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Archive for the ‘संत-महात्मा’ Category

सीटा के ईसाई मठ में महंत लूकास ने एक दिन सभी शिष्यों को प्रवचन के समय कहा :- “ईश्वर करे कि तुम सभी भुला दिए जाओ”. “यह आप क्या कह रहे हैं?” – उनमें से एक ने कहा – “क्या इसका अर्थ यह है कि कोई भी हमसे जगत के कल्याण करने की सीख नहीं [...]

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महर्षि रमण बहुत कुशल धनुर्धर भी थे. एक सुबह उन्होंने अपने एक शिष्य को अपनी धनुर्विद्या देखने के लिए बुलाया. शिष्य यह सब पहले ही दसियों बार देख चुका था पर वह गुरु की आज्ञा की अवहेलना नहीं कर सकता था. वे समीप ही जंगल में एक विशाल वृक्ष के पास गए. महर्षि रमण के [...]

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वेदांत के आदि गुरु श्री आद्य शंकराचार्य का जन्म लगभग 11 शताब्दी पूर्व त्रावणकोर के एक मलयाली ब्राह्मण के घर हुआ था. वे बहुत छोटे थे तभी उनके पिता का निधन हो गया. बचपन में ही उन्होंने वेदों और वेदांगों का पूरा अध्ययन कर लिया. उनके मन में सन्यस्त होने की बड़ी ललक थी और [...]

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“कौन है? : जलालुद्दीन रूमी की कहानी किसी ने अपनी प्रियतमा के द्वार को खटखटाया. भीतर से आवाज़ आई – “कौन है?” उसने कहा – “यह मैं हूँ!” द्वार के भीतर से आवाज़ आई – “इस घर में मैं और तुम एक साथ नहीं रह सकते”. द्वार नहीं खुला. प्रेमी बियाबान में ठोकर खाता रहा. [...]

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आज परमपावन दलाई लामा का जन्मदिन है. कुछ दिनों पहले (26 अप्रैल, 2009) को दलाई लामा सेन फ्रांसिस्को में आयोजित एक कार्यक्रम में स्वयं आगंतुकों को भोजन परोस रहे थे. एक सज्जन ने भोजन की थाली लेते हुए उनसे कहा – “परमपूज्य, मुझपर कृपा करें, मैं बेघर हूँ”. दलाई लामा ने कहा – “मैं भी”. [...]

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संत मैक्सिमिलियन कोल्बे (1894-1941) पोलैंड के फ्रांसिस्कन मत के पादरी थे. नाजी हुकूमत के दौरान उन्हें जर्मनी की खुफिया पुलिस ‘गेस्टापो’ ने बंदी बना लिया. उन्हें पोलैंड के औश्वित्ज़ के यातना शिविर में भेज दिया गया. एक दिन यातना शिविर में दैनिक हाजिरी के दौरान एक बंदी कम पाया गया. अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला [...]

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