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ब्लॉगिंग से होनेवाले कुछ नायाब फायदे


ब्लौगिंग से फायदे तो होते ही हैं. इससे कुछ मिलता नहीं तो हम सब यहाँ अपना टाइम काहे खोटी करते? यहाँ नयी बातें पता चलती हैं, लिखने-पढ़ने की इच्छा पूरी होती है, टिप्पणियों के ज़रिये सराहना मिलती है, अच्छे पाठक और दोस्त मिलते हैं. बहुत कुछ लिखने और पढ़ने के दौरान हमें अपनी कमियों और खूबियों का पता भी चल जाता है. बहुत से ब्लौगर दीगर के फालतू कामों को करने से बचे रहते हैं, यह भी अच्छी बात है. कुछ के लिए ये थैरेपी की तरह है. रोज़मर्रा के तनाव और दुश्वारियों से लड़ते हुए वे उन्हें अपनी पोस्ट में उड़ेल देते हैं. एक बड़ी बिरादरी इसे मौजूदा व्यवस्था का विश्लेषण और इसका विरोध करने का बेहतरीन औज़ार बना चुकी है. ऐसी ही बातों के घालमेल से मैंने ब्लौगिंग से होनेवाले सबसे महत्वपूर्ण फायदों की ये लिस्ट तैयार की है. आप इसे पढ़कर बताएं कि आप इससे कितना इत्तेफाक रखते हैं. कुछ इजाफा कर सकें तो सोने पे सुहागा:

1. दिमागी खुराक पाने का बेहतरीन नुस्खा – मन में कुछ अटका रहे और बोझ में तब्दील हो जाये तो उसे उगल देना चाहिए. ये हमारी भड़ासी भाइयों का आजमाया हुआ नुस्खा है. दिमाग में कुछ चलता रहे और कोई राह नहीं सूझे तो मन बेचैन हो जाता है. फिर यह कभी-कभी हार मानकर हताशा में खुद को डुबो देता है. ऐसे में यदि आप ब्लौगिंग करने लगते हैं तो आप अपने मन के उन विचारों को दूसरों से साझा करने लगते हैं. आपको जब मौका मिलता है आप अपनी भावी पोस्ट की योजना में उस तत्व को शामिल कर लेते हैं और उसे अपनी नोटबुक में या डायरी में या पोस्ट के ड्राफ्ट के रूप में ही सेव कर लेते हैं. अपने जीवन पर आपकी निगाह कुछ पैनी हो जाती है. आपका ध्यान उन बातों की ओर जाने लगता है जिनको आप अपने लेखन में शामिल कर सकें. आप खुद में ही बने रहते तो आपके विचार भीतर ही भीतर गुम हो सकते थे. ब्लौगिंग के ज़रिये वे अब बाहर निकल चुके हैं, अब उन्हें दूसरों को झेलने दीजिये और आप अपनी अगली पोस्ट के लिए निगाह दौड़ाने लगें.

2.  दुनिया को देखने का नजरिया बदल जाता है – जैसा कि मैंने ऊपर बताया, एक सक्रिय ब्लौगर अपनी आँखें खुली रखने लगता है और अपने आसपास चल रही बातों पर पहले से ज्यादा ध्यान देने लगता है. चीज़ों की बारीकियां पकड़ में आती हैं और वर्तमान पर पकड़ मजबूत होती है. दो पोस्ट पहले मैंने खुद में आई जिस तब्दीली की बात की थी वह बहुतों को महसूस हुआ होगा. इंटरनेट पर यूंही कुछ करने की गरज से मैंने कहानियों के अनुवाद का जो काम हाथ में लिया था उसका मेरे ऊपर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा. साथ ही मैंने पहली बार जीवन में अलग-अलग विषयों पर बहुत कुछ पढ़ा. हमारे नज़रिए में आनेवाला छोटा सा बदलाव भी जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकता है ऐसी मेरी मान्यता है. सकारात्मक परिवर्तन जीवन की गुणवता को बढाते हैं.

3. हम अकेले नहीं हैं भाई! – जब आप बेहतर महसूस नहीं करते तो आप खुद को अकेलेपन के हवाले कर देते हैं. जब आदमी अकेला होता है तो वह अवसाद की गिरफ्त में आ जाता है. किसी-किसी को यह भी लगने लगता है कि बाहर की दुनिया में हर कोई उससे बेहतर ज़िंदगी जी रहा है. ऐसी फ़िज़ूल की बातों और कल्पनाओं के फेर में पड़कर बहुतों को यह लगने लगता है कि ‘ये जीना भी कोई जीना है लल्लू!’

