अच्छी नींद लेने के लिए क्या करें?

sushant-jhaसुशांत झा पत्रकार और अनुवादक हैं. दो दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर अच्छी नींद लेने के लिए एक पोस्ट लिखी थी जिसे उनकी सहमति से हिंदीज़ेन पर प्रस्तुत किया जा रहा है. इस पोस्ट में नींद और भोजन का कनेक्शन बहुत अच्छे से बताया गया है. ये सारी बातें हमारे पारंपरिक ज्ञान (कन्वेंशनल विज़्डम) का हिस्सा थीं लेकिन महानगरीय जीवन की आपाधापी में हम उन्हें बिसरा चुके हैं. आप सुशांत की रोचक शैली में लिखी पोस्ट से लाभ उठाएं. मूल पोस्ट में आए उनके कमेंट भी नीचे जोड़ दिए गए हैं –


1. रात से शुरू करते हैं. कोशिश करें कि रात का खाना जितनी जल्दी खा सकें, खा लें. सोने से कम से कम 3 घंटे पहले खाना खा लें. ज्यादातर लोग खाना खाकर तुरंत सोने चले जाते हैं. यह ठीक बात नहीं है.

2. लगभग पूरा चीन सूर्यास्त से पहले खाना खा लेता है. लगभग 80 फीसदी अमेरिकी शाम में 8 बजे तक डिनर कर लेते हैं. हमारे यहां जैनी भी ऐसे करते थे और पुराने जमाने में पूरा समाज सवेरे खाना खाता था. गांव में आज भी रात में 8 बजे तक लोग खाना खा लेते हैं. शहरों में ही कुछ लोग रात में 11 बजे खाते हैं और 2 बजे सोते हैं फिर सुबह में 10 बजे उठकर दिन भर भकुआते हुए घूमते रहते हैं.

3. खाना खाकर तुरंत सोने का मतलब ये है कि जब आप सोने जाते हैं तो शरीर कुछ काम कर रहा होता है. वो पाचन क्रिया में जुटा होता है. ऐसे में गाढी नींद नहीं आएगी. हम सोने के नाम पर खाना-पूर्ति कर रहे होंगे. बेहतर है कि सोने से 3 घंटा पहले खा लें. लेकिन खाना खाते ही नींद आने लगती है, उसकी वजह ये है कि रात का खाना ज्यादा खाते हैं और आदत भी वैसी बनी हुई है. हम साइकलॉजिकली ऐसे हो गए हैं. हम रात का खाना हल्का लें, नींद नहीं आएगी तुरंत. और हां, इसके लिए प्रयास करना होगा कुछ दिन.

4. बेहतर नींद के लिए भोजन पर ध्यान देना जरूरी है. महात्मा गांधी ने इसे लेकर कई प्रयोग किए थे. उन्होंने कम घंटों में पूरी नींद लेने की महारत हासिल कर ली थी. भोजन कम से कम दिन में तीन बार और हो सके तो 5 बार थोड़ा-थोड़ा करके लें. अपने यहां कॉरपोरेट में काम करनेवालों को समय ही नहीं मिलता कि सुकून से खा सकें. लेकिन इस पर ध्यान देना होगा.

5. कोशिश करिए कि रात के 9 बजे के डिनर की जगह शाम 7-8 बजे ही डिनर लिया जाए और शाम का नाश्ता हल्का रखा जाए या स्किप भी कर सकते हैं. आजकल बहुत से लोग पढ़ाई या नौकरी के कारण परिवार से दूर रहते हैं. लगातार बाहर रहने की वजह से अनाप-शनाप खाने की आदत पड़ जाती है. जबतक ये आदत नहीं सुधरती, क्यों न खाने के समय को सुधार लिया जाए. अकेले रहकर कभी खाया, कभी नहीं खाया. कभी भकोस लिया तो कभी चख के ख़तम. मेरे हिसाब से अच्छा खाना एक इन्वेस्टमेंट है… समय का भी और पैसे का भी. अभी कीजिए नहीं तो 40 के बाद डॉक्टर साहब करवाएंगे इन्वेस्टमेंट.

