Author Archives: Nishant
About Nishant
निशांत 'हिंदीज़ेन' के संस्थापक, संचालक, पेशे से अनुवादक, और दिल्ली के निवासी हैं. भोपाल में जन्मे, वहीं शिक्षा-दीक्षा हुई. गंभीर साहित्य और संगीत के प्रेमी हैं पर हंसी-मजाक दिल खोलकर करते हैं. पूर्णतः पारिवारिक जीव हैं और सरल-सहज जीवन के घोर हिमायती.लिबास
बहुत पुरानी बात है. मिस्र देश में एक सूफी संत रहते थे जिनका नाम ज़ुन्नुन था. एक नौजवान ने उनके पास आकर पूछा, “मुझे समझ में नहीं आता कि आप जैसे लोग सिर्फ एक चोगा ही क्यों पहने रहते हैं!? बदलते वक़्त के साथ यह ज़रूरी है कि लोग ऐसे लिबास पहनें जिनसे उनकी शख्सियत [...]
अनुभव
एक सुबह एक प्रख्यात लेखक और ज़ेन मास्टर के बीच ज़ेन के विषय पर बातचीत हो रही थी: “ज़ेन को आप किस प्रकार परिभाषित करेंगे?”, लेखक ने पूछा. “ज़ेन प्रत्यक्ष अनुभव द्वारा प्राप्त ज्ञान है”, ज़ेन मास्टर ने कहा. “दूसरों के अनुभव से ज्ञान प्राप्त करने में क्या बुराई है?”, लेखक ने कहा, “पुस्तकालयों में [...]
भविष्य में छलांग
मैंने सुना है, एक वृद्ध व्यक्ति हवाईजहाज से न्यूयार्क जा रहा था. बीच के एक एयरपोर्ट पर एक युवक भी उसमें सवार हुआ. उस युवक के बैग को देखकर लगता था कि वह शायद किसी इंश्योरेंस कंपनी का एक्जीक्यूटिव था. युवक को उस वृद्ध व्यक्ति के पास की सीट मिली. कुछ देर चुपचाप बैठे रहने [...]
खाली डिब्बा
यह जापान में प्रबंधन के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाने वाला बहुत पुराना किस्सा है जिसे ‘साबुन के खाली डिब्बे का किस्सा’ कहते हैं. कई दशक पहले जापान में साबुन बनानेवाली सबसे बड़ी कंपनी को अपने एक ग्राहक से यह शिकायत मिली कि उसने साबुन का व्होल-सैल पैक खरीदा था पर उनमें से एक डिब्बा खाली [...]
सबक
धनुर्विद्या के एक प्रसिद्द गुरु अपने शिष्य के साथ वन में भ्रमण कर रहे थे. गुरु ने एक वृक्ष की सबसे ऊंची शिखाओं में छुपे हुए फल पर निशाना लगाया और तीर चला दिया. फल सीधे डाल से टूटकर नीचे आ गिरा. भूमि पर गिरे हुए फल पर एक दृष्टि डाल कर गुरु भावशून्य-से आगे [...]

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