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ब्लॉगिंग से होनेवाले कुछ नायाब फायदे

ब्लौगिंग से फायदे तो होते ही हैं. इससे कुछ मिलता नहीं तो हम सब यहाँ अपना टाइम काहे खोटी करते? यहाँ नयी बातें पता चलती हैं, लिखने-पढ़ने की इच्छा पूरी होती है, टिप्पणियों के ज़रिये सराहना मिलती है, अच्छे पाठक और दोस्त मिलते हैं. बहुत कुछ लिखने और पढ़ने के दौरान हमें अपनी कमियों और खूबियों का पता भी चल जाता है. बहुत से ब्लौगर दीगर के फालतू कामों को करने से बचे रहते हैं, यह भी अच्छी बात है. कुछ के लिए ये थैरेपी की तरह है. रोज़मर्रा के तनाव और दुश्वारियों से लड़ते हुए वे उन्हें अपनी पोस्ट में उड़ेल देते हैं. एक बड़ी बिरादरी इसे मौजूदा व्यवस्था का विश्लेषण और इसका विरोध करने का बेहतरीन औज़ार बना चुकी है. ऐसी ही बातों के घालमेल से मैंने ब्लौगिंग से होनेवाले सबसे महत्वपूर्ण फायदों की ये लिस्ट तैयार की है. आप इसे पढ़कर बताएं कि आप इससे कितना इत्तेफाक रखते हैं. कुछ इजाफा कर सकें तो सोने पे सुहागा:

1. दिमागी खुराक पाने का बेहतरीन नुस्खा – मन में कुछ अटका रहे और बोझ में तब्दील हो जाये तो उसे उगल देना चाहिए. ये हमारी भड़ासी भाइयों का आजमाया हुआ नुस्खा है. दिमाग में कुछ चलता रहे और कोई राह नहीं सूझे तो मन बेचैन हो जाता है. फिर यह कभी-कभी हार मानकर हताशा में खुद को डुबो देता है. ऐसे में यदि आप ब्लौगिंग करने लगते हैं तो आप अपने मन के उन विचारों को दूसरों से साझा करने लगते हैं. आपको जब मौका मिलता है आप अपनी भावी पोस्ट की योजना में उस तत्व को शामिल कर लेते हैं और उसे अपनी नोटबुक में या डायरी में या पोस्ट के ड्राफ्ट के रूप में ही सेव कर लेते हैं. अपने जीवन पर आपकी निगाह कुछ पैनी हो जाती है. आपका ध्यान उन बातों की ओर जाने लगता है जिनको आप अपने लेखन में शामिल कर सकें. आप खुद में ही बने रहते तो आपके विचार भीतर ही भीतर गुम हो सकते थे. ब्लौगिंग के ज़रिये वे अब बाहर निकल चुके हैं, अब उन्हें दूसरों को झेलने दीजिये और आप अपनी अगली पोस्ट के लिए निगाह दौड़ाने लगें.

2.  दुनिया को देखने का नजरिया बदल जाता है – जैसा कि मैंने ऊपर बताया, एक सक्रिय ब्लौगर अपनी आँखें खुली रखने लगता है और अपने आसपास चल रही बातों पर पहले से ज्यादा ध्यान देने लगता है. चीज़ों की बारीकियां पकड़ में आती हैं और वर्तमान पर पकड़ मजबूत होती है. दो पोस्ट पहले मैंने खुद में आई जिस तब्दीली की बात की थी वह बहुतों को महसूस हुआ होगा. इंटरनेट पर यूंही कुछ करने की गरज से मैंने कहानियों के अनुवाद का जो काम हाथ में लिया था उसका मेरे ऊपर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ा. साथ ही मैंने पहली बार जीवन में अलग-अलग विषयों पर बहुत कुछ पढ़ा. हमारे नज़रिए में आनेवाला छोटा सा बदलाव भी जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकता है ऐसी मेरी मान्यता है. सकारात्मक परिवर्तन जीवन की गुणवता को बढाते हैं.

3. हम अकेले नहीं हैं भाई! – जब आप बेहतर महसूस नहीं करते तो आप खुद को अकेलेपन के हवाले कर देते हैं. जब आदमी अकेला होता है तो वह अवसाद की गिरफ्त में आ जाता है. किसी-किसी को यह भी लगने लगता है कि बाहर की दुनिया में हर कोई उससे बेहतर ज़िंदगी जी रहा है. ऐसी फ़िज़ूल की बातों और कल्पनाओं के फेर में पड़कर बहुतों को यह लगने लगता है कि ‘ये जीना भी कोई जीना है लल्लू!’