6. दिन का पहला भोजन यानी सुबह का नाश्ता भरपेट होना चाहिए. यानी दिन में अगर आप तीन बार खाते हैं तो सबसे तगड़ा भोजन सुबह का लीजिए. मान लीजिए आप पूरे दिन में 600 ग्राम खाते हैं तो 300 ग्राम सुबह में खाएं, फिर 200 ग्राम दिन में खाएं और 100 ग्राम रात में. हमारे यहां होता उल्टा है. लोग रात का खाना ही भकोस कर खाएंगे कि रात तो अपनी है और खाकर सो जाना है! जबकि रात में चूंकि आप कोई काम नहीं करते, तो ऐसे में ज्यादा खाना फैट में बदल जाएगा और उसका पाचन, आपकी साउंड स्लीप में ख़लल डालेगा अलग.

insomnia7. शाकाहार का अपना महत्व है. शाकाहार को शरीर आसानी से पचा लेता है, शरीर को ज्यादा मेहनत नहीं करनी होती पचाने में (हालांकि मैं खुद पूरी तरह से नहीं हो पाया हूं, लेकिन मुफ्त ज्ञान देने का अपना मजा है). मन हल्का रहता है. भटकता नहीं है. किसी रिसर्च में आया है कि शाकाहार से आपकी याददाश्त भी बढ़ती है.

8. सोने से कम से कम एक घंटा पहले तमाम इलेक्ट्रानिक उपकरणों से अपनी आंख को दूर रखें. लैपटॉप, मोबाइल स्क्रीन नींद में बड़ी बाधा है. एक ब्रिटिश रिसर्च में ये बात सामने आई है कि जो लोग सोने से पहले मोबाइल स्क्रीन पर डटे रहते हैं, उनके नींद की गुणवत्ता घट जाती है.

9. रात की नींद का कोई जोड़ नहीं. रात की 2 घंटे की नींद दिन के 5 घंटे से ज्यादा महत्वपूर्ण है. कोशिश करें कि जब आप सो रहे हों तो कहीं से भी प्रकाश की किरण या आभा आपके कमरे में प्रवेश न करें. मोबाइल को अपने से कम से कम 3 फीट की दूरी पर उलट कर रखें.

10. कई लोग गाढ़ी नींद लेने के लिए सोने से पहले वर्क आउट करते हैं. ताकि शरीर थोड़ा थक जाए. अमेरिका में खासकर इसका ज्यादा चलन है. आप चाहें तो सोने से पहले 15 मिनट तेज वॉक कर सकते हैं. इसे आजमा कर देखिए.

11. कुल मिलाकर मामला ये है कि अच्छी नींद आएगी तो मेमोरी अच्छी रहेगी. चिड़चिड़ापन नहीं रहेगा. लोग आपको पसंद करेंगे! बॉस आपका ‘पटा’ रहेगा और बॉस की सेक्रेटरी आपको तुरंत अप्वाइंटमेंट दिलवा देगी.

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खुश रहने के तरीके – Happiness in 11 Steps

अक्सर हम लोग अपनी तरफ से पूरी मेहनत कर रहे होते हैं, लेकिन नतीजे हमेशा अपनी पसंद के हिसाब से मिलते. कभी पैसे कम मिल रहे होते हैं तो कभी पैसों के चक्कर में अपनी पसंद का काम छोड़कर कुछ ऐसा करना पड़ता है जो ज़रा कम पसंद हो. कभी ऐसा भी होता है जब पैसे और पसंद दोनों मिल रहे होते हैं लेकिन घर / परिवार / दोस्तों से दूर रहकर काम करना पड़ता है. ऐसे में सक्सेसफुल होने या कहलाने के बाद भी दिल भीतर से खुश नहीं रहता. ऐसे में शायद हम लोग कुछ छोटी-छोटी चीज़ें भूल रहे होते हैं जिनकी ओर ध्यान देने पर अपने मन को दिलासा दे सकते हैं, खुश रह सकते हैं.