लेकिन एक बार जब आप अपने मन की बातें, अपने दुःख, सोच, चिंताएं, और अनुभूतियाँ दूसरों से बांटने लगते हैं तो आयेदिन आपका साबका ऐसे लोगों से होने लगता है जिनके पास आपसे भी ज्यादा संजीदा बातें शेयर करने के लिए हैं. दुनिया में बहुतेरे लोग आपसे भी ज्यादा बड़ी और विकराल मुसीबतों का सामना कर चुके हैं. यह बात आपको हर कभी पता चलने लगती है या आपकी परवाह करनेवाले आपके मित्र आपमें आशा का संचार करने के लिए आपसे सतत संपर्क में रहते हैं. ब्लौगरों के समूह बनते हैं, मित्रता फलती-फूलती है, आपको यह लगता है कि आपकी बात सुनी जाते है और लोग आपकी कद्र करते हैं. इसपर भी यदि आपको अच्छा नहीं लगता तो भैया आप तो कट लो यहाँ से! आपका केस क्लिनिकल है.:)

4.  अच्छे पाठक जिम्मेदारियों का अहसास दिलाते हैं – यदि आपने (गलती से भी) अपने पाठकों से कोई वादा या कोई दावा कर दिया तो अब आपको कोई नहीं बचा सकता! खुद को बचाने के लिए यदि आप पोस्ट को डिलीट भी कर देंगे तो आपके ‘सुधी’ पाठक उसे गूगल काश में से निकाल लेंगे. वैसे आजकल ‘जागरूक’ पाठक पोस्ट छपते ही उसका स्क्रीनशॉट भी ले लेते हैं ताकि आपको भविष्य में आपकी जिम्मेदारियों का अहसास दिलाया जा सके. इसीलिए कहता हूँ कि वही कहें या करें जिसके पर्याप्त आधार हों वरना अपने कहे से मुकरने या फिरने के लिए आपके पास कोई बहाना नहीं बचेगा.

आपके पाठक आपके चीयरलीडर्स और सपोर्टर हैं. हर बेहतर लिखनेवाले को अपने पाठकों की ख्वाहिशों को पूरा करना होता है. अपनी कही बातों से मुकरके या पोस्टें/टिप्पणियां डिलीट करके आप कहाँ जायेंगे? उनसे किये गए वादे निभाइए और शान से लिखिए-पढ़िए. ब्लॉगलेखन कोई अगंभीर बात नहीं है कि आप जो मन में आये वह कह दें. इस माध्यम की सुविधाएँ हैं तो कुछ जिम्मेदारियां भी हैं. कुछ हद तक, ब्लॉग लेखन अमर है और अच्छे-बुरे किसी भी विचार को यहाँ कॉपी-पेस्ट के जरिये फैलने में वक़्त नहीं लगता. मजाकिया हास्य-व्यंग्य भी अनुशासनपूर्ण लेखन की मांग करता है.

5. दूसरों की मदद करने से खुद के मसले भी सुलझते हैं – बहुत अच्छे लेखक (ब्लौगर) देखते ही देखते जनप्रिय, सर्वजन हितैषी बन जाते हैं. अनेक लोग उन्हें रोल मॉडल के रूप में देखने लगते हैं. निजी जीवन में वे कैसे भी हो पर ब्लौगर के रूप में वे कई नवोदित लेखकों के आदर्श बन जाते हैं. ऐसे ब्लौगर और उसके मित्रों के बीच प्रगाढ़ संबंध बन जाते हैं. कुछ अपवादों को छोड़कर जनप्रिय ब्लौगर अपने पाठकों की भरसक सहायता करते हैं और इस प्रक्रिया में वे बहुत कुछ सीखते हैं. यह तो तयशुदा बात है ही कि दूसरों की समस्याएँ और चुनौतियों का सामना करने से हमारा ध्यान अपनी परेशानियों से हटता है. दूसरों की मदद करने की आदत से मन में नए विचार आते हैं, सकारात्मकता जागती है. अपने हर कामकाज में आशावादिता का ओज झलकने लगता है.

अभी हिंदी के अत्यल्प ब्लौगरों ने ब्लौगिंग को अपने जीवनयापन का माध्यम बनाया है. यदि आप ऐसा नहीं भी करना चाहते हों या आप निजी जीवन में दुश्वारियों का सामना कर रहे हों, तनावग्रस्त रहते हों तो ब्लौगिंग ऐसी कम खर्चीली विधा है जो अनेक प्रकार से आपकी गाड़ी को पटरी में लाने में मददगार हो सकती है.

देखा, ब्लौगिंग के कितने सारे परोक्ष लाभ हैं! आप भी अच्छा लिखें और इनका लुत्फ़ लें. सबसे पहले ऐसे लोगों को ब्लॉग शुरू करने के लिए प्रेरित करिए जो अपने खाली समय का सदुपयोग करना चाहते हों. तकनीकी जानकारी के अभाव में अभी बहुत से लोग ब्लॉग बनाने से कतराते हैं. लोगों की मदद करें ताकि वे बेहतर अभिव्यक्ति की वाहक बन सकें.

यदि आप पाठक हैं तो आपके पास अपना ब्लॉग बनाने के पर्याप्त आधार हैं.

और यदि आप ब्लौगर हैं तो इन बातों से कितना सहमत हैं, कृपया बताएं.

