दर्पण

एक बहुत धनी युवक रब्बाई के पास यह पूछने के लिए गया कि उसे अपने जीवन में क्या करना चाहिए. रब्बाई उसे कमरे की खिड़की तक ले गए और उससे पूछा:

“तुम्हें कांच के परे क्या दिख रहा है?”

“सड़क पर लोग आ-जा रहे हैं और एक बेचारा अँधा व्यक्ति भीख मांग रहा है”.

इसके बाद रब्बाई ने उसे एक बड़ा दर्पण दिखाया और पूछा:

“अब इस दर्पण में देखकर बताओ कि तुम क्या देखते हो”.

“इसमें मैं खुद को देख रहा हूँ”.

“ठीक है. दर्पण में तुम दूसरों को नहीं देख सकते. तुम जानते हो कि खिड़की में लगा कांच और यह दर्पण एक ही मूल पदार्थ से बने हैं.”

“तुम स्वयं की तुलना कांच के इन दोनों रूपों से करके देखो. जब यह साधारण है तो तुम्हें सभी दिखते हैं और उन्हें देखकर तुम्हारे भीतर करुणा जागती है. और जब इस कांच पर चांदी का लेप हो जाता है तो तुम केवल स्वयं को देखने लगते हो.”

“तुम्हारा जीवन भी तभी महत्वपूर्ण बनेगा जब तुम अपने आँखों पर लगी चांदी की परत को उतार दो. ऐसा करने के बाद ही तुम अपने लोगों को देख पाओगे और उनसे प्रेम कर सकोगे”.

यह यहूदी नीति-कथा पाउलो कोएलो के ब्लॉग से ली गयी है.

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20 Comments

Filed under Paulo Coelho

20 responses to “दर्पण

  1. पर ये चांदी का लेप इतनी जल्दी उतरता भी नहीं है, बहुत मेहनत लगती है इस लेप को उतारने में ।

  2. आँखों से परत हटने पर ही सब कुछ पारदर्शी हो जाता है …
    बहुत सही!

  3. गजब, कितने सहज ढंग से समझा दिया गया।

  4. वाह! गागर में सागर…

  5. उस समय ऐसा करना हर किसी के लिए संभव नहीं है ये , काश ऐसा संभव हो सकता …..?

  6. Beautiful, motivating story. Thanks.

  7. एक आइना अन्दर भी है,उससे झाँको,सब दिख जायेगा !

  8. एक बहुत ही ज्ञानवर्धक कहानी है. बहुत बहुत धन्यवाद.

  9. ग्रेट! दर्पण पूरा है – फुल फीड के साथ!

  10. चाँदी का लेप….जो दृष्य हटा कर व्यक्ति के दृष्टिकोण को सीमित कर देता है…बहुत खूब!

  11. rajendra chandak

    aisa ek darpan har ek ke bhitar chipa hai. janana chahte ho to vipassana ka meditation course karen.

  12. aapka kahani bahut parrnadayak hai.

  13. uma shankar khatri

    In mirror what I see is my body, NOT myself. When there is no silver layer I can see other bodies also.

  14. बहुत प्रेरक कथा.

  15. Sarfaraz sayyed

    Yahi zindagi ki hakikat hai.

  16. Zindagi main sabse badi jeet apne apko pahchanne wale ki hoti hai.

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