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परोपकार

कभी एक आदमी बहुतेरी मुसीबतों से घिरा हुआ था. उसने एक दिन शुद्ध मन से यह प्रतिज्ञा करी कि यदि उसे मुसीबतों से निजात मिल जायेगी तो वह अपना घर बेचकर सारा पैसा गरीबों में बाँट देगा.

देर-सबेर उस आदमी की मुसीबतें टल गईं और उसे अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण हो आया. अच्छे दिन लौट आने के बाद अब उसका दिल इस बात की इज़ाज़त नहीं दे रहा था कि वह अपनी सारी दौलत दान में दे दे. कुछ सोचने के बाद उसे एक उपाय सूझ गया.

उसने घर के सामने इश्तिहार लगा दिया. उसमें लिखा था कि घर की कीमत सिर्फ पांच मोहरें थी. लेकिन घर के साथ एक बिल्ली को खरीदना ज़रूरी था जिसकी कीमत उसने दस हज़ार अशर्फियाँ रखी थी.

एक मालदार शख्स ने घर और बिल्ली दोनों को खरीद लिया. आदमी ने पांच मोहरें गरीबों में बाँट दीं और दस हज़ार अशर्फियों से नया घर खरीद लिया.

(इदरीस शाह की कहानी)

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17 Comments Post a comment
  1. सौदा वही सच्‍चा, जिसमें खरीदी-बिक्री दोनों नफे की हो. गरीबों को तो जो मिल जाय, क्‍या पांच क्‍या पचीस, बाकी दाता की नेकनीयती.

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    January 6, 2011
  2. प्रवीण पाण्डेय #

    हम अपने मन के अनुकूल बुद्धि को टहलाते रहते हैं, बिल्ली घर से भी मँहगी कर देते हैं।

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    January 6, 2011
  3. G Vishwanath #

    यह तो Oversmart आदमी है।
    भले यह round उसका हुआ और वह जीत गया, तक़दीर भी कम smart नहीं है।
    क्षण में भागय बदल सकता है और बदलेगा अवश्य।

    This man observed his vow in letter and not in spirit.
    अब इस वाक्य को हिन्दी में कैसे लिखें?
    इस आदमी नें अपनी प्रतिज्ञा विधिपूर्वक पूरी की पर निष्ठापूर्वक नहीं।
    क्या यह अनुवाद सही हैं? इसका सुधार हो सके तो कृपया बता दीजिए।
    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

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    January 6, 2011
  4. तभी तो कहते हैं कि इंसान जितना शातिर जानवर इस पूरी पृथ्वी पर कोई नहीं है… :-)

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    January 6, 2011
  5. यह सही रहा….

    आदमी तो बड़ा बुद्धिमान था…

    वैसे व्यावहारिक बुद्दी ऐसी ही होनी चाहिए…

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    January 6, 2011
  6. जब तक आप अपना भला नहीं करेंगे, दूसरों का भी भला नहीं कर सकते| मुझे लगा वो आदमी मुकर जाएगा, पर twist अच्छा था :)बेहद सुन्दर पोस्ट|
    राजीव :)

    http://rrajiv.wordpress.com

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    January 6, 2011
  7. @G Vishwanath: “कथनी और करनी में अंतर ”

    Good Post. Nishant ji, this blog adds value..and is really appreciable. I will recommend this to some of my friends.

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    January 8, 2011
  8. Kamal valera #

    इनसान मे जो बेइमानी छुपी हे वो जानवरो मे भी नहि वो जयादा सहज हे

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    January 8, 2011
  9. Dear Nishant as per your valuable suggestion I have changed the color scheme of my blog. I have in fact I have changed the text color. Please let me know through your comment on my blog whether this is fine and there is no strain on eyes now. Thanks

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    January 8, 2011
  10. hi,

    I want to keep the background black only…as it makes the pictures look very attractive and clear…also when u last suggested the change, i had whitest of white only as text….but as you know it put sm strain on eyes,,,but i think the current scheme has no such strain…what do u say???

    I f you leave apart the anesthetics do u still have some problem reading text???

    If u can give ur gmail id we may chat!!!! mine is mailgopalmishra@gmail.com

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    January 8, 2011
  11. Sry …i meant aesthetics not anesthetics :(

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    January 8, 2011
  12. rafat alam #

    निशांत जी , यदि कोई किसी ने पूंछा अक्ल बड़ी या भेंस तो उसकी बात का जवाब इस कहानी से दे सकुंगा.

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    January 8, 2011
  13. naveen arora #

    He he.
    insaan chaal bazio se baaz nahi aayega…

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    January 14, 2011
  14. chandeshwar kr #

    कलयुग के मानव की पहचान,हाथी के दाँत समान

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    January 16, 2011
  15. padam jain #

    bahut badia tareeka bataya aapne.saap bhi mar gaya lathi bhi nahi tooti….wah

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    February 4, 2011
  16. This is story not only prove your promise but it shoes we use our mind in positive way
    because of that he has follow his promise as well as his minded mind

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    December 14, 2011
  17. very good mind

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    March 8, 2014

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