(इस पोस्ट की प्रेरणा अंगरेजी की इस पोस्ट से ली गयी है)

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ब्लॉगरों के लिए एक चैकलिस्ट


इस ब्लॉग पर काम करते हुए दो साल से ज्यादा होने जा रहे हैं. इस अवसर पर मैंने सोचा कि पोस्ट लिखकर ‘पब्लिश’ का बटन दबाने से पहले मैं जो तयारी करता हूँ उसके बारे में अपने पाठकों को बताऊँ. मुझे यकीन है कि इससे सभी नए और अधिकांश ब्लौगरों को लाभ होगा.

यह पोस्ट एक चैकलिस्ट की तरह है. इसमें निम्नलिखित सूत्रों का समावेश किया गया है:

1. रोचक और उपयोगी पोस्ट लिखें. कुछ ऐसा लिखें जो पाठकों को प्रभावित करे. यह सबसे ज़रूरी बात है जिसका ध्यान सभी को रखना चाहिए.

2. कुछ ऐसा लिखने का प्रयास करें जैसा अब तक किसी ने भी नहीं लिखा हो. यह मुश्किल है पर इतना भी नहीं.

3. कम लिखें या ज्यादा, जल्दी-जल्दी लिखें या बड़े अंतराल के बाद, उसके लिए पाठकों से माफी नहीं मांगें. उन्हें यह नहीं बताएं कि किसी कारणवश आप अगले दो महीने तक नहीं लिख पायेंगे. कभी दो-तीन महीने तक नहीं लिख पायें तो अगली पोस्ट में क्षमायाचना नहीं करें.

4. अपनी पोस्ट में रोचक इमेज लगाएं. मैं अपनी पोस्टों में कॉपीराईट मुक्त शानदार चित्र लगता हूँ जो मुझे यहाँ से मिलते हैं.

5. अपने शीर्षक की ओर ध्यान दें. शीर्षक आकर्षक हो और उसमें पोस्ट की ध्वनि आती हो.

6. शीर्षक के बाद सबसे पहले पैराग्राफ को ही पढ़ा जाता है. अच्छा पैराग्राफ पोस्ट की भूमिका या प्रस्तावना होता है.

7. पोस्ट अच्छी हो या औसत, वर्तनी की गलतियाँ हर जगह खटकती हैं.  वर्तनी की गलतियों को दूर करने के लिए पोस्ट को पब्लिश करने से पहले एक बार पढ़ लेने में आखिर कितना समय लगता है?

8. वर्तनी की गलतियों की तरह व्याकरण और वाक्य-विन्यास की जांच भी कर लेनी चाहिए.

9. पैराग्राफों में अनेक रंगों के प्रयोग से पोस्ट बचकानी लगने लगती है.

10. पोस्ट में दोहराव और भटकाव नहीं होना चाहिए. कभी-कभी पोस्ट को वाकई निर्मम काट-छांट की ज़रुरत होती है.

11. पोस्ट में जहाँ कहीं ज़रूरी हो वहां किसी शब्द-विशेष या वाक्य को हाईलाईट कर देना चाहिए. यदि पूरी पोस्ट ही आपको खासमखास लग रही हो तो ऐसा न करना ही बेहतर होगा.

12. ज्यादातर लोग काली पृष्ठभूमि पर लिखे ब्लॉग पढना पसंद नहीं करते, इसी तरह लम्बे-लम्बे पैराग्राफ के बीच में खाली जगह नहीं छोड़ना भी अखरता है.

13. यदि आपने उसी विषय पर पहले भी लिखा हो तो उसका लिंक पोस्ट के अंत में दें.

14. यदि किसी और ब्लॉग में उस विषय पर लिखा गया हो तो उसका लिंक देना भी अच्छा रहता है. इससे आपके पाठक को अन्य ब्लॉग पढ़ने को मिलते हैं और अंतर्लिन्किंग करने के अन्य तकनीकी लाभ भी हैं.

15. पोस्ट को सही कैटेगरी में शामिल करें. यह पोस्ट इस ब्लॉग में ब्लॉगिंग कैटेगरी में शामिल है. इस कैटेगरी में आपको इससे सम्बंधित पुरानी पोस्टें पढ़ने को मिलेंगी. इसी प्रकार लेबल या टैग भी ध्यान से चुन लेने चाहिए.

16. यदि आपने किसी अन्य ब्लौगर की पोस्ट को आधार बनाया है या उससे प्रेरणा ली है तो उसका उल्लेख अवश्य करें और संभव हो तो उसकी पोस्ट का लिंक दें.

17. यदि आप कोई तथ्यगत जानकारी दे रहे हों तो उसे भलीभांति जांच लें. इंटरनेट पर भ्रमण करके सुधी पाठक आपके तथ्यों को पल भर में ही झुठला सकते हैं.

18. क्या आपने पोस्ट में पाठकों से कुछ प्रश्न पूछे हैं? क्या आपने उन्हें चर्चा के लिए आमंत्रित किया है?

19. आपने पोस्ट में जो भी लिंक दी हों उन्हें भली-भांति जांच लें. कई बार किसी मामूली गलती की वज़ह से लिंक बेकार हो जाती है.

20. कहीं कुछ छूट तो नहीं गया? छूट गया हो तो अपनी टिपण्णी में उसकी जानकारी दें.

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कैसा विरोध? कैसी आलोचना?


