Skip to content
About these ads

सीखते रहें…

कभी-कभी छत पर बनी सिंटेक्स की टंकी की हालत जांचने के लिए ऊपर चढ़ना पड़ता है. इसमें दिक्कत यही है कि ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ नहीं बनाई गयीं हैं और बांस की बनी नसैनी की मदद लेनी पड़ती है. इस नसैनी की हालत खस्ता है और कुछ पायदान भी गायब हैं. बीच के पायदानों के बांस चटक गए हैं और उनको थामनेवाली कीलें जंग से कमज़ोर हो चलीं हैं. इस नसैनी का उपयोग करना बेहद खतरनाक है. पैर रखने पर यह कभी भी भसक सकती है और चढ़ने/उतरनेवाले को बड़ी चोट आने की पूरी संभावनाएं हैं फिर भी मैं अमूमन दो-एक महीने में एक बार तो इसका उपयोग बेखटके करता आ रहा हूँ.

ऐसा ही कुछ मैं बहुत सी दूसरी चीज़ों के साथ भी करता हूँ. कई दफा पुराने दफ्तर की लिफ्ट अटक जाने पर उसे ताक़त लगाकर खोलता था और दो तलों के बीच से निकलकर बाहर आ जाता था. जानता हूँ कि ऐसे काम बेहद खतरनाक हैं पर दिल बहुत से खतरे उठाने की इज़ाज़त बेहिचक दे देता है. दिल कहता है, “अभी तो मैं जवान हूँ, मुझे किसी चीज़ से खौफ़ खाने की क्या ज़रुरत है!?”

मैं नयी चीज़ें करने से नहीं कतराता. कुछ नहीं जानते हुए भी मैंने कम्प्यूटर और बहुतेरी मशीनों को खोलकर देखा और दुरुस्त करके ही दम लिया. करेंट तो मुझे इतनी बार लग चुका है कि इसका कोई हिसाब ही नहीं है. जब छोटा था तब आठ-नौ सीढ़ियाँ एक साथ कूदकर उतरने में अपनी शान समझता था. अभी कुछ दिनों पहले ऐसा करके देखा तो समझ में आ गया कि ऐसे ‘करतब’ मुझे अब शोभा नहीं देते. इसके बावजूद मैं ऐसी बहुत सी चीज़ें करके देखता हूँ जिनमें मुझे चोट लगने का अंदेशा होता है. जितने ज्यादा मैंने खतरे उठाये हैं उतना अधिक ही मैं चीज़ों को और दुनिया को समझ पाया हूँ. खतरे उठाने से मेरा मतलब है नपे-तुले रिस्क के साथ नए काम करके देखना. गाड़ी मैं बहुत सावधानी से चलाता हूँ. कभी हड़बड़ी नहीं करता और मध्यम गति पर ही वाहन चलाता हूँ क्योंकि यह मेरे और सभी के हित में है.

खैर… खतरे उठानेवाले बहुत से काम हम सभी अपने बचपन में करते थे. पेड़ों पर चड़ना, झाड़ियों में घुसना, अंगारों से खेलना, खंडहरों में घुस जाना – कुछ तो कौतूहलवश और कुछ जोश में आकर हम खुद को खतरे में डालकर भी नया सीखते थे.

बड़े होनेपर हमने यह सब करना बंद कर दिया. इसके पीछे कई कारण थे. सबसे बड़ी वज़ह तो यह थी कि हमें सिद्धांततः बहुत सी बातें समझ में आने लगीं इसलिए उन्हें आजमा कर परखने की ज़रुरत ख़त्म हो गयी. एक और अहम वज़ह यह भी रही कि हर चीज़ को करके देखने के लिए हमने जितने दर्द सहे उनके एवज में हमें कुछ कीमती चीज़ नहीं मिली. नतीज़तन, हम अपना बचाव करना सीख गए.

इस सबसे एक नुकसान हुआ – हम तो खुद को महफूज़ रखने में कामयाब रहे पर खतरे उठानेवाले फायदे में रहे. जिन व्यक्तियों ने यथास्थितिवाद को उचित माना उनकी दुनिया वहीं थम गयी. मुश्किल तो यह है कि वे समझ ही नहीं पाते कि दूसरे उनसे आगे क्यों निकल गए. यहाँ मैं यह स्पष्ट कर दूं कि दूसरों से आगे निकलने के मेरे मापदंड कुछ अलग हैं. मैं उस व्यक्ति को दूसरों से आगे मानता हूँ जो हर पल कुछ-न-कुछ सीखता और आतंरिक विकास करता रहता है. दूसरों से ज्यादा कमाई करना या अधिक धन जुटा लेना आगे बढ़ने या बड़े होने का बड़ा लचर पैमाना है.

