ये खेल होगा नहीं दोबारा

ये ज़िंदगी…

ये ज़िंदगी…

ये ज़िंदगी आज जो तुम्हारे

बदन की छोटी-बड़ी नसों में मचल रही है,

तुम्हारे पैरों से चल रही है.

ये ज़िंदगी…

ये ज़िंदगी…

तुम्हारी आवाज़ में गले से निकल रही है,

तुम्हारे लफ़्ज़ों में ढल रही है.

ये ज़िंदगी…

ये ज़िंदगी…

ये ज़िंदगी जाने कितनी सदियों से यूंही शक्लें बदल रही है.

ये ज़िंदगी…

ये ज़िंदगी…

बदलती शक्लों, बदलते जिस्मों में चलता-फिरता एक शरारा

जो इस घड़ी नाम है तुम्हारा.

इसी से सारी चहल पहल है,

इसी से रौशन है हर नज़ारा.

सितारे तोड़ो, या घर बसाओ,

कलम उठाओ, या सर झुकाओ,

तुम्हारी आँखों की रौशनी तक है खेल सारा,

ये खेल होगा नहीं दोबारा,

ये खेल होगा नहीं दोबारा.

गायक – जगजीत सिंह

शायर – निदा फाज़ली

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21 Comments

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21 Responses to ये खेल होगा नहीं दोबारा

  1. तभी मुझे पुनर्जन्म का सिद्धांत अत्यंत प्रिय लगता है। खेल जारी रखने का जुगाड़!

  2. इस अद्भुत साधक का जाना सन्न कर गया ! श्रद्धांजलि !

  3. sandhya

    जगजीत सिंह जी नहीं रहे उनके जाने का गम बहुत है जैसे ही इस मनहूस खबर को सुनी अवाक रह गई , आँख में आंसू आ गए . उनकी आत्मा को इश्वर शांति दे और अब उनकी पत्नी के लिए बेहद दुःख है उन्हें इश्वर पहाड़ सा दुःख सहन करने की शक्ति दे

  4. सिद्धान्तों का और दुआओं का प्रिय लगना और सच होना, अलग बातें हैं। जगजीत साहब भी शायद लिखते थे…अब वे नहीं हैं, उनकी आवाज है…

  5. जगजीत जी की याद को नमन!

  6. खेल यहीं पर हो जाना है,
    कल क्या हो किसने जाना है।

  7. विनम्र श्रद्धांजलि

  8. विनम्र श्रद्धांजलि

  9. जगजीत याद आयेंगे। कालेज के दिनो की कितनी शामे उनके साथ गुजारी है!

  10. “ये खेल तब तक ह जब तक ईश शरीर रुपी गुबारे मे ह हवा”

    तहे दिल से श्रद्दांजली गजल सम्राट जगजीतसिहजी को
    ऐक महान गायक का ईस दूनीया से अलविदा ईश शुभकामना के साथ की
    आने वाले कल को माँ सरस्वती और बहुत सारे जगजीत देगी पर ईश के लीये कदरदान भी चाहीये

  11. sharir se ek jagha khali , Aawaj fijaon me ghuli hui H jo sadiyon tak sun sakte H. MAHAAN gajal gayk ko shrdha naman.

  12. खेल बस हो गया. श्रद्धांजलि.

  13. विनम्र श्रद्धांजलि !

    आपने उनकी याद में बहुत भाव विभोर करने वाली रचना यहां रखी है …
    आभार आपका …

    मेरी ओर से हरिगीतिका छंद में जगजीत सिंह जी को भावांजलि …

    जग जीतने की चाह ले’कर लोग सब आते यहां !
    जगजीत ज्यों जग जीत कर जग से गए कितने कहां ?
    जग जीतने वाले हुनर गुण से जिए तब नाम है !
    क्या ख़ूब फ़न से जी गए जगजीत सिंह सलाम है !!

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

  14. विनम्र श्रद्धांजलि !

  15. खेल नहीं होगा दोबारा….

  16. व्यथित कर गया जगजीत जी का जाना. श्रद्धान्जलि.

  17. श्रद्धांजलि

  18. i m verry sad to hear that news ,ab mai ek aisi awaz ko hamesha yad karungi jo dil tak dil ko sukun deti thi………………

  19. अपनी कलम की धार से हर किसी के दिल को छु जाते हैं, उन कंठों की धुन जो एक बार सुन लेने के बाद सालों एहसास रहता है | सलाम करते हैं उन लोगों को जो – ‘उठा ले कलम और लिख’ मोन स्वर में घुर्रा कर कह जाते हैं साबाश ! जगजीत जी

    हमारे ब्लॉग को भी समय- समय पर सम्हालते रहेने की गुहार लगता हूँ |

    http://www.sukhdevkarun.wordpress.com

  20. good words for all of us. Impermanence _/|\_ thank you for sharing!

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