हिंदी ब्लॉग जगत में आयेदिन घमासान मच रहा है. सबकी अपनी-अपनी सोच है और बात को रखने का अपना-अपना अंदाज. देखने में यही आ रहा है कि आलोचना का स्वर बड़ा मुखर है. कोई बात किसी को जमी नहीं कि दन्न से एक पोस्ट ठोंक दी. बहुत से नवोदित ब्लॉगर हैं जो असहमति की दशा में अतिउत्साह में प्रतिकूल पोस्ट कर देते हैं. आलोचना स्वस्थ भी हो सकती है, केवल आलोचना करने के लिए भी हो सकती है, और हंगामा बरपाने के लिए भी. यदि आलोचना स्वस्थ और संतुलित नहीं है तो इससे व्यर्थ का विवाद उत्पन्न होता है, मन में खिन्नता उत्पन्न होती है, और हमारा पूरा ध्यान उस दौरान छप रही अच्छी पोस्टों से हट जाता है. अतएव धैर्य से काम लें और कुछ ऐसा करें जिससे सभी को अच्छा लगे.

अब पढ़ें आज की पोस्ट जो इस दौर पर मौजूं है.

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rosaजर्मनी की महान महिला विचारक रोज़ा लक्ज़मबर्ग के खिलाफ़ किसी ईर्ष्यालू व्यक्ति ने अखबार में कुछ उल्टा-सीधा लिख दिया. रोज़ा ने इसपर कोई प्रतिक्रिया ज़ाहिर नहीं की. उनके शुभचिंतकों ने इसको लेकर रोज़ा से शिकायत की – “इन बातों का खंडन आपको करना ही चाहिए. आपके चुप रहने पर तो लोग आपको संदेह की दृष्टि से देखने लगेंगे.”

इसपर रोज़ा ने उनसे कहा – “मेरे पिता मुझसे बचपन में हमेशा कहा करते थे ‘जब हम दूसरों के दोषों की ओर इशारा करते हैं तो हमारी एक उंगली तो दोषी की ओर होती है लेकिन बाकी की तीन उंगलियां अपनी ही तरफ होती हैं.’ जिसने भी यह समाचार छपवाया है उसने मेरी तुलना में स्वयं को तीन गुना दोषी तो पहले ही स्वीकार कर लिया है, फिर उसका विरोध करने ले क्या लाभ”?

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कुछ कहिए?

(A motivational / inspirational anecdote of Rosa Luxembourg – in Hindi)

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ब्लॉगर या वर्डप्रैस? फ़्री या अपने डोमेन पर?


यह पोस्ट मैंने ब्लॉगर पर अपना जमा-जमाया ज़ेन-कथा ब्लॉग छोड़कर वर्डप्रैस पर आने और फ़्री होस्टिंग सर्विस को छोड़कर अपना डोमेन लेने के विषय पर लिखी है. ब्लॉगर सबसे पुरानी और प्रसिद्ध सेवा है. वर्डप्रैस अपेक्षाकृत नई सेवा है जिसके उपयोगकर्ता तेजी से बढ़ रहे हैं. दोनों सेवाएँ अच्छी हैं और विविधतापूर्ण हैं. वर्डप्रैस कई मामलों में ब्लॉगर से बेहतर है, हांलाकि ब्लॉगर ज्यादा सरल व सुविधाजनक है. मुझ जैसे कम तकनीकी जानकारी रखने वाले को शुरुआत में वर्डप्रैस के कई फ़ीचर समझ में नहीं आए. ब्लॉगर और वर्डप्रैस की सेवाओं का तुलनात्मक अध्ययन इस पोस्ट में बहुत अच्छे से किया गया है जिसका अनुवाद नीचे कर दिया है. इसे पढ़ने के बाद भी यदि आप किसी निष्कर्ष पर न पहुंच पाएँ तो इसमें कोई अचरज नहीं. यह तुलना मार्च 2009 तक की स्थिति के अनुसार हैः-

टेम्पलेट/थीम और कस्टमाइज़ करने की सुविधा – (ब्लॉगर) – टेम्पलेट लेआउट को एडिट कर सकते हैं, स्टाइल, रंग चुन सकते हैं, थर्ड पार्टी टेम्पलेट लगा सकते हैं. (वर्डप्रैस) - थीम को केवल शुल्क द्वारा अपग्रेड करके बदल सकते हैं. कुछ फ़्री थीम्स में हैडर आदि कस्टमाइज़ कर सकते हैं.

विज़िटर स्टैट्स – (ब्लॉगर) – थर्ड पार्टी ट्रैकर स्क्रिप्ट लगा सकते हैं. (वर्डप्रैस) - ऐडमिन डैशबोर्ड में दैनिक, साप्ताहिक, मासिक स्टैट्स देख सकते हैं.

ब्लॉग इंपोर्ट करना – (ब्लॉगर) – केवल ब्लॉगस्पॉट ब्लॉग से. (वर्डप्रैस) - लगभग सभी सेवाओं से.

इमेज स्टोरेज – (ब्लॉगर) – 1 GB. (वर्डप्रैस) - 3 GB, .ppt, .doc, .pdf फ़ाइलें भी अपलोड कर सकते हैं.