happy-things-vector-1024x1024खुश रहने के तरीके हमें बचपन से ही पता होते हैं, सिर्फ बाद में जीवन की आपाधापी में हम इन्हें भूल जाते हैं. अपने बचपन के दिनों को याद कीजिए, थोड़ा सा बच्चों वाली हरकतें करके देखियेः-

1. मुस्कुराइए ज्यादाऔर शिकायतें कम कीजिये. हर समय तुनकने और शिकायतें करते रहनेवाले व्यक्ति को कौन पसंद करेगा? बच्चों से कुछ सीखिए. बच्चे दिन भर हँसते हैं, 400 बार लगभग, और शायद एक दो बार किसी चीज़ की शिकायत करते हैं! 

2. नए लोगों और पुराने दोस्तों से मिलते रहिये. अपना फोन उठाइए और देखिए कि आपने अपने किन दोस्तों और रिश्तेदारों से बहुत समय से बात नहीं की है. उन्हें फोन लगाकर सरप्राइज़ दीजिए, आप दोनों ही बात करके बहुत अच्छा फ़ील करेंगे. पड़ोस में कोई नया शिफ्ट किया हो तो खुद से आगे बढ़कर उनका परिचय लीजिए, हो सकता है वे संकोच के कारण आप. नए लोग 

3. अपने परिवार को थोड़ा अधिक समय दीजिये. पुराने दिनों में आप स्कूल से घर लोटते ही सबको पूरे दिन के किस्से सुनाने लगते थे न? उसी तरह शाम की चाय के दौरान या डिनर से समय उनसे बातें कीजिए. उनसे पूछिए कि उनका दिन कैसा बीता. 

4. जरुरत पड़ने पर दूसरों की यथासंभव मदद कीजिये. किसी को कोई मामूली चीज़ जैसे ‘पेंसिल’ या ‘रबर’ नहीं मिल रही हो तो अपनी देने में कोई नुकसान नहीं है. बहुत संभव है कि वे आपसी छोटी सी मदद को भी याद रखेंगे. वे पेपरवर्क या कंप्यूटर में कहीं अटक रहे हों तो उन्हें ज़रूरी सुझाव दें. यदि आर्थिक रूप से मदद करने का मामला हो तो उतनी ही रकम दें जितने का घाटा आप सहन कर सकते हों, हालांकि यह ज़रूरी नहीं कि सामनेवाला आपका उधार चुकता न ही करे. 

5. आशावादी बनिए, सब अच्छा ही होगा ये मान के चलिए. मम्मी के डांटने पर बच्चे शाम को घर लौटने पर पापा से शिकायत करते हैं न! यह मत सोचिए कि जिस चीज को बुरा होना है वह बुरा होकर रहेगी. हमेशा याद रखिए कि सब कुछ खत्म हो जाने पर भी उम्मीद बची रहती है. सब लोग बुरे हैं और दुनिया बद से बदतर होती जा रही है, ऐसा सोचते रहने पर आपको अच्छी चीजें दिखना वाकई कम हो जाएंगी.

6. छुट्टी लीजिये और कहीं घूमने निकल जाइये. हर शहर के पास 50-100 किलोमीटर के दायरे में ऐसा बहुत कुछ होता है जिससे हम अनजान होते हैं. कभी-कभी बच्चों की गर्मियों की छुट्टी या पिकनिक जैसा वक्त बिताइए, जब किसी काम को करने की कोई फिक्र न हो. 

7. माफ़ करना सीखिए. किसने आपके साथ किस दिन क्या किया… यह सब याद रखके आप उसका क्या @#$ लेंगे? हर क्लास में वह बच्चा और हर ऑफिस में वह व्यक्ति लोगों का पसंदीदा होता है जो कोई बात अपने दिल में नहीं रखता और दूसरों की बातों को नज़रअंदाज़ करके उनसे हिलमिल कर रहता है. यदि आप ऐसा कर पाते हैं तो आपके करीबी लोगों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और वे भी इस गुण को अपना सकते हैं.