लेकिन एक बार जब आप अपने मन की बातें, अपने दुःख, सोच, चिंताएं, और अनुभूतियाँ दूसरों से बांटने लगते हैं तो आयेदिन आपका साबका ऐसे लोगों से होने लगता है जिनके पास आपसे भी ज्यादा संजीदा बातें शेयर करने के लिए हैं. दुनिया में बहुतेरे लोग आपसे भी ज्यादा बड़ी और विकराल मुसीबतों का सामना कर चुके हैं. यह बात आपको हर कभी पता चलने लगती है या आपकी परवाह करनेवाले आपके मित्र आपमें आशा का संचार करने के लिए आपसे सतत संपर्क में रहते हैं. ब्लौगरों के समूह बनते हैं, मित्रता फलती-फूलती है, आपको यह लगता है कि आपकी बात सुनी जाते है और लोग आपकी कद्र करते हैं. इसपर भी यदि आपको अच्छा नहीं लगता तो भैया आप तो कट लो यहाँ से! आपका केस क्लिनिकल है.:)

4.  अच्छे पाठक जिम्मेदारियों का अहसास दिलाते हैं – यदि आपने (गलती से भी) अपने पाठकों से कोई वादा या कोई दावा कर दिया तो अब आपको कोई नहीं बचा सकता! खुद को बचाने के लिए यदि आप पोस्ट को डिलीट भी कर देंगे तो आपके ‘सुधी’ पाठक उसे गूगल काश में से निकाल लेंगे. वैसे आजकल ‘जागरूक’ पाठक पोस्ट छपते ही उसका स्क्रीनशॉट भी ले लेते हैं ताकि आपको भविष्य में आपकी जिम्मेदारियों का अहसास दिलाया जा सके. इसीलिए कहता हूँ कि वही कहें या करें जिसके पर्याप्त आधार हों वरना अपने कहे से मुकरने या फिरने के लिए आपके पास कोई बहाना नहीं बचेगा.

आपके पाठक आपके चीयरलीडर्स और सपोर्टर हैं. हर बेहतर लिखनेवाले को अपने पाठकों की ख्वाहिशों को पूरा करना होता है. अपनी कही बातों से मुकरके या पोस्टें/टिप्पणियां डिलीट करके आप कहाँ जायेंगे? उनसे किये गए वादे निभाइए और शान से लिखिए-पढ़िए. ब्लॉगलेखन कोई अगंभीर बात नहीं है कि आप जो मन में आये वह कह दें. इस माध्यम की सुविधाएँ हैं तो कुछ जिम्मेदारियां भी हैं. कुछ हद तक, ब्लॉग लेखन अमर है और अच्छे-बुरे किसी भी विचार को यहाँ कॉपी-पेस्ट के जरिये फैलने में वक़्त नहीं लगता. मजाकिया हास्य-व्यंग्य भी अनुशासनपूर्ण लेखन की मांग करता है.

5. दूसरों की मदद करने से खुद के मसले भी सुलझते हैं – बहुत अच्छे लेखक (ब्लौगर) देखते ही देखते जनप्रिय, सर्वजन हितैषी बन जाते हैं. अनेक लोग उन्हें रोल मॉडल के रूप में देखने लगते हैं. निजी जीवन में वे कैसे भी हो पर ब्लौगर के रूप में वे कई नवोदित लेखकों के आदर्श बन जाते हैं. ऐसे ब्लौगर और उसके मित्रों के बीच प्रगाढ़ संबंध बन जाते हैं. कुछ अपवादों को छोड़कर जनप्रिय ब्लौगर अपने पाठकों की भरसक सहायता करते हैं और इस प्रक्रिया में वे बहुत कुछ सीखते हैं. यह तो तयशुदा बात है ही कि दूसरों की समस्याएँ और चुनौतियों का सामना करने से हमारा ध्यान अपनी परेशानियों से हटता है. दूसरों की मदद करने की आदत से मन में नए विचार आते हैं, सकारात्मकता जागती है. अपने हर कामकाज में आशावादिता का ओज झलकने लगता है.

अभी हिंदी के अत्यल्प ब्लौगरों ने ब्लौगिंग को अपने जीवनयापन का माध्यम बनाया है. यदि आप ऐसा नहीं भी करना चाहते हों या आप निजी जीवन में दुश्वारियों का सामना कर रहे हों, तनावग्रस्त रहते हों तो ब्लौगिंग ऐसी कम खर्चीली विधा है जो अनेक प्रकार से आपकी गाड़ी को पटरी में लाने में मददगार हो सकती है.

