गीत-ग़ज़ल-कविता

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना – कविता – नये साल की शुभकामनाएँ!

नये साल की शुभकामनाएँ! खेतों की मेड़ों पर धूल-भरे पाँव को, कुहरे में लिपटे उस छोटे-से गाँव को, नए साल की शुभकामनाएँ! जाते के गीतों को, बैलों की चाल को, करघे को, कोल्हू को, मछुओं के जाल को, नए साल की शुभकामनाएँ! इस पकती रोटी को, बच्चों के शोर को, चौंके की गुनगुन को, चूल्हे [...]

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बच्चन – कविता – जो बीत गई सो बात गई

जो बीत गई सो बात गई जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अम्बर के आनन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे जो छूट गए फिर कहाँ मिले पर बोलो टूटे तारों पर कब अम्बर शोक मनाता है जो बीत गई सो [...]

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बच्चन – कविता – कोई बिरला विष खाता है

कोई बिरला विष खाता है! मधु पीने वाले बहुतेरे, और सुधा के भक्त घनेरे, गज भर की छातीवाला ही विष को अपनाता है! कोई बिरला विष खाता है! पी लेना तो है ही दुष्कर, पा जाना उसका दुष्करतर, बडा भाग्य होता है तब विष जीवन में आता है! कोई बिरला विष खाता है! स्वर्ग सुधा [...]

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रमानाथ अवस्थी – कविता – जिसे नहीं कुछ चाहिए

जिसे नहीं कुछ चाहिए, वही बड़ा धनवान। लेकिन धन से भी बड़ा, दुनिया में इन्सान। चारों तरफ़ मची यहाँ भारी रेलमपेल। चोर उचक्के खुश बहुत, सज्जन काटें जेल। मतलब की सब दोस्ती देख लिया सौ बार। काम बनाकर हो गया, जिगरी दोस्त फ़रार। तेरे करने से नहीं, होगा बेड़ा पार। करने वाला तो यहाँ, है [...]

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अज्ञेय – कविता – मैंने आहुति बन कर देखा

मैं कब कहता हूँ जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने, मैं कब कहता हूँ जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने? काँटा कठोर है, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है, मैं कब कहता हूँ वह घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने? मैं कब कहता हूँ मुझे युद्ध में कहीं न तीखी चोट मिले? मैं कब कहता [...]

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