आदतों से छुटकारा : सफलता की सीढ़ी

यह पोस्ट मेरे प्रिय ब्लौगर लियो बबौटा की एक पोस्ट का अनुवाद है जिसमें हमेशा की तरह मैंने मामूली फेरबदल किये हैं. मूल अंग्रेजी पोस्ट पढ़ने के लिए आप यहाँ क्लिक करें.

बहुत से लोग अपने जीवन के बहुत से पक्षों में इतना फेरबदल करना चाहते कि उन्हें समझ में ही नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से करें.

यह मुश्किल जान पड़ता है: लोग अपनी जीवन शैली में सुधार लाना चाहते हैं. वे चाहते हैं कि उनकी कुछ आदतें जैसे स्मोकिंग करना और जंक फ़ूड खाना नियंत्रित हो जाएँ, वे बेहतर तरीकों से काम कर सकें, उनके खर्चे सीमा में हों, उनके जीवन में सरलता-सहजता आये, उन्हें परिवार के साथ समय व्यतीत करने को मिले, वे अपने शौक पूरे कर सकें…

लेकिन शुरुआत कहाँ से करें?

यह मुश्किल नहीं है – पांच साल पहले मेरी हालत भी ऊपर जैसी ही थी. एक-एक करके मैंने अपनी आदतें बदलीं.:

* मैंने स्मोकिंग छोडी (और बाद में तो मैंने कई मैराथन दौड़ भी पूरी कीं).
* स्वास्थ्यकर भोजन अपनाया (अब मैं पूर्णतः शाकाहारी बन गया हूँ).
* कर्जे से मुक्ति पाई और पैसे बचाए (अब मुझे धनाभाव नहीं है).
* अपने जीवन को सरल-सहज बनाया.
* वह काम किया जो मुझे प्रिय है.
* सुबह जल्दी उठना शुरू किया और रचनात्मकता बढ़ाई.

यह लिस्ट और भी लंबी हो सकती है. मैं कोई डींगें नहीं हांक रहा हूँ बल्कि यह बताना चाहता हूँ कि यह सब संभव है. यह सब मैंने छः बच्चों के पालन-पोषण के साथ और तीन अलग-अलग तरह के काम करते हुए किया (जिसमें मुझे मेरी पत्नी इवा की भरपूर मदद मिली).

आप लोगों में से कई मेरे हालात से गुज़र चुके होंगे. मेरे एक पाठक क्रेग ने मुझे बताया:

“मानसिक, शारीरिक, और आर्थिक तौर पर पिछले पांच-सात साल मेरे लिए नर्क की तरह रहे हैं. उसके पहले मैं आत्मविश्वास से लबरेज खुशनुमा आदमी था और जो चाहे वह कर सकता था. मुझे नहीं पता कि मेरी ज़िंदगी किस तरह से ढलान पर आ गयी पर अब मैं अपना आत्मविश्वास खो चुका हूँ. मैं तनाव और चिंताओं से बोझिल हूँ. मेरा वजन लगभग 15-20 किलो बढ़ गया है. दिनभर में एक पैकेट सिगरेट फूंक देता हूँ. सच कहूं तो मैं अब खुद को आईने में देखना भी पसंद नहीं करता.”

आगे वह लिखता है:

“रोज़ सबेरे पेट में कुलबुलाहट के साथ ही मेरी नींद खुलती है और मुझे लगता है कि आज का दिन बुरा गुजरेगा. मैं अक्सर देर से सोता हूँ और सुबह उनींदा महसूस करता हूँ. इन मुश्किलों से निबटने के लिए मैंने हर तरह की चीज़ें करके देखीं पर कुछ काम नहीं बना. मैं बस यही चाहता हूँ कि कम-से-कम मेरे दिन की शुरुआत की कुछ बेहतर हो जाए”.

फिर उसने मुझसे सबसे ज़रूरी प्रश्न पूछा: “आपने अपने जीवन को रूपांतरित करने के लिए 2005 में इतने बड़े बदलाव कैसे कर लिए? आपने सुबह जल्दी उठकर सकारात्मत्कता के साथ अपने दिन की शुरुआत करना कैसे सीखा?”

वर्ष 2005 में मैं ज़िंदगी के बुरे दौर से गुज़र रहा था और अपने जीवन में इतने सारे बदलाव कर रहा था कि मैं उनमें उलझ कर रह गया. इस सबसे मन में बड़ी गहरी हताशा घर कर रही थी.

फिर मैंने (इवा से शादी करने के अलावा) अपने जीवन का एक बेहतरीन निर्णय लिया.

