बौने को पेड़ की ऊपरी शाखा पर बिठा दिया और पेड़ के नीचे बैठकर किसी के आने की प्रतीक्षा करने लगा.

इस बीच कवेकू यह देखने के लिए आया कि उसने पिता को बारिश कराने में सफलता मिली या नहीं. उसने अपने पिता को पेड़ के नीचे अकेले बैठे देखा और उससे पूछा – “पिताजी, क्या आपको कुबड़ा बौना नहीं मिला?”

अनानसी ने कहा – “मिल गया. लेकिन वह पेड़ पर चढ़कर कोला लेने गया है और मैं उसकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ.”

“मैं ऊपर चढ़कर उसे नीचे लिवा लाता हूँ” – कवेकू ने कहा और वह फ़ौरन पेड़ पर चढ़ गया. पेड़ के ऊपर उसने जैसे ही बौने को छुआ, बौना धड़ाम से नीचे गिर गया.”

“अरे, ये तुमने क्या कर दिया!” – कपटी अनानसी चिल्लाया – “तुमने राजा के चहेते जोकर को मार डाला!

“हाँ!” – कवेकू ने कहा. अब तक वह अपने पिता की चाल को समझ चुका था. वह बोला – “राजा उससे बहुत नाराज़ है और उसने कुबड़े बौने को मारने वाले को एक थैली सोना देने की मुनादी की है. मैं अब जाकर अपना ईनाम लूँगा.”

“नहीं! नहीं!” – अनानसी चिल्लाया – “ईनाम मैं लूँगा! मैंने उसे दो मोटी लकड़ियों से पीटकर मारा है. उसे मैं राजा के पास ले जाऊंगा!”

“ठीक है” – कवेकू ने कहा – “अगर आपने उसे मारा है तो आप ही ले जाओ”.

ईनाम मिलने के लालच में अनानसी बौने की लाश को ढोकर ले गया. राजा अपने प्रिय बौने की मृत्यु के बारे में जानकार बड़ा क्रोधित हुआ. उसने बौने की लाश को एक बड़े बक्से में बंद करके यह आदेश दिया कि अनानसी सजा के रूप में उस बक्से को हमेशा अपने सर के ऊपर ढोएगा. राजा ने बक्से पर ऐसा जादू-टोना करवा दिया कि बक्सा कभी भी जमीन पर न उतारा जा सके. अनानसी उस बक्से को किसी और के सर पर रखकर ही उससे मुक्ति पा सकता था और कोई भी ऐसा करने को राज़ी नहीं था.

अनानसी उस बक्से को अपने सर पर ढोकर दुहरा सा हो गया. एक दिन उसे रास्ते में एक चींटी मिली. अनानसी ने चींटी से कहा – “क्या तुम कुछ देर के लिए इस बक्से को अपने सर पर रख लोगी? मुझे बाज़ार जाकर कुछ ज़रूरी सामान खरीदना है”.

चींटी ने अनानसी से कहा – “अनानसी, मैं तुम्हारी सारी चालाकी समझती हूँ. तुम इस बक्से से छुटकारा पाना चाहते हो”.

“नहीं, नहीं. ऐसा नहीं है. मैं सच कह रहा हूँ कि मैं जल्द ही वापस आ जाऊँगा और तुमसे ये बक्सा ले लूँगा!” – अनानसी बोला.

बेचारी भोली-भाली चींटी अनानसी के बहकावे में आ गई. उसने वह बक्सा अपने सर पर रखवा लिया. अनानसी वहां से जाने के बाद फिर कभी वापस नहीं आया. चींटी ज़िन्दगी भर उसकी राह देखती रही और एक दिन मर गई. उसी चींटी की याद में सारी चींटियाँ अपने शरीर से भी बड़े और भारी बोझ ढोती रहती हैं.

(चित्र यहाँ से लिया गया है)

(African folktale – why ants carry heavy loads on their back – in Hindi)

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सर्बिया की लोक-कथा : वृद्धजनों की प्राणरक्षा

प्राचीन काल में प्रथा थी की जब कोई व्यक्ति साठ वर्ष का हो जाता था तो उसे राज्य से बाहर जंगल में भूखों मरने के लिए भेज दिया जाता था ताकि समाज में केवल स्वस्थ और युवा लोग ही जीवित रहें. एक व्यक्ति शीघ्र ही साठ वर्ष का होने वाला था. उसका एक जवान बेटा था जो अपने पिता से बहुत प्रेम करता था. बेटा नहीं चाहता था कि उसके पिता को भी अन्य वृद्धों की भांति जंगल में भेज दिया जाये इसलिए उसने अपने पिता को घर के तहखाने में छुपा दिया और उनकी हर सुविधा का ध्यान रखा.

sunlitलड़के ने एक बार अपने पड़ोसी से इस बात की शर्त लगाईं की सुबह होने पर सूरज की पहली किरण कौन देखेगा. उसने अपने पिता को शर्त लगाने के बारे में बताया. उसके पिता ने उसे सलाह दी – “ध्यान से सुनो. जिस जगह पर तुम सूरज की किरण दिखने के लिए इंतज़ार करो वहां सभी लोग पूरब की तरफ ही देखेंगे लेकिन तुम उसके विपरीत पश्चिम की ओर देखना. पश्चिम दिशा में तुम सुदूर पहाड़ों की चोटियों पर नज़र रखोगे तो तुम शर्त जीत जाओगे.”

लड़के ने वैसा ही किया जैसा उसके पिता ने उसे कहा था और उसने ही सबसे पहले सूरज की किरण देख ली. जब लोगों ने उससे पूछा कि उसे ऐसा करने की सलाह किसने दी तो उसने सबको बता दिया कि उसने अपने पिता को सुरक्षित तहखाने में रखा हुआ था और पिता ने उसे हमेशा उपयोगी सलाह दीं.

यह सुनकर सब लोग इस बात को समझ गए कि बुजुर्ग लोग अधिक परिपक्व और अनुभवी होते हैं और उनका सम्मान करना चाहिए. इसके बाद से राज्य से वृद्ध व्यक्तियों को जंगल में निष्कासित करना बंद कर दिया गया.

(चित्र यहाँ से लिया गया है)

(A folktale of Serbia about saving old people from dying in forests – in Hindi)

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स्विट्जरलैंड की लोक-कथा : सोचसमझ कर इजाज़त दो

glassएक किसान ने दूध से भरा जग अपने पड़ोसी को कुछ देर के लिए सहेजकर रखने के लिए दिया. जब वह अपना जग वापस मांगने के लिए गया तो पड़ोसी ने उससे कहा कि दूध मक्खियाँ पी गईं.

इस बात पर दोनों का झगड़ा हो गया. बात बहुत बढ़ गई तो वे दोनों अदालत गए और वहां पर न्यायाधीश ने यह फैसला सुनाया कि पड़ोसी को दूध का हर्जाना भरना पड़ेगा.

“लेकिन मैंने दूध नहीं पिया, दूध तो मक्खियों ने पी लिया!” – पडोसी बोला.

“तुम्हें मक्खियों को मार देना चाहिए था” – न्यायाधीश ने कहा.

“अच्छा” – पडोसी बोला – “आप मुझे मक्खियों को मारने की इजाज़त देते हैं?”

“मैं इजाज़त देता हूँ” – न्यायाधीश ने कहा – “तुम उन्हें जहाँ भी देखो, उन्हें मार डालो.”

उसी समय एक मक्खी उड़ती हुई आई और न्यायाधीश के गाल पर बैठ गई. पड़ोसी ने यह देखा तो पलक झपकते ही न्यायाधीश के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ जमा दिया. मक्खी मरकर नीचे गिर गई और न्यायाधीश तिलमिला गया.

इससे पहले कि न्यायाधीश कुछ कहता, पड़ोसी चिल्लाकर बोला – “मैंने पहचान लिया! इसी मक्खी ने सारा दूध पी लिया था!”

कुछ क्षणों पहले ही न्यायाधीश ने पड़ोसी को मक्खी मारने के लिए अनुमति दी थी इसलिए अब वह कुछ नहीं कर सकता था.

(चित्र फ्लिकर से लिया गया है)

(Folktale of Switzerland – Hindi)

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संथाल लोक-कथा : कुतिया से शादी

किसी गाँव में एक जवान लड़का रहता था जो ढोरों को चराया करता था. जिस मैदान में वह अपने ढोर चराता था वहां उसने यह देखा कि रोज़ दोपहर में एक तय समय पर एक कुतिया मैदान से गुज़रकर झुरमुटों में पानी के कुंड तक जाती थी. उसे इसपर अचरज हुआ कि वह किसकी कुतिया है और इस तरह रोज़ एक ही समय पर दबे-छुपे कुंड तक क्यों जाती है! उसने यह तय किया कि वह अगले दिन छुपकर इस बात का पता लगायेगा. अगले दिन जब कुतिया मैदान से गुज़री तो उसने दबे पाँव उसका पीछा किया और झाड़ियों में छुपकर उसे देखने लगा. उसकी आँखें यह देखकर फटी रह गईं कि कुंड के पानी में उतरने से पहले कुतिया ने अपनी खाल उतार दी और वह अपूर्व सुंदरी में बदल गई! नहाने के बाद सुंदरी कुंड से बाहर आई और कुतिया की खाल पहन के वापस गाँव की और चल दी. लड़के ने यह देखने के लिए उसका पीछा किया कि वह किस घर में जाती है. उसने उस घर का पता लगा लिया और वापस काम पर लौट गया.

उन्हीं दिनों लड़के के माँ-बाप उसकी शादी का विचार कर रहे थे और उसके लिए एक लड़की ढूंढ रहे थे. लड़के ने अपने माँ-बाप से कहा कि वह शादी करेगा तो एक कुतिया से ही! कुतिया से शादी! घर में तो हंगामा हो गया! आसपड़ोस वालों ने इस बात का भरपूर मज़ा लिया. लेकिन जवान हो चुके लड़के पर कब किसका जोर चला है!? धीरे-धीरे सब लोग यह बोलने लगे कि इस लड़के में एक कुत्ते की आत्मा है और उसके लिए कुतिया ही ठीक रहेगी.

तो लड़के के माँ-बाप ने उससे पूछा कि क्या उसकी नज़र में कोई ख़ास कुतिया शादी के लायक है. लड़के ने उन्हें उस आदमी का नाम बता दिया जिसके घर में वह कुतिया रहती थी. लड़के के माँ-बाप उस आदमी के घर रिश्ते की बात करने के लिए गए. कुतिया के मालिक ने भी इस बात की खूब मौज ली कि कोई उसकी कुतिया से शादी करना चाहता था लेकिन अंततः वह कुतिया के बदले कुछ दहेज़ की रकम तय करके अपनी कुतिया का पाँव लड़के के हाथ में देने के लिए राजी हो गया.

wedding dogमुहूर्त के दिन नाचते-गाते हुए गाँव के लोग शादी के लिए आये. शादी के लिए आकर्षक पंडाल लगाया गया और स्वागत के लिए कुछ कुत्तों को भी द्वार के पास बिठाया गया. दूसरे गावों से भी लोग फोकट का खाने के लिए आ गए. पूरे रीति-रिवाजों से विवाह संपन्न हुआ. कुतिया की विदाई की रस्म भी ठीक तरीके से निपट गई.

कुछ दिनों तक लड़का अपनी नवविवाहिता पर नज़र रखे रहा. एक रात कुतिया दबे पाँव उठी और उसने अपनी खाल उतार दी. वह घर से बाहर जाने लगी. लड़का सोने का नाटक करके उसे देख रहा था. जैसे ही वह कमरे से बाहर जाने लगी लड़का झपटकर उठा और उसने लड़की को पकड़ लिया और खाल उठाकर आग में फेंक दी. सुंदरी अब कुतिया नहीं बन सकती थी. उसने लड़की की पत्नी बनकर रहना मंजूर कर लिया. उसकी सुन्दरता के चर्चे दूर-दूर तक फ़ैल गए और सबने कुतिया से शादी करने के लिए लड़के की दूरदर्शिता की तारीफ की.

लड़के का एक दोस्त था जिसका नाम जीतू था. जब जीतू ने अपने दोस्त की सुन्दर पत्नी अर्थात भूतपूर्व कुतिया को देखा तो उसने भी तय कर लिया कि वह भी एक कुतिया से ही शादी करेगा. इस बार गाँव में किसी को इस बात पर अचरज नहीं हुआ और सब लोग एक बार और बारात में जाने की तैयारी करने लगे. जीतू ने भी अपने लिए एक कुतिया पसंद कर ली और शादी तय हो गई. शादी के दिन जब कुतिया को हल्दी और चन्दन का उबटन लगाया जा रहा था तब वह गुर्राने लगी. मंडप के नीचे जीतू कुतिया की मांग में सिन्दूर भरने लगा तो कुतिया उसका हाथ चबाने के लिए लपकी. खैर, बीच बचाव हो गया. विदाई के समय जीतू की दुल्हन अपना बंधन छुड़ाकर भागने लगी. सबने जीतू से कहा कि अपनी पत्नी को पकड़कर लाओ. जीतू उसके पीछे-पीछे भागकर पस्त हो गया लेकिन वह उसके हाथ नहीं आई. थक-हारकर जीतू अपनी माला नोचता हुआ अपने घर वापस चला गया.

(A Santhal folktale about a the marriage of a man with a female dog – bitch – in Hindi)

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