जुआरी

एक जुआरी ने ज़ेन मास्टर के पास आकर कहा, “मैं कल रात सराय में पत्तों की बेईमानी करते पकड़ा गया और मेरे साथियों ने मुझे पहली मंजिल के कमरे की खिड़की से नीचे सड़क पर धकेल दिया. किस्मत से मुझे कुछ ख़ास चोट नहीं लगी. अब मुझे क्या करना चाहिए?”

मास्टर ने जुआरी की आँखों में आँखें डालकर कहा, “आज से ऊपरी मंजिलों पर जुआ खेलना बंद कर दो”.

जुआरी ख़ुशी-ख़ुशी वापस लौट गया.

यह सब देख-सुन रहे एक शिष्य ने अचरज से मास्टर से पूछा, “आपने उसे सीधे-सीधे जुआ खेलना बंद करने के लिए क्यों नहीं कहा?”

“क्योंकि मैं जानता हूँ कि वह जुआ खेलना कभी भी बंद नहीं करेगा”, मास्टर ने मुस्कुराते हुए कहा.

Categories: Zen Stories | 12s टिप्पणियाँ

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12 thoughts on “जुआरी

  1. धीरे धीरे ही सही, नीचे उतर आयेंगे महाशय..

  2. :) क्या बात है जी! :)

  3. इसीलिए
    मास्टर मास्टर हैं,
    शिष्य शिष्य है,
    और जुआरी जुआरी है | :)

  4. कुछ काम धीरे धीरे नहीं होते, हो पाते लेकिन यहाँ तो गुरू गुरू है भाई!

  5. उपदेश की अन्य संभावनाएं (प्राथमिकता के अनुसार)
    ===================================

    जुआ मत खेलो
    जुआ मे बेइमानी मत करो
    जुआ में बेइमानी करते पकडे मत जाओ। अपनी दक्षता बढाओ
    जुआ उपरी मंजिलों में मत खेलो।
    अपने से कमजोर लोगों से ही जुआ खेलो
    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

    अपने से कमजोर लोगों से ही जुआ खेलो

  6. प्रवीण भाई ने ठीक कहा…धीरे धीरे नीचे उतर ही आयेंगे..

  7. देवेंद्र सिंह भदोरिया

    जिसको जो आदत पड़ जाती हें उसकी आदत आसानी से नही जाती इसीलिए गुरु ने ऐसा कहा हमे गलत आदतों से हमेशा बचना चाहिए |

  8. Shashi dhar mishra

    Dear sir, Very good.saral tatha safal salah.

  9. जिन्‍दगी भी बाजी पर लगा चुका जुआरी.

  10. .
    .
    .
    और उस जुआरी ने फिर भी ऊपरी मंजिलों पर जुआ खेलना जारी रखा…

    इस बात पर मैं भी जुआ खेल सकता हूँ… :)

  11. Yashaswi Dwivedi

    guru ki shiksha hamesha aise hi rahasyo se di jane wali hoti hai jha

    shisya bhut samay baad hi samjh pata hai ki wo …sudhra kaise..aur q????

    bahut hi accha….
    thanx ..

    • जुआरी के सुधरने की एक ही उम्मीद है कि वह एक गुरु के संपर्क में है. बढ़िया कथा.

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