इमेज गैलरी – (ब्लॉगर) – पिकासा वेब एल्बम. (वर्डप्रैस) - पोस्ट या पेज पर ‘गैलरी’ का टैग लगाकर.

ई-मेल से पोस्टिंग – (ब्लॉगर) – संभव है. ई-मेल से पोस्टें प्राप्त भी की जा सकती हैं (टीम ब्लॉग के लिए सुविधाजनक). (वर्डप्रैस) – नहीं.

प्राइवेट ब्लॉग – (ब्लॉगर) – चाहें तो केवल गूगल अकाउंट धारकों को ऍक्सेस दे सकते हैं. (वर्डप्रैस) - 35 वर्डप्रैस अकाउंट धारकों को ऍक्सेस दे सकते हैं, अधिक के लिए अपग्रेड करना होगा. किसी भी पोस्ट को पासवर्ड प्रोटेक्ट कर सकते हैं या प्राइवेट बना सकते हैं

कॉन्टैक्ट फ़ार्म – (ब्लॉगर) – थर्ड पार्टी कॉन्टैक्ट फ़ार्म (सी-बॉक्स, कॉन्टैक्टिफ़ाई) लगा सकते हैं. (वर्डप्रैस) - ‘कॉन्टैक्ट-फ़ार्म’ टैग किसी भी पोस्ट या पेज पर लगा सकते हैं.

टीम ब्लॉग सुविधा – (ब्लॉगर) – केवल ऍडमिनिस्ट्रेटर और नॉन-ऍडमिनिस्ट्रेटर. (वर्डप्रैस) - ऍडमिनिस्ट्रेटर, ऍडिटर, ऑथर, और कॉन्ट्रिब्यूटर.

कमेंटिंग – (ब्लॉगर) – वर्ड वेरीफ़िकेशन, मॉडरेशन संभव. कमेंट ऐडिटिंग संभव नहीं. (वर्डप्रैस) - मॉडरेशन व कमेंट ऐडिटिंग संभव.

इनके अलावा दोनों के विजेट्स में भी भिन्नता है. ब्लॉगर के ये विजेट्स वर्डप्रैस में नहीं हैः- फ़ौलोवर्स, स्लाइडशो, लिस्ट, साइडबार में चित्र, ऍडसेंस, ब्लॉगर प्रोफ़ाइल, आदि. वर्डप्रैस के ये विजेट्स ब्लॉगर में नहीं उपलब्ध हैः- पेज, स्टैट्स, मैटा, टैग क्लाउड, ब्लॉग में सर्च, टॉप/रीसेंट पोस्ट/कमैंट, आदि.

इनके अलावा भी ब्लॉगर और वर्डप्रैस में कई भिन्नताएं हैं जो इतनी तकनीकी हैं कि मैं अधिकारपूर्वक उनपर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता.

ब्लॉगर और वर्डप्रैस की सेवा शर्तों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि वर्डप्रैस पर आप अपने ब्लॉग के मालिक हैं जबकि ब्लॉगर पर आपके ब्लॉग का स्वामित्व गूगल के पास होता है. ब्लॉगर पर अपने ब्लॉग में ब्लॉगस्पॉट डोमेन से मुझे कोई समस्या नहीं थी लेकिन यह आपको कहीं-न-कहीं सीमित रखता है. वर्डप्रैस के साथ भी यही बात है. आप चाहें तो वर्डप्रैस को अपने सर्वर पर लोड/होस्ट कर सकते हैं या किसी होस्टिंग सर्विस प्रोवाइडर को मामूली वार्षिक शुल्क देकर अपना डोमेन खरीद सकते हैं. फ़िलहाल ब्लॉगर इसके लिए $10/- और वर्डप्रैस $15/- का शुल्क प्रतिवर्ष लेता है. मेरे ब्लॉग की पोस्टों की पठनीयता सर्वकालिक है, आप उन्हें दस साल बाद भी पढ़ सकते हैं, वे पुरानी नहीं पड़ेंगीं. यही कारण है कि मैं अपने ब्लॉग के लिए एक स्थाई प्लेटफ़ार्म चाहता था. इसलिए मैंने तो काफ़ी सोचविचार करने के बाद अपने डोमेन पर जाने का निर्णय लिया. आप भी यदि अपने ब्लॉग के लिए कभी अपना डोमेन लेना चाहें तो भरपूर सोचविचार करके जानकारों से राय लेकर ही कोई कदम उठाएं क्योंकि एक बार अपना डोमेन लेने के बाद आपको उससे हमेशा के लिए बंध कर रहना पड़ेगा.

किसी नतीजे पर न पहुंच पाने के बाद मैंने वर्डप्रैस को चुन लिया. इसके तीन कारण हैं. पहला – यह ओपन-सोर्स आधारित है, दूसरा – इसमें फ़ीलगुड फ़ैक्टर ब्लॉगर की तुलना में अधिक है, तीसरा – मैं अपनी ब्लॉगिंग को पेशेवर अंदाज़ में करना चाहता हूँ.

आप इस विषय पर क्या सोचते हैं, कृपया बताएं.