8. नए लक्ष्य बनाइये, नयी चीज़ें सीखिए. हर रोज़ एक नया लक्ष्य, बच्चों जैसा. यदि लेखक बनना चाहते हों तो एक नोटबुक साख रखकर उसमें अपने विचार नोट करने लगें. यदि फोटोग्राफी करते हों और बढ़िया कैमरा खरीदा हो तो तय कर लें कि रोज़ कम से कम एक फोटो ज़रूर खींचेंगे और नई टेक्नीक सीखेंगे. इसे 365 Project कहते हैं. आपको जो करना पसंद हो, आप जो सीखना चाहते हों, उसके लिए अपना पर्सनल प्रोजेक्ट बनाइए और अपनी प्रगति को शेयर करते रहें, इससे आप एक तरह के पॉज़िटिव प्रेशर में रहेंगे और आलस नहीं करेंगे. 

9. कुछ शारीरिक व्यायाम कीजिये. फिटनेस का भूत सवार होने पर लोग एक ही दिन में कई मील दौड़ने जैसा अव्यावहारिक काम करके जल्द ही डिमॉरेलाइज़ हो जाते हैं. यदि बहुत लंबे अरसे से एक्सरसाइज़ न की हो तो शुरुआत जल्दी उठने और पार्क के कुछ राउंड लगाने से करें. धीरे-धीरे अपनी सैर या दौड़-भाग का दायरा और समय बढ़ाते जाएं. ये गतिविधि आपको स्वस्थ भी रखेगी और नींद भी आएगी. यदि कोई शारीरिक तकलीफ़ या बीमारी आपको व्यायाम न करने दे रही हो तो एक ही स्थान पर किए जा सकने वाला योगाभ्यास या ध्यान करें. 

10. कोई जानवर पाल लीजिये. कुत्ता पालना सबसे बेहतर रहता है क्योंकि लोग उनसे लगाव का अनुभव करते हैं और वे मालिक को चहलकदमी भी खूब कराते हैं. बच्चों का पालतू से लगाव तो आपने देखा होगा! आजकल शहरों में लोग अकेले होते जा रहे हैं. कोई पेट रखने से लोग इमोशनली संभले रहते हैं. 

11. काम से कभी फ़ुर्सत लीजिये. ऑफिस से लौटते ही लैपटॉप या फोन में घुस जाना आपको अखरता नहीं है? बच्चे भी कभी-कभी बस्ता फेंक देते हैं जनाब! कामकाज के भीषण दबाव और टारगेट पूरा करने के तनाव के कारण कितने ही लोग बीमारियों और बुरे हालातों का शिकार हो रहे हैं. 

ऐसी कई रोजाना थोड़ी पॉजिटिव सलाह देने वाली वेब साईट होती हैं, ज्यादातर अंग्रेजी में हैं, मगर दस बारह लाइन तो पढ़ ही सकते हैं! हिंदी में पढ़ना हो तो हिंदीज़ेन है ही! प्रेरक लेखों की आर्काइव में आपको बहुत अच्छे लेख पढ़ने को मिलेंगे.

यह पोस्ट मित्र आनंद कुमार ने फेसबुक में शेयर की थी. आनंद फेसबुक पर बहुत रोचक और उपयोगी बातें शेयर करते हैं. यह अंग्रेजी की इस पोस्ट का अनुवाद है, जिसका हिंदी में विस्तार किया गया है.

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बच्चों को जिम्मेदार व स्वावलंबी बनाने के लिए ज़रूरी 10 बातें

Father and son @ wassenaarse slag.