देखा, ब्लौगिंग के कितने सारे परोक्ष लाभ हैं! आप भी अच्छा लिखें और इनका लुत्फ़ लें. सबसे पहले ऐसे लोगों को ब्लॉग शुरू करने के लिए प्रेरित करिए जो अपने खाली समय का सदुपयोग करना चाहते हों. तकनीकी जानकारी के अभाव में अभी बहुत से लोग ब्लॉग बनाने से कतराते हैं. लोगों की मदद करें ताकि वे बेहतर अभिव्यक्ति की वाहक बन सकें.

यदि आप पाठक हैं तो आपके पास अपना ब्लॉग बनाने के पर्याप्त आधार हैं.

और यदि आप ब्लौगर हैं तो इन बातों से कितना सहमत हैं, कृपया बताएं.

(इस पोस्ट की प्रेरणा अंगरेजी की इस पोस्ट से ली गयी है)

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23 Comments Post a comment
  1. सचेत करने और सजग रखने वाली पोस्‍ट.

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    January 26, 2011
  2. हम आपसे पूरी तरह सहमत हैं। अगर सकारात्मक सोच से देखा जाये तो फायदे अधिक हैं। \ आपको गनतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।

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    January 26, 2011
    • आपको भी ‘गनतंत्र’ दिवस की शुभकामनाएं. गणतंत्र तो न जाने कहां खो गया. अब भारत में गनतंत्र ही रह गया है.

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      January 26, 2011
  3. 70 % agree

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    January 26, 2011
    • और बाकी का 30% क्या है जैन सर?:)

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      January 26, 2011
  4. G Vishwanath #

    बढिया पोस्ट। दोनों पोस्टें (आपका और अंग्रेजी में लिखा हुआ पोस्ट, जिसे आप प्रेरणास्रोत बताते हैं) को पढा।
    आपके विचारों से पूर्णरूप से सहमत हूँ!

    जब से टी वी पर commercial break इतने ज्यादा होने लगे, तब से हम अंतर्जाल और ब्लॉगजगत में शरण लेने लगे हैं।
    टी वी मेरे घर में मात्र एक showpiece बन गया है।

    हम ब्लॉग्गर तो नहीं हैं, बस कभी कभी निमंत्रण मिलने पर, कुछ लिखकर अपने ब्लॉग्गर मित्रों को अतिथी पोस्ट के रूप में भेज देता हूँ।
    पर कई ब्लॉगों को पढता हूँ, हिन्दी में और अंग्रेज़ी में भी और कुछ चुने हुए ब्लॉगों पर टिप्पणी करता हूँ।
    जो मजा और संतुष्टी मुझे इन ब्लॉगों को पढकर और टिप्पणी करने में मिलता है वह किसी किताब/पत्रिका पढने में, या टी वी या फ़िल्म देखने में नहीं मिलता, चाहे वह टी वी प्रोग्राम या फ़िल्म कितना भी रोचक क्यों न हो।
    टी वी या सिनेमा देखते समय, हम भाग नहीं ले सकते। Participation is missing. I play the role of a passive dummy.

    ब्लॉग केवल पढने की सामग्री नहीं परोसता। audio files, video files, चित्र वगैरह भी इसमे शामिल की जा सकती हैं और एक कुशल ब्लॉग्गर इन सब का लाभ उठाकर अपना ब्लॉग को अत्यंत रोचक और उपयोगी बना सकता है।
    मित्रता बढाने में ब्लॉगों का बहुत बडा हाथ है। social networking भी हो जाता है, बिना किसी खर्च उठाए।
    इन दो सालों में, मेरा अनुमान है कि स्व्यं ब्लॉग्गर न होते हुए भी, अमरीका, कैनाडा, ऑस्ट्रेलिया और भारत में कम से कम दस हजार लोग मेरे नाम से परिचित हैं और इनमे से सौ दो सौ लोग तो मेरे अच्छे net friends भी बन गये हैं।
    इनमें से कई लोगों से साक्षात भेंट भी हो चुकी है और इसमे एक विशेष आनंद प्राप्त हुआ है। अमरीका से दो ऐसे लोग थे जो भारत आए थे, किसी काम के सन्दर्भ में और दिल्ली/मुम्बई में उनका काम था। काम पूरा होने के बाद वे लोग, कोई काम न होते हुए भी, बेंगळूरु आए थे, केवल मुझसे मिलने के लिए।

    एक दिन जरूर आएगा जब हम भी यहाँ कूद पडेंगे, तब तक आप लोग लिखते रहिए। हम पढेंगे, और cheer leader का रोल निभाएंगे।
    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

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    January 26, 2011
    • हमेशा की तरह बहुत बढ़िया टिप्पणी है विश्वनाथ जी.
      टीवी तो हमारे यहां भी अब बच्चे ही ज्यादा देखते हैं. मैं तो किसी-किसी दिन एक मिनट के लिए भी नहीं देखता.
      ब्लॉग जगत को तो अभी और विशाल और विस्तृत होना बाकी है. अभी तो लाखों लोग इसमें कदम रखेंगे.