मैंने सिर्फ एक ही आदत का चुनाव किया.

बाकी आदतें पीछे आतीं रहीं. एक ही आदत को ध्येय बनाकर शुरुआत करने के ये चार परिणाम निकले.

1. एक आदत को ढाल पाना मेरे बस में रहा. एक आदत विकसित की जा सकती है – 15 आदतों को बदलने का प्रयास करना कठिन है.

2. इससे मैं एक जगह फोकस कर सका. मैं अपनी समस्त ऊर्जा को एक जगह लगा सका. जब आप बहुत सी आदतें एक-साथ बदलना चाहते हैं तो वे एक-दूसरे में उलझकर आपकी ऊर्जा नष्ट करतीं हैं और आप असफल हो जाते हैं.

3. इससे मुझे यह भी पता चला कि आदतों को कैसे बदला जाता है – और इस ज्ञान को मैं दूसरी आदतें बदलने में प्रयुक्त कर सका.

4. इसमें मिली सफलता से मैंने अपनी ऊर्जा और उत्साह को अगली चीज़ हासिल करने में लगाया.

ऊपर कही गयी बातों में प्रत्येक का बहुत महत्व है. मैं पहली तीन बातों के विस्तार में नहीं जाऊंगा क्योंकि मुझे लगता है कि वे स्वयं अपने बारे में बहुत कुछ कह देतीं हैं. चौथा बिंदु इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण है और इसपर कुछ चर्चा की जा सकती है (नीचे पढ़ें).

कौन सी आदत चुनें?

मैंने सबसे पहले स्मोकिंग छोड़ने के बारे में सोचा क्योंकि मेरे लिए यह सबसे ज्यादा ज़रूरी था. आज पीछे मुड़कर देखने पर लगता है कि इस आदत को बदलना वाकई सबसे ज्यादा कठिन था. मैं सभी को यह सलाह दूंगा कि सबसे पहले उस आदत को बदलने की सोचें जिससे बाहर निकलना सबसे आसान हो.

लेकिन सच तो यह है कि इस बात का कोई ख़ास महत्व नहीं है. यदि अप अपनी 15 आदतों को बदलना चाहते हों और वे सभी एक समान महत्वपूर्ण हों तो उनमें से किसी का भी चुनाव randomly किया जा सकता है.

लंबी योजना में इस बात का अधिक महत्व नहीं है कि आपने किस चीज़ से शुरुआत की. आज से पांच साल बाद आप पलटकर देखेंगे तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि आपने किन आदतों को बदलने से शुरुआत की थी. अभी आपको यह बात ज़रूरी लगती है पर सवाल आपने एक महीने भर का नहीं है – यह आपके पूरे जीवन की बेहतरी के लिए है.

कोई एक आदत चुन लें. कोई सी भी. कोई आसान सी चुन लें. बात सिर्फ इतनी है कि आप शुरुआत भर कर दें.

सफलता की सीढ़ियाँ

एक आदत का चुनाव कर लेने से उसे आधार बनाकर स्वयं में महत्वपूर्ण और दूरगामी परिवर्तन किये जा सकते हैं. यदि आपने इसके बारे में पहले नहीं सोचा है तो यह समय बहुत महत्वपूर्ण है. आपको इस क्षण स्वयं को टटोलना शुरू कर देना चाहिए. आप परिपूर्ण नहीं हैं. यदि आप प्रयास करेंगे तो आप अपने भीतर उन कमियों या खामियों को खोज सकेंगे जिनके निराकरण से आपके जीवन में बेहतर बदलाव आयें.

90 के दशक में मैंने बिल गेट्स की एक किताब पढ़ी थी जिसमें उसने अपनी ‘सफलता की सीढ़ियों’ के बारे में लिखा है. उसने MS-DOS बनाया और उसकी सफलता को आधार बनाकर MS-Word और फिर विन्डोज़, फिर विन्डोज़ 95, फिर एक्सेल, ऑफिस, इंटरनेट एक्स्प्लोरर… और भी बहुत कुछ (यह क्रम गड़बड़ हो सकता है पर उसकी बात गैरज़रूरी है)

मैं बिल गेट्स का कोई फैन नहीं हूँ लेकिन उसका परखा और सुझाया गया सिद्धांत न केवल बिजनेस में बल्कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में लागू किया जा सकता है और वह यह है कि एक आदत बदलने से मिलनेवाली सफलता से आप शानदार अनुभव करेंगे. आप इससे इतने उत्साह में डूब जायेंगे कि आप फ़ौरन दूसरी आदत से पीछा छुड़ाने की सोचेंगे. यदि शुरुआत में आपने अपना ध्यान केवल एक ही आदत पर केन्द्रित रखा तो आपको आगे और भी सफलता मिलेगी और आप और आगे बढ़ते चले जायेंगे.

