वेदांत के आदि गुरु श्री आद्य शंकराचार्य का जन्म लगभग 11 शताब्दी पूर्व त्रावणकोर के एक मलयाली ब्राह्मण के घर हुआ था. वे बहुत छोटे थे तभी उनके पिता का निधन हो गया. बचपन में ही उन्होंने वेदों और वेदांगों का पूरा अध्ययन कर लिया. उनके मन में सन्यस्त होने की बड़ी ललक थी और [...]
Archive for the ‘संत-महात्मा’ Category
आद्य शंकराचार्य
Posted in संत-महात्मा, tagged आद्य शंकराचार्य on November 29, 2009 | 7 Comments »
“कौन है? : जलालुद्दीन रूमी की कहानी
Posted in संत-महात्मा, tagged प्रेम, रूमी on July 17, 2009 | 7 Comments »
“कौन है? : जलालुद्दीन रूमी की कहानी
किसी ने अपनी प्रियतमा के द्वार को खटखटाया. भीतर से आवाज़ आई – “कौन है?”
उसने कहा – “यह मैं हूँ!”
द्वार के भीतर से आवाज़ आई – “इस घर में मैं और तुम एक साथ नहीं रह सकते”.
द्वार नहीं खुला.
प्रेमी बियाबान में ठोकर खाता रहा. वह अपनी सुध-बुध खोकर हर [...]
दलाई लामा का जन्मदिन
Posted in संत-महात्मा, tagged दलाई लामा on July 6, 2009 | 3 Comments »
आज परमपावन दलाई लामा का जन्मदिन है. कुछ दिनों पहले (26 अप्रैल, 2009) को दलाई लामा सेन फ्रांसिस्को में आयोजित एक कार्यक्रम में स्वयं आगंतुकों को भोजन परोस रहे थे. एक सज्जन ने भोजन की थाली लेते हुए उनसे कहा – “परमपूज्य, मुझपर कृपा करें, मैं बेघर हूँ”.
दलाई लामा ने कहा – “मैं भी”.
असीम प्रेम और त्याग का उदाहरण
Posted in संत-महात्मा, tagged त्याग, प्रेम on June 28, 2009 | 1 Comment »
संत मैक्सिमिलियन कोल्बे (1894-1941) पोलैंड के फ्रांसिस्कन मत के पादरी थे. नाजी हुकूमत के दौरान उन्हें जर्मनी की खुफिया पुलिस ‘गेस्टापो’ ने बंदी बना लिया. उन्हें पोलैंड के औश्वित्ज़ के यातना शिविर में भेज दिया गया.
एक दिन यातना शिविर में दैनिक हाजिरी के दौरान एक बंदी कम पाया गया. अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि [...]
लंबे सफर में ईमानदारी
Posted in संत-महात्मा, tagged ईमानदारी on April 14, 2009 | 6 Comments »
शाह अशरफ अली बहुत बड़े मुस्लिम संत थे। एक बार वे रेलगाड़ी से सहारनपुर से लखनऊ जा रहे थे। सहारनपुर स्टेशन पर उन्होंने अपने शिष्यों से कहा कि वे सामान को तुलवाकर ज्यादा वजनी होने पर उसका किराया अदा कर दें।
वहीं पास में गाड़ी का गार्ड भी खड़ा था। वह बोला – “सामान तुलवाने कि [...]