इस तरह मैं अपनी दुनिया को हमेशा घूमती-डोलती देखना चाहता हूँ. मैं अपनी नौका किनारे के खूंटे से बंधी नहीं देख सकता. किसी बड़े आदमी ने कहा भी है कि “नौकाएं किनारे पर सबसे सुरक्षित होती हैं पर नौकाओं को इसलिए नहीं बनाया जाता”. आप भी अपनी नौका को किनारे पर कूड़ा-कचरा भरता नहीं देखना चाहेंगे.

ग्रीक दार्शनिक अनाक्सागोरस ने कहा था, “हांथों की उपस्थिति के कारण ही मनुष्य सभी प्राणियों में सर्वाधिक बुद्धिमान है”. चीज़ों को बेहतर तरीके से उठाने और थामने की हमारी योग्यता हमें अपने परिवेश में सबसे आगे रखती है. अपने अंगूठे और उँगलियों की मदद से हम दाना चुनने से लेकर हथौड़ा पीटने जैसे काम बखूबी अंजाम देते हैं और हमारा दिमाग इस तथ्य को जानता है कि हमें कौन सा काम किस तरह करना है. अपने दिमाग को प्रशिक्षित करने के लिए हमें बचपन से ही विविधतापूर्ण काम करके देखने चाहिए.

कुछ भी नया करते समय भीतर से भय का स्वर उठता है. इस भय का सामना करना किसी भी उम्र में सीखा जा सकता है. खुद को यह बार-बार कहने की ज़रुरत है, “हाँ, मुझे चोट लग सकती है पर एक बार करके देखने में क्या हर्ज़ है?”, “इसे करके देखना चाहिए”, “यह इतना मुश्किल भी नहीं लगता कि मैं कर न सकूं”, “करके देखते हैं, ज्यादा-से-ज्यादा नाकामयाब ही तो रहेंगे!”

मेरे दोनों बच्चे दिए की लौ छूने के चक्कर में उंगलियाँ जला चुके हैं. बेटे ने तो एक बार सब्जी मार्केट में गैस बत्ती की रक्त-तप्त जाली को ही पकड़कर मसल दिया. दोनों ने ऐसे कई काम कई बार किए और उन्हें चुप कराने में हमें नानी याद आ गयी, लेकिन यह उनके लिए बड़ा सबक था. ढाई साल की बिटिया अब बहुत होशियार है और जलते दिए/मोमबत्ती/अगरबत्ती से दूरी बनाकर चलती है. बच्चों को बिस्तर से नहीं गिरने देने के हर संभव प्रयास करने के बाद भी अभी भी कोई-न-कोई किनारे से टपक जाता है. एक मिनट का रोना, कभी तो झूठमूठ कर, फिर वही धमाचौकड़ी चालू. पहले तो मैं इन चीज़ों से बहुत घबरा जाता था पर अब यह जान गया हूँ कि गिरना-पड़ना-जलना उनकी विकासयात्रा का अनिवार्य चरण हैं, बस इनकी पुनरावृत्ति न हो और हमेशा अहतियात बरता जाए.

हम मनुष्य सभी प्राणियों में सर्वाधिक तेजी से सीखते हैं. अपनी गलतियों से सबक लेने में हमें महारत हासिल है. हमने अपनी भौतिक सीमाओं का अतिक्रमण करना सीख लिया है, केवल मानसिकता ही हमें अक्सर पीछे धकेल देती है. प्रयोगधर्मिता मनुष्यों का बहुत महत्वपूर्ण गुण है. यही सफल व्यक्ति को असफल से पृथक करता है. दफ्तर में पिछले दस सालों से काम करने के नाते मैं जानता हूँ कि जो व्यक्ति प्रयोगधर्मी होता है वह कार्यकुशल भी होता है और अपने कार्य का बेहतर निष्पादन करता है. यह बात और है कि ऐसे व्यक्ति पर और अधिक कार्य लाद दिया जाता है और वह बहुधा अपने काम के साथ-साथ कुछ निठल्लों का काम भी निपटाता रहता है लेकिन इस मुद्दे पर बात करना विषयांतर हो जाएगा :)

तो, सारी बात का लब्बोलुआब यह है कि नए प्रयोग और नयी चीज़ें करके देखते रहना हमें आगे ले जाता है और यथास्थितिवादी बने रहना जड़ बना देता है.

लौटा लाइए अपने भीतर अपना बचपन… जब आप जिज्ञासा एवं ऊर्जा से भरपूर थे और कुछ भी नया देखने-करने के लिए आपको किन्हीं प्रेरक पोस्टों की ज़रुरत नहीं पड़ती थी.