फिर जल्द ही आप शिखर पर होंगे और लोग आपसे पूछेंगे कि आपने यह कैसे किया. तब आप मेरा नाम नहीं लेना पर बिल गेट्स के बारे में ज़रूर बताना क्योंकि उसका अहसान चुकाना बहुत ज़रूरी है:)

About these ads

22 Comments

Filed under प्रेरक लेख

22 Responses to आदतों से छुटकारा : सफलता की सीढ़ी

  1. बहुत अच्छी बातें हैं। अमल में लाने लायक!

  2. arvind mishra

    मैं आज तक यह फैसला नहीं कर पाया कि इस तरह के लेखन का वैश्विक साहित्य में स्थान क्या है या फिर इनसे कितने लोगों के जीवन में वास्तव में सकारात्मक परिणाम आये -ऐसा कोई अध्ययन आपकी निगाह से गुजरा हो निशात भाई तो जरुर बताएं …नहीं तो ऐसे अध्ययनों की आवश्यकता है -अगर किताबी लेखन से ही लोगों के चाल चेहरे और चरित्र बदलते होते तो भारत संतों का देश होता ….यहाँ जितने सुनहले नियम हैं शायद ही विश्व में कही और संहत रूप में मिलेगें -ये सुनने पढने में में तो बहुत आकर्षक लगते हैं मगर इनका वैयक्तिक अंगीकरण इतना सहज नहीं है -मनुष्य कोई पेट नहीं है जिसे आसानी से ट्रेन किया जा सके !

    • आपकी बात को ध्यान में रखकर खोजबीन करूंगा. कहीं पढ़ा भी है की इन बातों का कोई खास असर नहीं होता. लेकिन यदि आप धर्म को ही कसौटी पर कसें तो कितने ही लोग मिलेंगे जो आज भी धर्मपरायण होने के कारण अनीतिपूर्ण काम करने से बचे रहते हैं. इस बात के भी शायद अनगिनत उदाहरण होंगे की प्रेरक वचनों और व्यक्तियों से प्रेरणा लेकर न जाने कितने लोग राजनीति, साहित्य, बिजनेस और विज्ञान आदि के क्षेत्र में सफलता की चोटी पर पहुंचे.
      एक उदाहरण तो मैं ही हूँ. दुनियावी नज़र से आप मुझे बेहद सफल व्यक्ति की कोटि में नहीं रखेंगे – अव्वल तो सफलता और ख़ुशी व्यक्ति सापेक्ष होती है, सबके लिए इनकी परिभाषा और इन्हें पाने के तरीके पृथक हैं. खैर, खुद के बारे में कहूं तो मैं कोई परफेक्ट व्यक्ति नहीं हूँ और मेरा चरित्र अनुकरणीय नहीं है पर अपने 36 साल के जीवन में मैं बहुत सी बुराइयों और बेवकूफियों में पड़ चूका हूँ और उनसे सबक लेकर आगे बढ़ा हूँ. यदि मैं अपने जीवन में ज्यादा जोश में होता तो शायद आज कहीं बड़ी कुर्सी या बड़े प्रतिष्ठान का स्वामी होता पर मैंने संतुष्टि को अपने जीवन का ध्येय बनाया. और कौन जाने भविष्य में क्या लिखा है. जीवन कब किस राह पर ले जाए उसका कोई ठिकाना नहीं. इसलिए, चलते रहें आगे ध्यान से देखते हुए.

  3. प्रवीण पाण्डेय

    बहुत बड़ा सच है यह, एक बार में एक आदत को सुधार कर उसका पूरा लाभ जीवन में अपनाकर ही आगे बढ़ा जाये।

  4. अरविंदमिश्र जी,
    यह सही है कि इस तरह का लेखन हर किसी का जीवन नही बदल सकता लेकिन कुछ लोगो के जीवन मे परिवर्तन ला सकता है। यदि ये प्रतिशत १% भी है तब भी महत्वपूर्ण है।

    मै १२ वी तक अकादमिक रूप से काफी अच्छा था। इंजीनियरींग मे मनचाहे कालेज मे मनचाही ब्रांच मे प्रवेश भी मील गया। लेकिन उसके बाद मुझे डीग्री एक औसत छात्र के रूप मे मीली। कुछ कारणो से मैं रास्ता भटक गया था और निराश भी था !