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आपकी ब्लॉगिंग को व्यर्थ करनेवाली 9 गलतियाँ


अक्सर ऐसा होता है कि मैं किसी ब्लॉग पर उपयोगी या रोचक जानकारी की तलाश प्रारम्भ करता हूँ पर कुछ ही देर में इतना खीझ जाता हूँ कि चंद मिनटों में ही ब्लॉग को बंद कर देता हूँ।

कई ब्लॉग्स पर अच्छी पोस्टें होती हैं जिनको मैं ढूंढता रहता हूँ। उस ब्लॉग पर पहली बार आनेवाले को यदि कोई अच्छी पोस्ट नहीं खोजने पर नहीं मिलेगी तो वह ब्लॉग पर वापस क्यों आएगा? ब्लॉग की ख्याति तो उसपर बारम्बार आनेवाले पाठक ही बनाते हैं!

जिस ब्लॉग पर आप पिछले कुछ समय से विज़िट करते रहे हों उसके ब्लौगर को आप जानने लगते हैं। उस ब्लॉग की रूपरेखा, यहाँ तक कि ब्लौगर की पोस्ट करने से सम्बंधित आदतों को भी आप जान जाते हो। आपको यह पता होता है कि वह ब्लॉग कितना उपयोगी/रोचक है।

लेकिन नए विजिटरों को ये बातें पता नहीं होतीं। और बहुत से मामलों में first impression is the last impression वाली बात सही साबित हो जाती है। पहली बार में ही यदि विजिटर को कुछ अच्छा लगता है तो उसे आपका प्रिय पाठक बनने में अधिक समय नहीं लगता। वह आपके ब्लॉग पर बार-बार आता है।

इसके विपरीत, यदि विजिटर पहली बार ही आपके ब्लॉग को नापसंद कर बैठे तो वह अगली बार भला वहां क्यों आएगा! यदि कुछ मिनटों के भीतर ही विजिटर को आपके ब्लॉग में उसके लायक कोई चीज़ नहीं मिलेगी तो वह आपके हाथ से शायद हमेशा के लिए चला जाएगा। वास्तव में, आपमें से बहुतों के साथ ऐसा हुआ होगा। यदि आप किसी पाठक को आकर्षित नहीं करते तो आप उसे खो देते हैं। यह बिल्कुल बिजनेस के सिद्धांत जैसा है। जिसे आपकी दुकान में काम का माल नहीं मिलेगा वो दोबारा वहां नहीं आएगा। ये बात मैंने सिर्फ़ मिसाल के लिए कही है, अधिकतर लोगों के लिए ब्लॉग उनके विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम हैं और वे अपने ब्लौगों से भावनात्मक लगाव रखते हैं। :)

हर छूटा हुआ पाठक किसी चूके हुए अवसर के समान है। आपके अपने ब्लॉग को बड़ी मेहनत से प्रमोट किया, उसे सजाया-संवारा, दूसरों के ब्लौगों से सम्बद्ध किया, पूरे ब्लॉग जगत में अपने आगमन की मुनादी की… लेकिन जब पाठक आपके ब्लॉग पर पहली बार आया तो आप उसे अपना नियमित पाठक या सब्स्क्राइबर या फौलोवर नहीं बना सके। :(

आपसे कहाँ चूक हो गई। ब्लॉग को बनाने और चलाने के किन पक्षों को आप गंभीरतापूर्वक अपने लिए उपयोगी नहीं बना पाए!?

आज मैं आपको कई ब्लौगरों द्वारा दुहराई जा रही सबसे सामान्य गलतियों के बारे में बताऊँगा जिनके कारण नए पाठक उन ब्लॉगों से मुंह मोड़ लेते हैं। ये गलतियाँ आपके ब्लॉग को बरबाद कर सकती हैं।

१- कम उपयोगी पोस्टें लगाना – जब भी मैं नए ब्लौगों पर जाता हूँ तब मैं सबसे पहले वहां यह देखता हूँ कि क्या वहां पर मेरी पसंद के विषयों जैसे ब्लॉगिंग, संगीत, फिल्में, साहित्य, जीवन-दर्शन, आदि पर उपयोगी/रोचक जानकारी है या नहीं। हम सभी के पास समय की कमी होती है और हम रोजाना सौ-पचास ब्लॉग नहीं देखते। हमें अपनी पसंद की चीज़ देखना भाता है। ऐसा कम ही होता है कि ब्लौगर इतना अच्छा लेखक हो और आप उसकी पोस्ट पूरी पढ़ लें भले ही वह विषय आपको प्रिय न हो। मेरे कुछ पसंदीदा ब्लौगर ऐसे हैं जो उन विषयों पर लिखते हैं जो मेरी अभिरूचियों से मेल नहीं खाते पर वे बहुत अच्छा लिखते हैं। ज्यादातर समय मैं काम की चीज़ें ढूंढता हूँ और किसी ब्लॉग के पहले पेज पर जाने पर यदि मुझे वहां एक भी काम की चीज़ नहीं मिलती तो मैं फ़ौरन ही वहां से निकल लेता हूँ। मुझे काम की बात पढ़नी है और जल्दी पढ़नी है। ब्लौगरों को चाहिए कि वे अपनी सबसे अच्छी और काम की पोस्टों को हमेशा पहले पेज पर ही कहीं लगा कर रखें ताकि उनके नए पाठकों को उन्हें खोजने में समस्या न हो। यदि आपके ब्लॉग के पहले पेज पर पाँच पोस्टें दिखती हैं जो बाज़ार में आनेवाले किसी नए प्रोडक्ट का रिव्यू हैं या किसी और ब्लॉग पर चल रही खटपट का ज़िक्र तो नया पाठक समझेगा कि आपके ब्लॉग में वैसी ही बातें छपती हैं और वह चला जाएगा।

