Category Archives: गीत-ग़ज़ल-कविता

कैलाश वाजपेयी – कविता – ऐसा कुछ भी नहीं

ऐसा कुछ भी नहीं जिंदगी में कि हर जानेवाली अर्थी पर रोया जाए. काँटों बीच उगी डाली पर कल जागी थी जो कोमल चिंगारी, वो कब उगी खिली कब मुरझाई याद न ये रख पाई फुलवारी. ओ समाधि पर धूप-धुआँ … Continue reading

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बच्चन – कविता – रीढ़ की हड्डी

मैं हूँ उनके साथ,खड़ी जो सीधी रखते अपनी रीढ़ कभी नही जो तज सकते हैं, अपना न्यायोचित अधिकार कभी नही जो सह सकते हैं, शीश नवाकर अत्याचार एक अकेले हों, या उनके साथ खड़ी हो भारी भीड़ मैं हूँ उनके … Continue reading

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रामावतार त्यागी – कविता – एक भी आँसू न कर बेकार

  एक भी आँसू न कर बेकार जाने कब समंदर माँगने आ जाए पास प्यासे के कुँआ आता नहीं है यह कहावत है अमरवाणी नहीं है और जिसके पास देने को न कुछ भी एक भी ऎसा यहाँ प्राणी नहीं … Continue reading

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सर्वेश्वरदयाल सक्सेना – कविता – उठ मेरी बेटी सुबह हो गई

पेड़ों के झुनझुने, बजने लगे; लुढ़कती आ रही है सूरज की लाल गेंद। उठ मेरी बेटी सुबह हो गई। तूने जो छोड़े थे, गैस के गुब्बारे, तारे अब दिखाई नहीं देते, (जाने कितने ऊपर चले गए) चांद देख, अब गिरा, … Continue reading

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गिरिजाकुमार माथुर – कविता – हम होंगे कामयाब

होंगे कामयाब, होंगे कामयाब हम होंगे कामयाब एक दिन हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन होंगी शांति चारो ओर होंगी शांति चारो ओर होंगी शांति चारो ओर एक दिन हो-हो मन में है … Continue reading

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