हम अपने बच्चों को सारी खुशियां देना चाहते हैं क्योंकि हममें से बहुतों ने बहुत सादा बचपन बिताया. हमारे पैरेंट्स के पास विकल्प सीमित थे इसलिए हम अपने बच्चों को उन चीजों से वंचित नहीं रखना चाहते जो हमें उपलब्ध नहीं थीं. लेकिन हममें से कई पैरेंट्स अपने बच्चों के प्रति इतना अधिक स्नेह रखते हैं कि वे बच्चों में घर कर रही बुरी आदतों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और उन्हें स्वावलंबी नहीं बनाते. यदि आप ऐसे माता-पिता हैं तो बहुत जल्द ही चीजें आपके नियंत्रण से बाहर हो जाएंगी. निस्संदेह आप अपने बच्चों से बहुत प्रेम करते हैं लेकिन उनके बेहतर भविष्य के लिए यह ज़रूरी है कि नीचे दिए गए बिंदुओं पर विचार करेः

1. बच्चों की परवरिश राजाओं की भांति न करें – यह ज़रूरी है कि आप बच्चों को समय-समय पर यह अहसास होने दें कि वे महत्वपूर्ण हैं लेकिन उन्हें अपने नियंत्रण से मुक्त कर देने के परिणाम प्रतिकूल हो सकते हैं. बच्चों पर आपके नियंत्रण का अर्थ यह है कि आप उनके लिए सीमाओं का निर्धारण करें. उन्हें यह समझाएं कि उन्हें किन हदों को कभी पार नहीं करना है. इसके लिए यह ज़रूरी है कि आप उन्हें कुछ जिम्मेदारियां सौंपें और पैरेंट्स होने के नाते उनका मार्गदर्शन करें.

2. बच्चों को रूपए-पैसे का महत्व बताएं – आजकल अधिकांश घरों में माता-पिता कामकाजी होते हैं इसलिए वे बच्चों को पर्याप्त समय न दे पाने के कारण उन्हें सुख-सुविधा और पॉकेट मनी देकर अपने अपराध बोध को कम करते रहते हैं. ऐसा करते समय वे यह भूल जाते हैं कि पैसा एक साधन मात्र है और इसे साध्य नहीं बनना चाहिए. यदि आप स्वयं पर इस नीति का पालन करेंगे तो आपके बच्चे भी इसका महत्व समझेंगे. हम उस कालखंड में जी रहे हैं जब सब कुछ एक क्लिक पर सर्वसुलभ है. ऐसे में अपने बच्चों को छोटी उम्र से ही रूपए-पैसे देना, उनके लिए महंगी ज्वेलरी, मोबाइल, गेमिंग पैड आदि खरीदना उन्हें सुविधाभोगी बना देगा और ऐसे बच्चों में किसी भी चीज के प्रति कृतज्ञ होने का भाव नहीं पनपेगा.

3. बच्चों को खुद से काम करने के लिए प्रोत्साहित करें – जीवन में आगे बढ़ते रहने के लिए स्वयं कार्य करना बहुत ज़रूरी है. हर जिम्मेदार व्यक्ति को वयस्क होने पर स्वावलंबी बनना पड़ता है, अपने लिए उपयुक्त काम खोजना पड़ता है. अपने बच्चों को यह बात बताकर आप उन्हें उनके भावी जीवन की सफलता में सहायक हो सकते हैं. हो सकता है कि आप उन्हें किसी भी ऐसे काम से बचाना चाहते हों जो कठिन हो या जिसमें बहुत परिश्रम लगता हो लेकिन उन्हें कोई भी काम न सौंपकर आप उन्हें निठल्ला व आलसी ही बना देंगे. यदि आपके बच्चे खुद से उठकर पानी भी नहीं लेते हों तो आपको सावधान हो जाना चाहिए. ऐसा होने पर उन्हें किशोरावस्था में बाहरी दुनिया में एडजस्ट होने में बड़ी कठिनाई जाएगी. उन्हें इस बात का अहसास होने दीजिए कि अपने जूते पहनने से लेकर बगीचे में पानी डालने के काम में किसी भी तरह से संकोच करने से कोई लाभ नहीं होगा. अपना काम खुद करने की आदत विकसित करने से वे भावी जीवन में बड़ी जिम्मेदारियों को कुशलतापूर्वक अकेले ही निभाने की हिम्मत जुटा पाएंगे.

