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परिवर्तन

ज़ेन शिष्य ने गुरु से पूछा, “मैं दुनिया को बदलना चाहता हूँ? क्या यह संभव है?”

गुरु ने पूछा, “क्या तुम दुनिया को स्वीकार कर सकते हो?”

शिष्य ने कहा, “नहीं, मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता. यहाँ युद्ध, गरीबी, और न जाने कितनी ही बुरी बातें हैं!”

गुरु ने कहा, “जब तक तुम दुनिया को स्वीकार करना नहीं सीख लो तब तक तुम इसे बदल भी नहीं सकोगे”.

Thanx to John Weeren for this story

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14 Comments Post a comment
  1. ये तो सही बात लगी। जब तक किसी से जुड़ो नहीं तब तक उसे बदल कैसे सकते हैं।

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    January 3, 2012
  2. Debra Saturday #

    Thank you….)

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    January 3, 2012
  3. तथ्यों को स्वीकार कर ही आगे बढ़ा जा सकता है।

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    January 3, 2012
  4. Ati~Uttam

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    January 3, 2012
  5. सबसे कठिन है स्वयं को परिवर्तित करना।
    जो खुद को सुधार नहीं सकते दुनिया बदलने निकलते हैं!

    आजकल “परिवर्तन” शब्द fasionable हो गया है, courtesy ममता बैनर्जी । पर उच्चारण “पोरिबर्तन” बन गया है ।

    जी विश्वनाथ

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    January 3, 2012
  6. Asli phool dekhne ho to to phool ban ban jana jaruei h ” arthat duniya ko janne ke liye DUNIYAVI hona
    jaruri h . Bhagwan RAJNEESH ka kathan sarthak h.

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    January 3, 2012
  7. Vijay Kumar Joshi #

    Duniya Badalne Ke Bajay Hum Khud Badal Jaye To Duniya Badalne KI Jaroorat Hi Nahi Rahigi

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    January 3, 2012
  8. keechad saaf karne ke liye usme utarna hi padta hai.

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    January 4, 2012
  9. लालची धार्मिक गुरु नहीं कर सकते सत्‍ता परिवर्तन

    http://vichar.bhadas4media.com/society/1492-2011-08-01-12-54-27.html

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    January 5, 2012
  10. मुझे तो यह कांसेप्ट ही बड़ा confusing लगता है | क्या हम दुनिया को बदल सकते भी हैं ? जिसने दुनिया बनाई – वह कोई है ? या नहीं है ?

    यदि है – तो क्या वह हमसे कहीं अधिक ज्ञानी और सशक्त न होगा ? यदि उसे इसे बदलना सही लगता, और वह इसे बदलना चाहता – तो क्या यह ऐसी ही होती – या फिर कुछ अलग होती ? और यदि वह इसे ऐसी ही चाहता है – तो क्या हमारी यह बदलाव की इच्छा उसकी समझ से बड़ी है ? हो भी – तो क्या हमारी सशक्तता जो उससे बहुत कम है – उस शक्ति से यह संभव है ?

    और यदि यह दुनिया किसी ने नहीं बनाई है – बस ऐसे ही बन गयी है – तो फिर इसे बदलने के प्रयास कितने meaningful होंगे ? what started as an accident , is always an accident – whats the point of trying to change it ?

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    January 5, 2012
  11. मेरा मानना ये है दोस्तों की इंसान को सबसे पहले अपने आप को बदलना चाहिए
    दुनिया अपने आप बदल जाएगी …कयौकी दुनिया आपसे ही शुरु होती है …..

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    January 20, 2012
  12. praveen negi #

    it is write

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    March 2, 2012
  13. prakash wahurwagh #

    duniya badalne jaana tarkqueeb hai khud se dur bhagane ki……….khud ko badalna jyada kathin hai…duniya se.

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    April 17, 2012

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