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चूहा और किताबें : Mouse and Books

यह छोटी सी कहानी पाउलो कोएलो के ब्लौग से ली गयी एक पोस्ट का अनुवाद है. यह स्पष्ट नहीं है  कि यह पाउलो कोएलो का निजी संस्मरण है या उन्हें किसी अन्य पाठक द्वारा भेजी गयी कहानी.

जब मैं डॉ. एरियास के अस्पताल में इंटर्नशिप कर रहा था तब मुझे अचानक ही पैनिक अटैक (घबराहट के दौरे) होने लगे.

एक दिन मैंने अस्पताल के ही एक मनोचिकित्सक से इस विषय पर सलाह ली. मैंने डॉ. से कहा, “अज्ञात भयों ने मुझे आक्रांत कर दिया है. मेरे जीवन से सारी ख़ुशी और आनंद चला गया है”.

डॉ. ने कहा, “मेरे कमरे में एक चूहा है जो मेरी किताबें कुतर देता है. पहले वह मेरे लिए परेशानी का बहुत बड़ा सबब था. ज़िंदगी भर तो मैं उसके लिए शिकंजे नहीं लगा सकता था.”

“जब मैं सारे उपाय आजमाकर हार गया तो मैंने अपनी कीमती और ज़रूरी किताबों को लोहे की अलमारी में बंद कर दिया और उसके कुतरने के लिए बेकार किताबें छोड़ दीं.”

“इस तरह वह एक चूहा ही बनकर रह गया और किसी दानव में तब्दील नहीं हो सका”.

“तुम भी सिर्फ चंद बातों से ही डरो और उन पर ही अपने भय को केन्द्रित रहने दो ताकि दूसरी बातों के लिए तुममें हिम्मत बनी रहे.”

(~_~)

In 1967,When I was interned in Dr. Eiras Mental Institution (yes, I was considered to be a lunatic), I began to have panic crises. One day, I decided to consult the psychiatrist in charge of my case:

“Doctor, I am overcome by fear; it takes from me the joy of living”.

“Here in my office there is a mouse that eats my books”, said the doctor.

“If I get desperate about this mouse, he will hide from me and I will do nothing else in life but hunt him.

“Therefore, I put the most important books in a safe place and let him gnaw some others.

“In this way, he is still a mouse and does not become a monster.

“Be afraid of some things and concentrate all your fear on them – so that you have courage in the rest.”

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11 Comments Post a comment
  1. अनन्य शिक्षा!! भय को भी वर्गीकृत करें,मेनेज करें, और अनुकूल बनाएँ। एक अद्भुत विचार्।

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    June 3, 2011
  2. प्रवीण पाण्डेय #

    अधिकतम भय सोच लें और उसके बाद जो विश्व शेष बचता है, वहाँ से जीना प्रारम्भ कर दें।

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    June 3, 2011
  3. ajit gupta #

    बहुत अच्‍छी सीख।

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    June 3, 2011
  4. सोच को दूसरी दिशा में मोड़ दें,तो उसे कम किया जा सकता है !फिर भी, एक तरीका सब पर लागू नहीं हो सकता !

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    June 3, 2011
  5. अपनी सुख-खुशी का रास्ता आप को खुद ही खोजना है …

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    June 3, 2011
  6. बेकार किताब चुनने में ही अक्‍सर जीवन बीत जाता है.

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    June 3, 2011
  7. बेहतर बात…

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    June 3, 2011
  8. “तुम भी सिर्फ चंद बातों से ही डरो और उन पर ही अपने भय को केन्द्रित रहने दो ताकि दूसरी बातों के लिए तुममें हिम्मत बनी रहे.”

    जीने का मंत्र …

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    June 5, 2011
  9. बुरे लोग एक ही जगह रहे तो अच्छा

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    June 13, 2011
  10. kuch kami si hai.kahi par .

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    June 15, 2011
  11. किससे डरें?

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    July 28, 2011

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