डिस्क्लेमर : जानबूझकर खतरे मोल न लें और अपने बच्चों को खतरनाक चीज़ों से दूर रखें. मैं सीढ़ी का सुरक्षित विकल्प तलाश रहा हूँ ;)

आज मेरा जन्मदिन है :D

About these ads
32 Comments Post a comment
  1. वाह! क्या बात है! जन्मदिन मुबारक! :)

    Like

    May 10, 2011
  2. जन्‍मदिन मुबारक. क्‍लच, ब्रेक, एक्‍सीलेटर और आगे-पीछे गेयर, सभी जरूरी.

    Like

    May 10, 2011
  3. बार-बार दिन ये आये … शुभ हो!

    Like

    May 10, 2011
  4. यह लेख पिछले लेख से बेहतर जहां आप अपने बचपन को भूल गये थे। शायद इसलिये कि आज आपका जन्ददिन है – बधाई।

    Like

    May 10, 2011
  5. लगता है हमरी पिछ्ली टिप्पणी गायब हो गयी – सो एक बार फिर, जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

    Like

    May 10, 2011
  6. ajit gupta #

    भाई निशान्‍त सबसे पहले तो जन्‍मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। हमेशा की तरह श्रेष्‍ठ आलेख। बचपन में हम कई काम ऐसे कर लेते थे, जो आज नहीं कर पाते। उसमें एक कारण यह भी है कि तब हम उस परिणाम के डर से वाकिफ नहीं थे लेकिन आज हैं। हमारा यही डर हमें ऐसे काम नहीं करने देता। नाव का उदाहरण आपने अच्‍छा दिया है, नाव तट पर बांधने की चीज नहीं है। सही है, प्रयोग करते रहने चाहिए, कहीं ठहराव नहीं होना चाहिए। मेरी शुभकामनाएं।

    Like

    May 10, 2011
  7. १.नसैनी – बहुत दिनो बाद इस शब्द को सुना, हम लोग ’सीढी’ ही प्रयोग करते है लेकिन मम्मी ’नसैनी’ ही बोलती है।
    २. भसक सकती है: ’भसकना’ ये हमारे कालेज के जमाने मे बहुत उपयोग होता था, संदर्भ दिया है, ज्यादा जानकारी नही देंगे!

    खतरे मोल लेने के लिए इंसान कभी बुढा़ नही होता है! मै आजकल स्केटबोर्ड सीख रहा हूं! दो बार घुटने छीले, अब घुटने का हेलमेट ले आया हूं!

    जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

    Like

    May 10, 2011
  8. प्रवीण पाण्डेय #

    जटिलताओं से जूझना और उसे सरल बना लेना ही जीवन है। जन्मदिन की अतिशय बधाईयाँ।

    Like

    May 10, 2011
  9. G Vishwanath #

    जलदी में टिप्पणी लिख रहा हूँ।

    १)जन्मदिन मुबारक हो
    २)इस उम्र में स्टन्टमैन बनने की कोशिश छोडिए। बातला सीढी खरीदिए। घर के अन्दर भी काम आएगी।
    ३)हाँ, किसी भी उम्र में कुछ नया सीखते रहिए। मैं भी सीखता रहता हूँ और मुझे स्वयं मेरी उम्र की याद रह्ती नहीं। पिछली बार जब याद किया था, मेरी उम्र सिर्फ़ ६२ थी। आजकल Apple Ipad 2 खरीदने के बारे में सोच रहा हूँ। इस आशा से कि खरिदते ही मरे मन की आयु कम से कम तीस साल और कम हो जाएगी।

    कुछ दिनों के लिए अवकाश चाहता हूँ।
    कई सालों बाद अमरीका से मेरी बेटी और दामाद आ रहे हैं।
    समय मिलने पर मित्रों के ब्लॉग पढता रहूंगा, पर टिप्प्णी शायद नहीं कर पाऊंगा।
    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

    Like

    May 10, 2011
  10. Ashish #

    निशांत जी,

    हमेशा की तरह अच्छा लिखा है ,
    जन्मदिन की बहुत साडी बधाइयाँ ,ऐसा ही लिखते रहे |
    शुभकामनाये

    –आशीष

    Like

    May 10, 2011
  11. अपने बचपन के दिन याद आ गये !
    सीखने को “नसैनी” शब्द इस उम्र में सीखा !सिखाने का आभार !

    जन्म-दिन की आप को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ !
    आप अपने हर अच्छे सोचे काम में कामयाबी पायें !

    आप को आप के बच्चों सहित
    आशीर्वाद ! खुश और स्वस्थ रहें |

    Like

    May 10, 2011
  12. happy birth day to you ,my dear brother.

    Like

    May 10, 2011
  13. Abhishek #

    Happy Birthday Sir … May God bless you always…

    Like

    May 10, 2011
  14. BHAGAT SINGH PANTHI #

    मेरे दोनों बच्चे दिए… हमेशा अहतियात बरता जाए. same situation at my home

    मैं अपनी नौका किनारे… भरता नहीं देखना चाहेंगे.
    same situation with me with co-worker in office.

