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पागलपन : Madness

एक ताकतवर जादूगर ने किसी शहर को तबाह कर देने की नीयत से वहां के कुँए में कोई जादुई रसायन डाल दिया. जिसने भी उस कुँए का पानी पिया वह पागल हो गया.

सारा शहर उसी कुँए से पानी लेता था. अगली सुबह उस कुँए का पानी पीनेवाले सारे लोग अपने होशहवास खो बैठे. शहर के राजा और उसके परिजनों ने उस कुँए का पानी नहीं पिया था क्योंकि उनके महल में उनका निजी कुआं था जिसमें जादूगर अपना रसायन नहीं मिला पाया था.

राजा ने अपनी जनता को सुधबुध में लाने के लिए कई फरमान जारी किये लेकिन उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि सारे कामगारों और पुलिसवालों ने भी जनता कुँए का पानी पिया था और सभी को यह लगा कि राजा बहक गया है और ऊलजलूल फरमान जारी कर रहा है. सभी राजा के महल तक गए और उन्होंने राजा से गद्दी छोड़ देने के लिए कहा.

राजा उन सबको समझाने-बुझाने के लिए महल से बाहर आ रहा था तब रानी ने उससे कहा – “क्यों न हम भी जनता कुँए का पानी पी लें! हम भी फिर उन्हीं जैसे हो जायेंगे.”

राजा और रानी ने भी जनता कुँए का पानी पी लिया और वे भी अपने नागरिकों की तरह बौरा गए और बेसिरपैर की हरकतें करने लगे.

अपने राजा को ‘बुद्धिमानीपूर्ण’ व्यवहार करते देख सभी नागरिकों ने निर्णय किया कि राजा को हटाने का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने तय किया कि राजा को ही राजकाज चलाने दिया जाय.

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A powerful wizard, who wanted to destroy an entire kingdom, placed a magic potion in the well from which all the inhabitants drank. Whoever drank that water would go mad.

The following morning, the whole population drank from the well and they all went mad, apart from the king and his family, who had a well set aside for them alone, which the magician had not managed to poison.

The king was worried and tried to control the population by issuing a series of edicts governing security and public health.
The policemen and inspectors, however, had also drunk the poisoned water, and they thought the king’s decisions were absurd and resolved to take no notice of them.

When the inhabitants of the kingdom heard these decrees, they became convinced that the king had gone mad and was now giving nonsensical orders. They marched on the castle and called for his abdication.

In despair the king prepared to step down from the throne, but the queen stopped him, saying:
‘Let us go and drink from the communal well. Then we will be the same as them.’

The king and the queen drank the water of madness and immediately began talking nonsense. Their subjects repented at once; now that the king was displaying such wisdom, why not allow him to continue ruling the country?

 

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12 Comments Post a comment
  1. सारगर्भित.

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    December 30, 2012
  2. आज के समय को बहुत सही ढंग से उभारती है ये प्यारी सी छोटी सी कथा…….

    -Arvind K.Pandey

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    December 30, 2012
  3. सटीक कथा। मौके पर उपयोगी।

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    December 30, 2012
  4. MAANANA PADEGA AAPAKE KHAYALAAT KO. WAAH KYA BAAT HAI.

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    December 30, 2012
  5. Jagriti Arya #

    Nishant ji! well done! I good imagination! aapne ye kis context ko lekar likhi mujhe nhi pta but depicts present quality of our indians! jahan koi kisi ko seedhe rastey pr chalte rahna dekh hi ni skta!!!!!

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    December 30, 2012
  6. Prakash Pandya #

    इसे कहते हैं ’’ यथा प्रजा-तथा राजा ।’’
    प्रकाश पंड्या
    बांसवाड़ा -राजस्थान

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    December 30, 2012
  7. प्रभावी लेखन,
    जारी रहें,
    बधाई !!

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    December 31, 2012
  8. हमारे राजा तो पहले से ही बौराये हुए हैं। शायद हमें भी उनके जैसा हो जाना चाहिए।

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    December 31, 2012
  9. लाजवाब…

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    January 14, 2013
  10. सच में आज के हालात को भी बयां करती कहानी और आपका ब्लाग भी सुंदरतम है

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    February 25, 2013
  11. जैसा देश वैसा वेश बनाना पड़ता है.

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    March 5, 2013

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