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चुनाव

शिष्य ने गुरु से पूछा, “यदि मैं आपसे यह कहूं कि आपको आज सोने का एक सिक्का पाने या एक सप्ताह बाद एक हज़ार सिक्के पाने के विकल्प में से एक का चुनाव करना है तो आप क्या लेना पसंद करेंगे?”

“मैं तो एक सप्ताह बाद सोने के हज़ार सिक्के लेना चाहूँगा”, गुरु ने कहा.

शिष्य ने आश्चर्य से कहा, “मैं तो यह समझ रहा था कि आप आज सोने का एक सिक्का लेने की बात करेंगे. आपने ही तो हमें हमेशा वर्तमान क्षण में अवस्थित रहने की शिक्षा दी है!”

“तुमने मुझे सोने की दो काल्पनिक मात्राओं में से एक का चयन करने के लिए कहा”, गुरु बोले, “तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि मैं किसका चुनाव करता हूँ!?

Thanx to John Weeren for this story

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14 Comments Post a comment
  1. Girish tanwar #

    Shubh din….badi soch….dhanyavad…chalte rahiye…

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    February 22, 2012
  2. सिक्‍के पर लेख ”राम लक्ष्‍मण जानकी जै बोलो हनुमान की” ढालने का प्रयास है, ऐसे सिक्‍कों के दूसरे पहलू पर राम दरबार होता है, खैर कहानी तो बढि़या है, लेकिन मेरा ध्‍यान सिक्‍के पर अधिक रहा.

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    February 22, 2012
  3. very nice sir

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    February 22, 2012
  4. कल्पना ही हो तो वृहद हो..

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    February 22, 2012
    • atul mishra #

      तुम्हें क्या मालूम कि कल्पना किसे कहते हैं
      वृहद का अर्थ क्या होता है
      एक काल्पनिक मुस्कान से अपने को होशियार दिखाने की कोशिश करना
      अपने आपको ही मूर्ख बनाना है
      सदगुरु के बिना खोखली है तुम्हारी आध्यात्मिकता

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      June 30, 2012
  5. SHASHI DHAR MISHRA #

    dhairya…..intjar…..badi prapti……………goodpost

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    February 22, 2012
  6. Prachi sharma #

    yes ,its very true,if you have an option for the thing which will not remains same in future as it is ,so its does not matter that what option you choose for that……….generally tengibles have nature of variability…….intengibles like traits(knowledge,experience,nature,behaviour,thinking ) of people does matter for that which option you choose……today or tommorow,because traits have fixed value of them.
    if you asked for option of today or tommorow,based on knowledge…….than definitely you will opt for the option of “today”,because you believe in today.

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    February 22, 2012
  7. मालवी में एक कहावत है कि – जब सपने में ही लड्डु देखने हैं तो फिर असली घी के क्यों नहीं… ! :-) कुछ ऐसा ही…

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    February 22, 2012
  8. एक महीने बाद कितने सिक्के मिलेंगे?

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    February 22, 2012
    • और सारे जन्म सब्र कर सके तो मृत्यु के बाद क्या मिलेगा ? :)

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      February 23, 2012
  9. कल्पना हमेशा सोच से परे होनी चाहिये।

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    February 23, 2012
  10. shailesh #

    sach kaha hai ki kalpna hi karana hai to jyada ki ki jaye aur haqiqt mai rahana hai to kewal aur kewal aaz ki soch rakhi jaye.

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    February 24, 2012
  11. Avinash #

    I like this

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    February 29, 2012
  12. Avinash #

    A

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    February 29, 2012

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