२ – अनियमित पोस्टिंग करना – यदि आप जान जाते हैं कि ब्लॉग को अपडेट नहीं किया जा रहा है तो आप ब्लॉग से चले जाते हैं। हो सकता है कि उस ब्लॉग में पुरानी उपयोगी जानकारी हो पर ऐसा नया कुछ नहीं छापा जा रहा है कि आप उसे सबस्क्राइब करना या उसपर दोबारा आना पसंद करेंगे। किसी भी अच्छे ब्लॉग में सप्ताह में कम-से-कम दो पोस्टों का आना ज़रूरी है। एक हफ्ता गुज़र जाने पर तो ब्लॉग पर मकडी के जाले लगने लगते हैं। यह ब्लॉग की प्रकृति पर निर्भर करता है कि उसमें एक सप्ताह में कितनी पोस्टें छापी जायें। समसामयिक विषयों पर केंद्रित ब्लौगों पर हफ्ते में चार-पाँच बार पोस्टें की जानी चाहिए। अन्य ब्लौगों पर भी सप्ताह में दो-तीन पोस्टें कर देनी चाहिए।

३ – अनियमित पोस्टिंग की सूचना देना – यह बहुत बुरा विचार है। ज़रा सोचें यदि आपको कोई पोस्ट इससे प्रारम्भ होती मिले – “माफ़ करें, मैं पिछले कुछ समय से नियमित पोस्टें नहीं कर पा रहा हूँ, व्यस्तताएं बहुत बढ़ गई हैं। आगे से मैं नियमित पोस्टें किया करूँगा”। यह लिखना तो ब्लॉग के लिए खतरे की घंटी के समान है। ऐसा लिखने का मौका नहीं आने दीजिये। यदि आप कुछ समय से नियमित पोस्ट न कर पा रहे हों तो कहीं से भी थोड़ा सा समय निकालें और एक धाँसू पोस्ट लिख डालें। अपने किसी टीम मेंबर को भी पोस्ट लिखने के लिए कह सकते हैं। न लिखने के कारणों पर कोई पोस्ट कदापि न लिखें।

४ – अपनी सर्वोत्तम पोस्ट न दिखाना – नए पाठक के लिए कई महीनों पुरानी आर्काइव में खोजबीन करना मुश्किल होता है। नया पाठक आपकी सबसे अच्छी पोस्टों को पहले पेज पर ही देखना चाहता है। ऐसा हो सकता है की आपके ब्लॉग में बहुत सारी अच्छी पोस्टें हों और जिन्हें पहले पेज पर लगा पाना सम्भव न हो पर आप ऐसा साइडबार में उनकी लिंक लगाकर कर सकते हैं। नए पाठकों के लिए ऐसी आठ-दस पोस्टों की लिंक लगा । अपने पाठकों का ख्याल करें और उनके लिए अपनी अच्छी पोस्टें सुलभ करें।

५ – फ्लैशिंग या खिझाऊ विज्ञापन दिखाना – वैसे तो हिन्दी ब्लॉगिंग पर अभी गूगल ऐडसेंस की कृपा ठीक से नहीं हुई है फ़िर भी कभी-कभी किसी ब्लॉग पर मुझे फ्लैश विडियो के या किसी तरह के गतिमान/ध्वनियुक्त विज्ञापन या उससे मिलते जुलते विजेट दीखते हैं। यह ज़रूरी नहीं की वे किसी कंपनी या सर्विस प्रदाता के विज्ञापन ही हों, कभी-कभी ब्लौगर अपना स्वयं का विज्ञापन भी करते दीखते हैं। जब यह सब मुझे घेरने लगता है तो मैं उस जगह से बाहर निकल आता हूँ। इससे खीझ आती है, ऊब होती है। अपने ब्लॉग पर ऐसी कोई चीज़ न लगायें जो आप किन्ही दूसरे ब्लौगों पर न देखना चाहें।