4. बच्चों को “थैंक यू” कहना व आभारी होना सिखाएं – हो सकता है आप अपने बच्चों को इस प्रकार पाल रहे हों कि वे सब कुछ डिज़र्व करते हैं और किसी के प्रति ऋणी न बनें लेकिन यह भावना आपके बच्चों में ओछापन भर देगी. किसी को “थैंक यू” कहना या किसी के काम के प्रति आभारी होने की बात कहने से बच्चे यह जान पाते हैं कि उनके लिए किए जा रहे काम कितने महत्वपूर्ण हैं.

5. अपने बच्चों के सामने बचपना न दिखाएं – पैरेंट्स होने के नाते हमें बच्चों के सामने आदर्श स्थापित करना चाहिए. हमारे बच्चों को यह दिखना चाहिए कि हम जिम्मेदार, दृढ़-प्रतिज्ञ व खरे हैं. यदि हम ही अपने बच्चों के सामने गैरजिम्मेदार बर्ताव करेंगे तो वे हमसे क्या सीखेंगे?  कुछ पैरेंट्स अपने बच्चों से हमेशा खीझभरा व्यवहार करते हैं या हमेशा उनकी शिकायतें करते रहते हैं. हमारे बच्चों के सबसे बड़े शिक्षक हम ही हैं और हमारी पर्सनालिटी के निगेटिव लक्षणों को वे सहजता से अपने जीवन में उतार लेंगे.

6. बच्चों को उनकी सीमाओं का बोध कराएं – बच्चे स्वभाव से शरारती और सिरचढ़े हो सकते हैं लेकिन पैरेंट्स होने के नाते यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन्हें संयत व्यवहार करना सिखाएं. हमें उनमें ऐसे गुणों को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए जिनसे वे सबके प्रिय बनें. इसके लिए यह ज़रूरी है कि उन्हें बताया जाए कि उनकी किन बातों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. बच्चों के नखरों व ज़िद के आगे हार मान लेने पर वे उच्छृंखल और बदतमीज़ बन जाएंगे.

7. बच्चों को हमेशा उनकी मनमानी न करने दें – जागरूक पैरेंट्स के लिए यह जानना ज़रूरी है कि वे अपने बच्चों को क्या करने या नहीं करने की इज़ाज़त दें. बच्चे को उसकी फरमाइश पर एक चॉकलेट या पर्सनल टैब्लेट दिला देना एक ही बात नहीं है. आप बच्चे की ज़रूरत का आकलन करके स्वयं यह तय करें कि उसके लिए क्या अनिवार्य है और क्या गैरज़रूरी है.

8. बच्चों को गलत बातों के लिए गिफ्ट नहीं दें – यदि आपका बच्चा पुराने खिलौने से ऊबकर तुनकमिजाजी या चिड़चिड़ा व्यवहार कर रहा हो तो उसे शांत करने के लिए नया खिलौना दिला देना गलत नीति है. बच्चों को कोई भी गिफ्ट या नया खिलौना दिलाते समय उन्हें यह अहसास होने दें कि वे उसे डिज़र्व करते हैं और उनकी अच्छाइयों के लिए उन्हें रिवार्ड दिया जाता है. ऐसा होने पर वे उत्तरदायी बनेंगे और अपने सामान व खिलौनों को एहतियात से रखेंगे और उनकी कीमत समझेंगे.

9. बच्चों को सुसंगति के अवसर प्रदान करना – कोई पैरेंट्स नहीं चाहता कि उनके बच्चे बिगड़ैल बच्चों के साथ दोस्ती करें लेकिन बहुत कम पैरेंट्स अपने बच्चों को बुजुर्गों के साथ समय बिताने की सलाह देते हैं. अपने दादा-दादी, नाना-नानी या परिवार के अन्य बुजुर्ग व्यक्तियों के पास जीवनानुभवों का खजाना होता है जिससे आनेवाली पीढ़ियां वंचित होती जाएंगी. आप अपने बच्चों को कभी-कभार ही सही लेकिन बुजुर्गों के साथ हिलने-मिलने का मौका दें, अपने घर में उन लोगों को बुलाएं जो सामुदायिक सेवा आदि से जुड़े हों और वॉलंटियर का काम करते हों. बच्चों के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि लोगों के साथ उनके संबंध स्वस्थ हों और बुराई की ओर खींचनेवाली संगति से वे दूर रहें.

