दार्शनिक
बाज़ार में सुकरात
सुकरात महान दार्शनिक तो थे ही, उनका जीवन संतों की तरह परम सादगीपूर्ण था. उनके पास कोई संपत्ति नहीं थी, यहाँ तक कि वे पैरों में जूते भी नहीं पहनते थे. फ़िर भी वे रोज़ बाज़ार से गुज़रते समय दुकानों में रखी वस्तुएं देखा करते थे. उनके एक मित्र ने उनसे इसका कारण पूछा. सुकरात [...]
तीन छन्नियां
प्राचीन यूनान में सुकरात अपने ज्ञान और विद्वता के लिए बहुत प्रसिद्द था. सुकरात के पास एक दिन उसका एक परिचित व्यक्ति आया और बोला, “मैंने आपके एक मित्र के बारे में कुछ सुना है.” “दो पल रुको”, सुकरात ने कहा, “मुझे कुछ बताने से पहले मैं चाहता हूँ कि हम एक छोटा सा परीक्षण [...]
सोरेन कीर्केगार्ड के अनमोल वचन
सोरेन अबाये कीर्केगार्ड (1813 – 1855) डेनमार्क के दार्शनिक और रहस्यवादी थे. बीसवीं शताब्दी के चिंतकों पर उनके दर्शन का गहन प्रभाव पड़ा है. उन्होंने मानव जीवन और इसकी प्राथमिकताओं, अनुभवों, अनुभूतियों, संकल्प, और विकल्पों के क्षेत्र में बेजोड़ काम किया है. उनके प्रसिद्द वचनों को मैंने यहाँ आपके लिए अनूदित किया है:- 01 – [...]
कैसा विरोध? कैसी आलोचना?
हिंदी ब्लॉग जगत में आयेदिन घमासान मच रहा है. सबकी अपनी-अपनी सोच है और बात को रखने का अपना-अपना अंदाज. देखने में यही आ रहा है कि आलोचना का स्वर बड़ा मुखर है. कोई बात किसी को जमी नहीं कि दन्न से एक पोस्ट ठोंक दी. बहुत से नवोदित ब्लॉगर हैं जो असहमति की दशा [...]
एक मालिक की नीलामी
ईसा पूर्व यूनान का दार्शनिक डायोजीनस सर्वथा नग्न रहता था और बहुत सशक्त कदकाठी का पुरुष था. उस जमाने में गुलाम प्रथा अपने चरम पर थी और दस्युओं के गिरोह बलशाली व्यक्तियों को पकड़कर उन्हें गुलाम के रूप में बेच देते थे. ऐसे ही चार दस्युओं ने डायोजीनस को देखा और आपस में बात की [...]

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