६ – ब्लॉगिंग को अपनी दुकान बनाना – मैं ऐसे बहुत सारे ब्लॉग्स पर गया हूँ जिनकी विषय-वास्तु ने मुझे आकर्षित किया है। वे बहुत अच्छे ब्लॉग्स हैं – सिवाय एक बात को छोड़कर – वे मुझे कुछ-न-कुछ बेचना चाहते हैं। कोई अपनी पोस्ट में अपने उत्पाद या सेवाएं प्रस्तुत करता है, कोई और साइडबार या लिंक्स लगाकर ऐसा करता है। ये चीज़ें या तो उनकी स्वयं की होतीं हैं या उनकी कोई और वेबसाईट की होती हैं। यह बात सही है कि मेरे कुछ ब्लौगर मित्र ऐसे भी हैं जो अपने उत्पादों या सेवाओ की जानकारी अपने ब्लॉग्स पर देते हैं लेकिन वे कुछ खरीदने की सलाह नहीं देते। यह अच्छी बात है। कभी-कभी अपने प्रोडक्ट्स की जानकारी देना किसी को बुरा नहीं लगता लेकिन हर पोस्ट में ऐसा नहीं करना चाहिए।

७ – बहुत लम्बी पोस्टें लगा देना – इस पोस्ट में १० बिन्दु दिए गए हैं लेकिन फ़िर भी यह स्क्रीन पर लम्बी लगती है और इसे पूरा पढने में कुछ समय भी लगता है। यदि इस पोस्ट में २० बिन्दु होते तो मैं यह पोस्ट २ भागों में लगाता। कई लोग हर पोस्ट को पढने से पहले उसे सरसरी निगाह से स्कैन कर लेते हैं। अनुभवी लोग एक झलक में ही पोस्ट की उपयोगिता या रोचकता को भांप जाते हैं। बहुत लम्बी पोस्टों में कहीं बीच में यदि कोई काम की बात लिखी हुई है तो वह पढने से छूट भी सकती है। यह तो आप मानेंगे कि ज्यादातर लोगों के पास समय की कमी है। लोग बहुत लंबा लेख पढने से कतराते हैं। यदि लम्बी पोस्ट रखना ज़रूरी है तो बातों को नंबर या बुलेट लिस्ट लगाकर बिन्दुवार लगाना चाहिए। बहुत ज़रूरी वाक्यांशों को हाईलाईट कर देना चाहिए। पूरे-पूरे वाक्यों को हाईलाईट करना ठीक नहीं लगता। बोल्ड भी कर सकते हैं। इससे पाठक को सुविधा होती है।

८ – ब्लॉग को अस्तव्यस्त रखनाकिसी भी ब्लॉग पर पोस्टों के आसपास, साइडबार में, टाइटल बैनर के नीचे, पेज के सबसे नीचे कभी-कभी इतना कुछ लगा दिया जाता है कि ब्लॉग की पाठ्य सामग्री गौण हो जाती हैज्यादातर लोग ब्लॉग पर कई तरह के विजेट देखने नहीं आते, उन्हें आपकी पोस्ट से मतलब होता हैपोस्ट में भी ज़रूरत से ज्यादा और बड़े चित्रों को लगाने से पाठ छोटा लगने लगता हैमैंने भी जब यह ब्लॉग नया-नया बनाया था तब मैंने इसमें पच्चीसों तरह के ब्लॉग अग्रीगेटरों के कोड, स्लाइड-शो, फोटोग्राफ, अपनी पसंद की चीज़ों की लिंक्स और तरह-तरह के विजेट लगा दिए थेमेरे ब्लॉग की पाठ्य सामग्री गंभीरता लिए होती है इसीलिए ब्लॉग को सीधा-सादा रखना ही श्रेयस्कर हैऔर फ़िर पिछले कुछ समय से मैं कम-से-कम में चला लेने में यकीन करने लगा हूँ, इसीलिए सबसे पहले मैंने अपने ब्लॉग पर अपरिग्रह के सिद्धांत का प्रयोग कियाआप भी अपने ब्लॉग से यहाँ-वहां के जितने भी तत्व निकाल सकते हैं उन्हें एक बार निकालकर देखें कि ब्लॉग की दर्शनीयता और उपयोगिता बढती है या नहींकोई भी विजेट या लिंक हटाने से पहले उसे कौपी करके सुरक्षित रख लें ताकि बाद में उसे इच्छा होने पर दोबारा लगा सकेंपठन-पाठन को पवित्र कर्म जानें

उबाऊ या अनुपयुक्त शीर्षक लगाना - नया पाठक आपकी किसी उपयोगी पोस्ट को ढूंढ रहा हैवह आपकी पोस्टों की आर्काइव में जाता है लेकिन उसे वहां कुछ नहीं मिलताकहीं ऐसा तो नहीं कि आपने अपनी ज़रूरी और अच्छी पोस्टों को अनुपयुक्त शीर्षक दिए हैं? “नई वेबसाइटेंशीर्षक के स्थान पर यदि आप लिखेंदस शानदार नई वेबसाइटेंतो बात में दम जाता हैदूसरा शीर्षक ज्यादा सूचनापरक है और भाव/रोचकता जगाता हैहो सकता है कि दोनों पोस्टों में एक ही बात कही गई हो लेकिन दूसरी पोस्ट को नज़रंदाज़ करना मुश्किल हैपोस्टों के शीर्षकों के चयन में समय और समझ दोनों लगायें

यह पोस्ट लियो बबौटा के ब्लॉग राइट टु डन से लेकर आवश्यक परिवर्तनों के साथ अनूदित की गई है। मूल पोस्ट आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

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