    लेकिन बाद मे ऐसे ही एक दिन मैने स्टीवन कोवे की किताब ’सेवन हैबीट्स आफ हाइली इफ़ेक्टीव पीपल” पढी़।

    किताब ने मेरा नज़रिया बदला, मन से निराशा गयी ! आज मै जीस मुकाम पर हूं, संतुष्ट हूं। जो चाहता था, उसमे से बहुत कुछ पा लीया है, और पूरा विश्वास है कि जो शेष है वह भी पा लूंगा।

  5. बातें प्रेरक होती हैं, प्रेरणा देती हैं, लेकिन लोग उनसे प्रेरणा लें ऐसा कोई सहज नियम नहीं, अप्रिय-अवांछित से भी प्रभावी प्रेरणा ग्रहण की जाती है.

  6. arvind mishra

    निशात जी ,आशीष जी ,
    जी सहमत ,आपसे भी सुनना चाहता था …
    मनुष्य के मन पर इस साहित्य का गहरा प्रभाव पड़ सकता है ..
    इसलिए ही नैतिक शिक्षा पर जोर दिया जाता रहा है ..
    यह भी सही है मन के हारे हार है मन के जीते जीत…
    मगर यह भी सही है की कुछ लोगों पर ऐसे साहित्य का त्वरित और प्रभावी असर होता है और कुछ के लिए -
    मूरख ह्रदय न चेत जो गुरु मिले विरंचि सम ….
    पता नहीं मैं किस कटेगरी में हूँ :)
    आपकी एक बात से मेरी पूरी सहमती निशांत जी -आत्म संतोष से बढ़ कर दुनिया में और कोई वैभव नहीं है
    अब मैं ठहरा शुष्क विज्ञान का आदमी तो हर बात को ठोक बजा जांच परख कर समझने की आदत है …
    कुछ लोग मेरी इस जिज्ञासु प्रियता और प्रश्नाचार से चिढ जाते हैं … :) क्या मैं अपनी यह आदत सुधार लूं ?

  7. The Bitterness of Truth, makes me feel good. You even write the similar/same which is very good.

    Thanks ,

  8. Punama Ram Teacher, Barmer (Rajasthan)

    #Arvind Mishra,
    ———————-
    Sir,kalam vah kam kar deti he jo talvar nahi kar pati.

  9. very good sirji! padhakar kafi accha laga

  10. आज आलेख पर नहीं टिप्पणी पर मैं टिप्पणी देना चाहूंगी…किसी और का तो मैं नहीं जानती,पर मैं यह बताना चाहूंगी कि अच्छी सकारात्मक बातें पढ़,सुन कर, अच्छे लोगों से मिलकर मैंने अपने जीवन में महान परिवर्तन लक्ष्य किया है…मेरे विचार उदात्त हुए हैं,चरित्र और चिंतन निर्मल हुआ है और सुख संतोष अब मेरे पास अधिक मात्रा में है…

    इसलिए मैं मानती हूँ कि कोई यह भले कहे कि बड़ी बातें कह कर ,प्रवचन देकर सुनकर क्या होने वाला है,तो मैं इससे सहमत नहीं होउंगी…ठीक है कि लोग ऐसे आलेखों/विचारों का उपहास उड़ाते हैं,पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता..जिसे इसमें से जीवन के लिए उपयोगी शिक्षा लेनी है,वह लेगा ही…कोई एक व्यक्ति भी यदि इससे लाभान्वित होता है तो समझिये मकसद पूरा हुआ…

    बाकी लेख के विषय में क्या कहूँ…बस ह्रदय से आभार आपका….

    मुझे एक बात पर बड़ा अफ़सोस होता है…दुनिया में एक भी मनुष्य नहीं जो सुख की अभिलाषा नहीं रखता,पर अधिकांश को सुख के सात्विक स्रोतों से जुड़ने से परहेज होता है…नतीजा भटकाव,अतृप्ति नहीं होगा तो क्या होगा…

    • Amarjeet singh

      You are absolutely correct .Negative Person always look negative things so that they are made ,we should focus oneself and do not care genitive person .

      Amarjeet singh
      9019154215

  11. सकारात्मक उर्जा से भरा पोस्ट!

  12. प्रेरणादायक आलेख. आभार .

  13. Devendra asati

    आपके प्रेरक लेख के लिये बहुत-2 साधुवाद .

  14. साइट पर आकर कथा पढ़ने की आदत।

  15. Yah bataya jaye ki koee vi aik buri aadat ko chhorne ka system kya hoga. Mai vi aik aadat chhorna chahta hun. Please.

  16. आलोक रंजन

    Very useful g.Thanx.

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s