Category Archives: बाल-कथाएं

गरुड़ और कौवे की कहानी


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एक दिन एक कौवे ने विशालकाय गरुड़ पक्षी को भेड़ का एक छोटा मेमना अपने पंजे में दबाये हुए अपने घोंसले की और उड़ते देखा.

“बढ़िया भोजन पाने का यह अच्छा तरीका है” – कौवे ने सोचा – “मैं भी इसी तरह एक मेमना पकड़ लूँगा”.

कौवा पेड़ से छलाँग लगाकर भेड़ों के एक झुंड पर झपटा और उसने एक मेमने को पकड़ने की कोशिश की. लेकिन भेड़ का एक छोटा सा मेमना भी कौवे के लिए तो बहुत बड़ा शिकार था! कौवा उसे लेकर उड़ नहीं सकता था.

“हे भगवान! मैं तो इसे लेकर उड़ नहीं सकता! इसे छोड़ देने में ही भलाई है. कोई छोटा शिकार बेहतर होगा” – कौवे ने सोचा.

लेकिन उस मेमने को छोड़ना भी उतना आसान थोड़े ही था! जब कौवे ने उसे छोड़कर उड़ने की कोशिश की तो उसने यह पाया कि उसके पंजे मेमने के ऊनी रोओं में फंस गए थे.

कौवे ने स्वयं को छुड़ाने की भरसक कोशिश की लेकिन कुछ न हुआ. किसान ने यह सब देखा तो उसने कौवे को पकड़ लिया और अपने घर लाकर उसे अपने बच्चों को दे दिया.

“ये कैसा पक्षी है, पिताजी?” – किसान के बच्चों ने पूछा.

किसान हंसते हुए बोला – “बच्चों, कुछ समय पहले तक तो इसे लगता था कि यह गरुड़ है. अब इसे शायद यह पता चल गया होगा कि यह तो सिर्फ एक कौवा ही है. अगर इस बात को इसने हमेशा याद रखा होता तो आज यह आजाद पक्षी होता”.

(कहानी और चित्र यहाँ से लिए गए हैं)

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रट्टू तोता


किसी आदमी के पास एक बहुत शानदार तोता था. आदमी ने तोते को केवल एक शब्द ‘बेशक’ बोलना सिखा दिया.

एक रात उस आदमी ने गाँव में अलग-अलग स्थानों में कुछ धन गाड़ दिया. अगली सुबह वह अपने तोते को लेकर गाँव में घूमने निकला और लोगों से बोला – “मेरा तोता बहुत बुद्धिमान है. वह मुझे बताता है कि जमीन में कहाँ-कहाँ धन गडा हुआ है”.

इसके बाद वह उन्हीं स्थानों पर गया जहाँ उसने पिछली रात धन गाड़ दिया था और तोते से बोला – “मेरे ज्ञानी तोते, यदि मैं यहाँ पर खोदूं तो क्या मुझे कुछ धन मिलेगा?”

तोता बहुत ज्ञान प्रदर्शित करते हुए बोला – “बेशक!”

उस आदमी ने उपस्थित लोगों के सामने गड्ढा खोदा और लोगों को धन निकालकर दिखाया.

भीड़ में एक युवक था जो तोते के इस कारनामे को देखकर प्रभावित हो गया और सोचने लगा – “यदि मुझे यह तोता मिल जाए तो मैं बहुत जल्द ही संपन्न हो जाऊँगा”.

युवक ने तोते के मालिक से पूछा – “तुम यह तोता कितने में बेचोगे?”

“एक हज़ार सोने के सिक्कों के बदले मैं यह तोता बेचूंगा” – तोते के मालिक ने कहा.

“यह तो बहुत बड़ी रकम है!” – युवक बोला.

“लेकिन मेरा तोता तुम्हें उससे भी कई गुना धन कमाकर देगा” – आदमी ने कहा.

तोता यह सुनकर बोला – “बेशक!”

युवक को तोते का यह बोलना भा गया और उसने तोते के मालिक को एक हज़ार सोने के सिक्के दे दिए और तोते को लेकर चल दिया.

एक स्थान पर रूककर उसने तोते से कई बार पूछा – “तोते, यदि मैं यहाँ पर खोदूं तो क्या मुझे कुछ धन मिलेगा?”

हर बार तोते ने एक ही उत्तर दिया – “बेशक!”

युवक ने कई स्थानों पर खोदकर देखा पर उसे कहीं भी एक धेला भी नहीं मिला.

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युवक समझ गया कि तोते के मालिक ने उसे ठग लिया है. उसने तोते से पूछा – “ओ ज्ञानी तोते, मुझे लगता है कि मैंने एक हज़ार सोने के सिक्कों के बदले में तुम्हें खरीदकर बहुत बड़ी मूर्खता कर दी है”.

तोते ने ज्ञानियों की भांति उत्तर दिया – “बेशक!”

यह सुनकर युवक को बहुत जोरों से हंसी आ गई और वह खुद को ठगाया जाना भूल गया.

“ह्म्म्म…” – युवक तोते से बोला – “तोते, तुमने पहली बार सच कहा. अब मैं इन सब चक्करों में पड़कर अपना समय और धन नष्ट नहीं करूँगा. परिश्रम और लगन के बूते ही कोई व्यक्ति धनी बन सकता है”.

“बेशक!” – तोते ने हामी भरी. उसने दूसरी बार सच बोला था.

(कहानी और चित्र यहाँ से लिए गए हैं)

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