अकलमंदी : Intelligence

नसरुद्दीन अपने घर के बाहर रोटियों के टुकड़े बिखेर रहा था.

उसे यह करता देख एक पड़ोसी ने पूछा – “ये क्या कर रहे हो मुल्ला!?”

“शेरों को दूर रखने का यह बेहतरीन तरीका है” – मुल्ला ने कहा.

“लेकिन इस इलाके में तो एक भी शेर नहीं है!” – पड़ोसी ने हैरत से कहा.

मुल्ला बोला – “तरीका वाकई कारगर है, नहीं क्या?”

(इदरीस शाह की कहानी)

(~_~)

Nasrudin was throwing handfuls of crumbs around his house.

“What are you doing?” someone asked him.

“Keeping the tigers away.”

“But there are no tigers in these parts.”

“That’s right. Effective, isn’t it?”

There are 18 comments

  1. प्रवीण पाण्डेय

    थोड़ा सा और प्रकाश डाल दें, पहेली कठिन है।

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    1. Nishant

      प्रवीण जी, मैं इस कथा की व्याख्या का दावा नहीं करता पर यहाँ मुझे लगता है कि पड़ोसी को मुल्ला द्वारा दिया गया उत्तर हम सभी के जीवन में जारी अनावश्यक हस्तक्षेप की और इंगित करता है.

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      1. saral jain

        are mulla ne socha ki roti dalne se pehle hi sher bhag gaye… matlab tarika kargar hai… itni si baat hai bas…
        ab thoda dimag ka istemal karo….

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  2. nirmla.kapila

    लगता है कहानी मे कहीं कुछ एक आध शब्द की कमी है। किस बात का तरीका ये समझ नही आया।

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  3. राहुल सिंह

    ये मुल्‍ला की पहेली और उनका तरीका है, सुलझेगा भी वैसे ही. प्रयास करता हूं.
    ‘मुल्‍ला ने बिरयानी की पाकविधि किसी से नोट कराई और गोश्‍त खरीद कर घर आने लगे. चील ने झपट्टा मारा और गोश्‍त ले उड़ा. मुल्‍ला ने कहा – नासमझ क्‍या करेगा गोश्‍त का, पाकविधि तो लेता जाता’.

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  4. G Vishwanath

    पढकर एक पुराना चुटकुला याद आ गया।
    एक अमरीकी नागरिक ने एक यहूदि से पूछा
    “तुम लोग इतने होशियार कैसे बन गए?”

    यहूदी ने कहा: “हम एक विशेष तेल का प्रयोग करते हैं और रोज सर पर लगाकर मालिश करते हैं। तुम चाहो तो एक शीशी तुम्हें बेच सकता हूँ।

    अमरीके ने बडी खुशी से पैसे देकर तेल खरीदी।
    दूसरे ही दिन वह वापस आकर यहूदी से कहा ” अरे यह तो केवल मूँगफ़ली का तेल है”

    यहूदी ने जवाब दिया “देखा? एक ही दिन में तुम भी होशियार बनने लगे हो”

    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

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  5. राहुल सिंह

    बेजा न मानें, एक छोटा प्रसंग और, शायद आशय स्‍पष्‍ट हो सके-
    ट्रेन से उतर कर मुसाफिर ने कहा- आज मैंने पांच सौ रुपये बचा लिए. वह कैसे, पूछने पर जवाब मिला, जंजीर खींचने का जुर्माना पांच सौ रुपये लिखा था, हमने जंजीर नहीं खींची.

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  6. Gyandutt Pandey

    भगवान की कृपा देखें – मुल्ला नसीरुद्दीन जैसे के पास रोटी है बिखेरने को! वर्ना ऐसे अकलमन्द के पास कुछ होना आश्चर्य ही है!

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