10. अपने बच्चों की गलतियों पर उनका पक्ष नहीं लें – आपका बच्चा उसके द्वारा किए जानेवाले हर सही-गलत काम के लिए जवाबदेह होना चाहिए. यदि उसने कोई गलती की है तो आप उसका पक्ष नहीं लें. बच्चों को उनकी गलतियों से सबक लेने दें और उन्हें मामूली सज़ा देने से पीछे नहीं हटें. यदि आप हर समय अपने बच्चे का ही पक्ष लेंगे तो वे अपनी गलतियों से कोई सीख नहीं लेंगे और सुधरने की बजाए बिगड़ते जाएंगे.

यह लेख इस लेख का संपादित अनुवाद है.

20 ज़रूरी बातों की लिस्ट – 20 Things to Start Doing

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इंटरनेट पर यह इमेज लिस्ट मिली तो इसे आप लोगों से शेयर करने के बारे में सोचा. इस लिस्ट में हमारे शरीर और मन को स्वस्थ व संपन्न रखने के लिए जिन उपायों के बारे में बताया गया है वे बहुत सामान्य हैं और हमारी पुरानी पीढ़ियों के लोग इन्हें बहुत महत्व देते थे. भागदौड़ भरी व तनावयुक्त आधुनिक जीवनशैली के कारण हम कई अच्छी आदतों को अपना नहीं पाते. ये लिस्ट उन्हीं अच्छी आदतों या बातों का रिमांइडर हैः-

1. दिन भर में कई बार पानी पीजिए. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आपको अनेक रोगों से दूर रख सकता है. दूध वाली उबली चाय एसिडिटी बढ़ाती है. इसके स्थान पर नैचुरल जायके वाली ग्रीन-टी पीजिए.

2. दिन की शुरुआत पौष्टिक नाश्ते से करें. दोपहर का भोजन औसत लें और रात को भरपेट खाने से बचें.

3. अपने भोजन में अनाज और डिब्बाबंद फूड के स्थान पर फलों, सब्जियों और प्राकृतिक आहार को वरीयता दें.

4. सुबह से शाम तक एक ही जगह पर टिककर बैठे न रहें. सुबह या शाम कुछ दूरी तक पैदल चलें और हो सके तो सप्ताह में एक बार तैरने या साइकिल चलाने की आदत डालें.

5. हर समय इंटरनेट, टीवी या मोबाइल से ही चिपके न रहें. अपने पसंदीदा विषयों की किताबों को पढ़ना जारी रखें. अपने बच्चों को किताबों से ज्ञान अर्जित करने के लाभ बताएं.

6. सुखद नींद आपके मनोरंजन से ज्यादा ज़रूरी है. कितना भी काम का दबाव या सीरियल/फिल्म देखने की चाह हो लेकिन अपनी ज़रूरत के हिसाब से 6 से 8 घंटे की नींद ज़रूर लें. रात को दस बजे तक सोने और सुबह सात बजे तक उठ जाने से शरीर व मष्तिष्क को भरपूर आराम मिलता है और आप तरोताज़ा बने रहते हैं.

7. अपने या किसी और के बारे में निगेटिव विचार अपने मन में न लाएं. हर व्यक्ति में कुछ अच्छे की खोज करें और उससे सीखें. उदार और हंसमुख बनें.

8. बीती ताहि बिसार दें. अतीत में घट चुकी बातों और बुरे अनुभवों को अपने ऊपर हावी न होने दें. अपने मन में किसी भी व्यक्ति या घटना से उपजी कड़वाहट को घर न करने दें.

9. छोटी-छोटी खुशियों के पलों की अनदेखी न करें. ज़िंदगी इन्हीं लम्हों से मिलकर बनती है. तुनकमिजाजी भरा व्यवहार आपके प्रियजनों को आपसे दूर करता जाएगा.

10. खुद को किसी से कमतर न आंकें. अपनी या किसी दूसरे व्यक्ति की तुलना किसी और से न करें. प्रयास करें कि किस तरह आप अपनी व अन्य व्यक्तियों की खुशियों व क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं.

11. नियमित योग व ध्यान साधना आपको स्थिर व स्वस्थ रख सकती है. तनाव तथा असंयमित जीवनशैली के कारण उपजी समस्याओं के उपचार के लिए इनके लिए समय निकालिए.

12. टालमटोल करने की आदत से बचिए. यदि किसी छोटे काम को आप सिर्फ दो मिनटों में ही कर सकते हों तो उसे फौरन कर डालिए.

13. प्रोसेस्ड या प्रेज़रवेटिव वाले भोजन और बाहर का खाना खाने की बजाए प्राकृतिक व ऑर्गेनिक आहार को तरजीह दें. अधिक गर्म/ठंडा, अधिक मीठा/नमकीन व अधिक तेल/मसाले वाले भोजन से होनेवाले नुकसान सर्वविदित हैं.

14. अपनी पीठ व गर्दन को एक ही मुद्रा में बैठे रहने के कारण होनेवाली अकड़न से बचाने के लिए कुछ-कुछ अंतराल पर उठकर अपने हाथ-पैर आदि को स्ट्रेच करने की आदत डालिए. इससे आपको कंप्यूटर के कारण होनेवाले कलाई के दर्द व आंखों की जलन में भी आराम मिलेगा.

15. शांत संगीत सुनें. पक्षियों के कलरव को सुननने के लिए शहर के कोलाहल से दूर जाएं. गाएं. गुनगुनाएं.

16. अपने परिवेश को साफ-सुथरा रखें. अपनी डेस्क और टेबल आदि से गैरज़रूरी चीजों व क्लटर को हटा दें.

17. ऐसे वस्त्रादि पहनें जिन्हें पहनने से आपको खुशी मिलती हो. फैशन या दूसरी की ख्वाहिश पूरी करने के लिए अपनी इच्छाओं को दरकिनार न करें.

18. जिन चीजों की आपको ज़रुरत न हो उन्हें या तो बेच दें या किसी और को दें. चीजों को Repair, Reuse या Recycle करने की नीति का पालन करें.

19. हमेशा आशान्वित रहें कि आप जो कुछ भी कर रहे हैं वह सबके हित में होगा. लक्ष्य बनाएं और उसकी प्राप्ति की दिशा में भरसक प्रयास करें. असफलताओं से हताश व निराश न हों.

20. असल ज़िंदगी हमारे घर और comfort zone के बाहर है. पुराने दोस्तों की खोजखबर लें. दुनिया देखें. नए लोगों से मिलें, कुछ नया करें. नई रुचियां विकसित करें… आप जो जानते हों वह दूसरों को सिखाएं.

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To the Living : जीवन के प्रति

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किसी ने दलाई लामा से पूछा, “मनुष्यों के संबंध में वह कौन सी चीज़ है जो आपको सबसे अधिक आश्चर्यचकित करती है?”
दलाई लामा ने कहा. “स्वयं मनुष्य…
क्योंकि वह पैसे कमाने के लिए अपने स्वास्थ्य को गंवाता है.
फिर वह उसी पैसे से अपने स्वास्थय को संजोने का प्रयास करता है.
वह अपने भविष्य को लेकर इतना चिंतित रहता है कि वर्तमान को ठीक से नहीं जी पाता है.
इसके फलस्वरूप वह न तो वर्तमान में और न भविष्य में ही सुखपूर्वक जीता है,
वह ऐसे जीता है जैसे उसे कभी नहीं मरना है, और पूरी तरह जिए बिना ही मर जाता है”

(~_~)

The Dalai Lama, when asked what surprised him most about humanity, he said:
“Man.
Because he sacrifices his health in order to make money.
Then he sacrifices money to recuperate his health.
And then he is so anxious about the future that he does not enjoy the present;
the result being that he does not live in the present or the future;
he lives as if he is never going to die, and then dies having never really lived.”

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