    कुछ भी नया करते समय… नाकामयाब ही तो रहेंगे!”

    मै हमेशा नाकामयाब ही रहता हूँ, जब भी मै कोई नया पैसा कमाने तरीका APPLY करता हूँ

    Like

    May 10, 2011
  15. Ritesh Seth,Handia,Allahabad #

    बहुत भाषण पेला थे यार…

    Like

    May 10, 2011
  16. kshitij Sharma #

    very nice lesson to all. thank u sir & wish u a very happy birthday

    Like

    May 10, 2011
  17. खैर… खतरे उठानेवाले बहुत से काम हम सभी अपने बचपन में करते थे. पेड़ों पर चड़ना, झाड़ियों में घुसना, अंगारों से खेलना, खंडहरों में घुस जाना – कुछ तो कौतूहलवश और कुछ जोश में आकर हम खुद को खतरे में डालकर भी नया सीखते थे.
    बड़े होनेपर हमने यह सब करना बंद कर दिया.
    ..umra ka takaja hota hai n!
    bahut badiya prastuti..
    Janamdin kee bahut bahut haardik shubhkamanyen..

    Like

    May 10, 2011
  18. जो बात सबसे पहले कहनी थी वह आपने सबसे अंत में कही….

    जन्मदिवस की अनंत शुभकामनाएं…

    बचपन में मैं बहुत अधिक प्रोटेक्टिव रही…पर मैंने अपने बच्चे को अधिकाधिक अनुभव करने दिया…सीखने समझने दिया और आज मुझे गर्व है कि वह मेरी तुलना में बहुत अधिक हिम्मती है…

    आपकी बातों से मैं शत प्रतिशत इत्तेफाक रखती हूँ….

    Like

    May 10, 2011
  19. नये का प्रयोग तो अंत तक चलना चाहिये!
    और बहुत बहुत बधाई निशांत!

    Like

    May 10, 2011
  20. इतनी भूमिका के बाद जन्मदिन की बात. हम अंत तक न पढ़ते तो :)
    हैपी बड्डे !

    Like

    May 10, 2011
  21. जन्‍मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं.

    Like

    May 10, 2011
  22. जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

    …..और तो सब सही ही कहा आपने !

    Like

    May 11, 2011
  23. जन्मदिन मुबारक!
    प्रेरक आलेख।

    Like

    May 11, 2011
  24. .
    .
    .
    “तो, सारी बात का लब्बोलुआब यह है कि नए प्रयोग और नयी चीज़ें करके देखते रहना हमें आगे ले जाता है और यथास्थितिवादी बने रहना जड़ बना देता है.
    लौटा लाइए अपने भीतर अपना बचपन… जब आप जिज्ञासा एवं ऊर्जा से भरपूर थे और कुछ भी नया देखने-करने के लिए आपको किन्हीं प्रेरक पोस्टों की ज़रुरत नहीं पड़ती थी.”

    पर बचपन वापस आयेगा कैसे मित्र ? बार बार मैं कोशिश करता हूँ समय को रोकने की पर वह है कि मुठ्ठी में भरे पानी जैसे फिसल कर गिर रहा है मेरे हाथ से हर पल… मुझे तो लगता है कि एक ही तरीका है मेरे लिये अपने बचपन को वापस लौटा लाने का… अपनी बेटियों के साथ-साथ जीऊँ उसे, एक बार फिर…

    जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनायें !

    Like

    May 11, 2011
  25. यही जद्दोज़हद है जिसे जीवन कहते हैं…… सुंदर पोस्ट

    जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें

    Like

    May 12, 2011
  26. surender #

    आपके विचारो को जानकर बहुत ही अच्छा लगा!

    Like

    October 8, 2011
  27. निशांत जी जन्म दिन की बहुत -२ शुभकामनाये..
    आज कल के समय में ऐसे शब्द पूरी तरह से समाप्त हो रहे है जैसे :- नसेनी आदि.
    इस पोस्ट के धन्यवाद् ..
    अजय शुक्ला

    Like

    December 16, 2011
  28. shaksi jaat #

    happy bith day

    Like

    December 17, 2011
  29. shaksi jaat #

    like.

    Like

    December 17, 2011
  30. ARVIND #

    DER SE HI SAHI , AAJ PADHNE KO MILA . BADHAI, AAP KI KALM KO AUR VARSHGANTH KI AGRIM BADHAI

    Like

    July 4, 2012
  31. Shadab #

    Not bad

    Like

    January 2, 2013

Trackbacks & Pingbacks

  1. थोड़ा एनिमल फार्म पढ़ा थोड़ा हैरी पॉटर : चिट्ठा चर्चा

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 3,509 other followers

%d bloggers like this: