Origin of Death – मृत्यु की उत्पत्ति

दुनिया नई-नई बनी थी और एक बूढ़ा आदमी अपनी बुढ़िया पत्नी के साथ टहल रहा था. बूढ़े ने बुढ़िया से कहा – “चलो, हम यह तय करते हैं कि यह दुनिया कैसे चले.” “ठीक है” – बुढ़िया ने कहा – “यह कैसे होगा?” “हम्म…” – बूढ़े ने कहा – “चूंकि यह बात मेरे मन में […]

चोर बादशाह

गज़नी के बादशाह का नियम था कि वह रात को भेष बदलकर गज़नी की गलियों में घूमा करता था. एक रात उसे कुछ आदमी छुपते-छुपाते चलते दिखाई दिये. वह भी उनकी तरफ बढ़ा. चोरों ने उसे देखा तो वे ठहर गये और उससे पूछने लगे – “भाई, तुम कौन हो और रात के समय किसलिए […]

अच्छा और बुरा गुलाम

एक बादशाह ने दो गुलाम सस्ते दाम में खरीदे. उसने पहले से बातचीत की तो वह गुलाम बड़ा बुद्धिमान और मीठा बोलने वाला मालूम हुआ. जब होंठ ही मिठास के बने हुए हों तो उनमें से शरबत के सिवाय और क्या निकलेगा? मनुष्य की मनुष्यता उसकी वाणी में भरी हुई ही तो है. बादशाह जब […]

इतना महंगा नाश्ता?

यह मध्य-पूर्व की लोक कथा है. एक बहुत बड़े मुल्क का सुलतान कहीं दूर की यात्रा पर एक गाँव से गुज़रा. रास्ते में वह एक बहुत मामूली चायघर में नाश्ता करने के लिए रुक गया. उसने खाने में आमलेट की फरमाइश की. चायघर के मालिक ने बहुत सलीके से उसे चायघर के मामूली बर्तनों में […]

भिखारी का ईनाम : यहूदी लोक कथा

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एक भिखारी को बाज़ार में चमड़े का एक बटुआ पड़ा मिला. उसने बटुए को खोलकर देखा. बटुए में सोने की सौ अशर्फियाँ थीं. तभी भिखारी ने एक सौदागर को चिल्लाते हुए सुना – “मेरा चमड़े का बटुआ खो गया है! जो कोई उसे खोजकर मुझे सौंप देगा, मैं उसे ईनाम दूंगा!” भिखारी बहुत ईमानदार आदमी […]

सत्य छुपा दो : Hide the Truth

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एक बार परमेश्वर ने मनुष्य के सिवाय सभी प्राणियों को अपने पास बुलाया और उनसे कहा – “मैं मनुष्यों से कुछ छुपाना चाहता हूँ. मैं परमसत्य को मनुष्यों से छुपाना चाहता हूँ लेकिन समझ नहीं पा रहा कि उसे कहाँ रखूं”! गरुड़ ने कहा – “वह मुझे दे दो. मैं उसे चाँद में छुपा दूंगा”. […]

अफ्रीकी लोक-कथा : चींटियाँ भारी बोझा क्यूँ ढोती हैं

अनानसी और उसका बेटा कवेकू – दोनों बहुत चतुर किसान थे. उन दोनों के खेत अलग-अलग थे और हर साल उनमें लहलहाती फसल होती थी. एक साल दुर्भाग्यवश उन्होंने अपने सबसे अच्छे बीज खेत में बोए लेकिन बारिश नहीं होने के कारण उनके खेत में कुछ भी न उगा. उदास कवेकू अपने सूखे खेत में […]

सर्बिया की लोक-कथा : वृद्धजनों की प्राणरक्षा

प्राचीन काल में प्रथा थी की जब कोई व्यक्ति साठ वर्ष का हो जाता था तो उसे राज्य से बाहर जंगल में भूखों मरने के लिए भेज दिया जाता था ताकि समाज में केवल स्वस्थ और युवा लोग ही जीवित रहें. एक व्यक्ति शीघ्र ही साठ वर्ष का होने वाला था. उसका एक जवान बेटा […]

स्विट्जरलैंड की लोक-कथा : सोचसमझ कर इजाज़त दो

एक किसान ने दूध से भरा जग अपने पड़ोसी को कुछ देर के लिए सहेजकर रखने के लिए दिया. जब वह अपना जग वापस मांगने के लिए गया तो पड़ोसी ने उससे कहा कि दूध मक्खियाँ पी गईं. इस बात पर दोनों का झगड़ा हो गया. बात बहुत बढ़ गई तो वे दोनों अदालत गए […]

संथाल लोक-कथा : कुतिया से शादी

किसी गाँव में एक जवान लड़का रहता था जो ढोरों को चराया करता था. जिस मैदान में वह अपने ढोर चराता था वहां उसने यह देखा कि रोज़ दोपहर में एक तय समय पर एक कुतिया मैदान से गुज़रकर झुरमुटों में पानी के कुंड तक जाती थी. उसे इसपर अचरज हुआ कि वह किसकी कुतिया […]