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      January 26, 2011
    • @ एक दिन जरूर आएगा जब हम भी यहाँ कूद पडेंगे, तब तक आप लोग लिखते रहिए।

      क्या मतलब? आप कूदे नहीं? मैं सोचता था कि आपने अतिथि पोस्टें कूद पड़ने पर ही लिखी हैं! और सोचता था कि देर सबेर और भेजेंगे ही आप!

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      January 26, 2011
      • G Vishwanath #

        Gyanji,

        Writing a few guest posts does not qualify me as a pakka blogger.
        I have merely felt the waters, and got my feet wet.
        I have yet to dive into the waters like you have done.
        For you, blogging is a passion and a religion too.
        I am not yet ready for that kind of commitment to this great art.
        Commenting as often as possible, on your blog and on the blogs of a few others gives me enough creative work to do and satisfies my need to express myself.
        But I look forward to joining you in the not too distant future.
        But I will do so only if I am sure I can devote the time and energy that this art requires.
        I don’t want to be one of the also rans.
        So many casual bloggers populate blogosphere. Here today, gone tomorrow. They start off with a bang and soon the posts taper off, become irregular and they finally fade away.

        Yes, I will send you another guest post as soon as I decide what I must write on. Commenting is so easy. The blogger has already chosen the subject and you are spared having to make a choice.

        Regards
        G Vishwanath

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        January 26, 2011
  5. प्रवीण पाण्डेय #

    पूर्णतया सहमत, न जाने कितने मानसिक तनाव से बच जाते हैं हम सब।

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    January 26, 2011
  6. पूर्ण सहमत भाई जी,
    आपके उल्लेख से भी कहीं अधिक परोक्ष लाभ है।

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    January 26, 2011
    • धन्यवाद. लाभ तो बहुत हैं पर मूल पोस्ट के अनुरूप इसे भी छोटा ही रखने का प्रयास किया है.

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      January 26, 2011
  7. बढ़िया… एकदम सहमत…

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    January 26, 2011
  8. ब्लॉगिंग पर बढ़िया लिखा है आपने. बधाई!

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    January 26, 2011
  9. nice

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    January 26, 2011
  10. सही बात ….. कई तरह के अनर्गल वार्तालाप से अच्छा है कुछ पढ़ा जाये या लिखा जाय…… ब्लोगिंग इसमें बहुत काम आती है। आपसे सहमत हूँ ।

    Like

    January 26, 2011
  11. .
    .
    .
    पूरी तरह सहमत हूँ आपसे।

    Like

    January 26, 2011
  12. हमें तो १००% सही लगी.

    Like

    January 26, 2011
  13. पूरी तरह से सहमत हैं। एक बार फ़िर लगा कि ब्लॉगिंग से जुड़े रहना अच्छा है। बहुत अच्छा है। :)

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    January 27, 2011
  14. sanjay jha #

    100% sahmat………..haan itni sundar vyakhya kar apne…….hamare bharosa
    ko banaye rakha……..ke hum kahin galat to nahi…………..

    sadar

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    January 27, 2011
  15. namita #

    हमेशा से लिखने का सिर्फ सोचती हूँ.एक बार कोशिश भी की परन्तु सफल नहीं हुई.आज ये लेख पढ़ के फिर से लिखने की भावना जगी है.उम्मीद यही रहेगी की कुछ अच्छा लिखूं और इस बार सफल भी रहूँ.बहुत बहुत धन्यवाद निशांत जी इस अच्छे पोस्ट के लिए.

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    January 27, 2011
  16. मेरा अनुभव कुछ औऱ ही तरह का रहा… मुझे लगा कि ब्लॉग लिखते-लिखते मैं अपने और करीब आ गई, खुद को और अच्छे से जाना… आपमें से किसी और का भी ये अनुभव है?

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    January 28, 2011
  17. शत प्रतिशत,शब्दशः सहमत हूँ भाई साहब…तो अब अलग से और क्या कहूँ….

    आपने एकदम सटीक विवेचना की है…

    Like

    January 28, 2011

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