नसरुद्दीन अपने घर के बाहर रोटियों के टुकड़े बिखेर रहा था.
उसे यह करता देख एक पड़ोसी ने पूछा – “ये क्या कर रहे हो मुल्ला!?”
“शेरों को दूर रखने का यह बेहतरीन तरीका है” – मुल्ला ने कहा.
“लेकिन इस इलाके में तो एक भी शेर नहीं है!” – पड़ोसी ने हैरत से कहा.
मुल्ला बोला – “तरीका वाकई कारगर है, नहीं क्या?”
(इदरीस शाह की कहानी)


थोड़ा सा और प्रकाश डाल दें, पहेली कठिन है।
प्रवीण जी, मैं इस कथा की व्याख्या का दावा नहीं करता पर यहाँ मुझे लगता है कि पड़ोसी को मुल्ला द्वारा दिया गया उत्तर हम सभी के जीवन में जारी अनावश्यक हस्तक्षेप की और इंगित करता है.
are mulla ne socha ki roti dalne se pehle hi sher bhag gaye… matlab tarika kargar hai… itni si baat hai bas…
ab thoda dimag ka istemal karo….
बहुत बढ़िया था ! बरक़रार रखिये !
लगता है कहानी मे कहीं कुछ एक आध शब्द की कमी है। किस बात का तरीका ये समझ नही आया।
ये मुल्ला की पहेली और उनका तरीका है, सुलझेगा भी वैसे ही. प्रयास करता हूं.
‘मुल्ला ने बिरयानी की पाकविधि किसी से नोट कराई और गोश्त खरीद कर घर आने लगे. चील ने झपट्टा मारा और गोश्त ले उड़ा. मुल्ला ने कहा – नासमझ क्या करेगा गोश्त का, पाकविधि तो लेता जाता’.
??
पढकर एक पुराना चुटकुला याद आ गया।
एक अमरीकी नागरिक ने एक यहूदि से पूछा
“तुम लोग इतने होशियार कैसे बन गए?”
यहूदी ने कहा: “हम एक विशेष तेल का प्रयोग करते हैं और रोज सर पर लगाकर मालिश करते हैं। तुम चाहो तो एक शीशी तुम्हें बेच सकता हूँ।
अमरीके ने बडी खुशी से पैसे देकर तेल खरीदी।
दूसरे ही दिन वह वापस आकर यहूदी से कहा ” अरे यह तो केवल मूँगफ़ली का तेल है”
यहूदी ने जवाब दिया “देखा? एक ही दिन में तुम भी होशियार बनने लगे हो”
शुभकामनाएं
जी विश्वनाथ
जी, बिलकुल यही तरीका. आपने सही पकड़ा.
बेजा न मानें, एक छोटा प्रसंग और, शायद आशय स्पष्ट हो सके-
ट्रेन से उतर कर मुसाफिर ने कहा- आज मैंने पांच सौ रुपये बचा लिए. वह कैसे, पूछने पर जवाब मिला, जंजीर खींचने का जुर्माना पांच सौ रुपये लिखा था, हमने जंजीर नहीं खींची.
अच्छी बतकही चल रही है। हम भी ज्ञानी हुए जा रहे हैं।
हा हा हा हा…मजेदार….
दो मिनट के लिए स्थिर होकर सोचना pada, तब jaakar sira मिला…..
अक्ल- मंद है लगता है …. अक्ल +मंद
भगवान की कृपा देखें – मुल्ला नसीरुद्दीन जैसे के पास रोटी है बिखेरने को! वर्ना ऐसे अकलमन्द के पास कुछ होना आश्चर्य ही है!
Couldn’t undersatnd properly
it is not good because food no weast
Very good story. Roti daal kar sher ko dur rkkha.