परोपकार

catकभी एक आदमी बहुतेरी मुसीबतों से घिरा हुआ था. उसने एक दिन शुद्ध मन से यह प्रतिज्ञा करी कि यदि उसे मुसीबतों से निजात मिल जायेगी तो वह अपना घर बेचकर सारा पैसा गरीबों में बाँट देगा.

देर-सबेर उस आदमी की मुसीबतें टल गईं और उसे अपनी प्रतिज्ञा का स्मरण हो आया. अच्छे दिन लौट आने के बाद अब उसका दिल इस बात की इज़ाज़त नहीं दे रहा था कि वह अपनी सारी दौलत दान में दे दे. कुछ सोचने के बाद उसे एक उपाय सूझ गया.

उसने घर के सामने इश्तिहार लगा दिया. उसमें लिखा था कि घर की कीमत सिर्फ पांच मोहरें थी. लेकिन घर के साथ एक बिल्ली को खरीदना ज़रूरी था जिसकी कीमत उसने दस हज़ार अशर्फियाँ रखी थी.

एक मालदार शख्स ने घर और बिल्ली दोनों को खरीद लिया. आदमी ने पांच मोहरें गरीबों में बाँट दीं और दस हज़ार अशर्फियों से नया घर खरीद लिया.

(इदरीस शाह की कहानी)

Comments

  1. says

    सौदा वही सच्‍चा, जिसमें खरीदी-बिक्री दोनों नफे की हो. गरीबों को तो जो मिल जाय, क्‍या पांच क्‍या पचीस, बाकी दाता की नेकनीयती.

  2. प्रवीण पाण्डेय says

    हम अपने मन के अनुकूल बुद्धि को टहलाते रहते हैं, बिल्ली घर से भी मँहगी कर देते हैं।

  3. G Vishwanath says

    यह तो Oversmart आदमी है।
    भले यह round उसका हुआ और वह जीत गया, तक़दीर भी कम smart नहीं है।
    क्षण में भागय बदल सकता है और बदलेगा अवश्य।

    This man observed his vow in letter and not in spirit.
    अब इस वाक्य को हिन्दी में कैसे लिखें?
    इस आदमी नें अपनी प्रतिज्ञा विधिपूर्वक पूरी की पर निष्ठापूर्वक नहीं।
    क्या यह अनुवाद सही हैं? इसका सुधार हो सके तो कृपया बता दीजिए।
    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

  4. says

    तभी तो कहते हैं कि इंसान जितना शातिर जानवर इस पूरी पृथ्वी पर कोई नहीं है… :-)

  5. says

    यह सही रहा….

    आदमी तो बड़ा बुद्धिमान था…

    वैसे व्यावहारिक बुद्दी ऐसी ही होनी चाहिए…

  6. says

    जब तक आप अपना भला नहीं करेंगे, दूसरों का भी भला नहीं कर सकते| मुझे लगा वो आदमी मुकर जाएगा, पर twist अच्छा था :)बेहद सुन्दर पोस्ट|
    राजीव :)
    http://rrajiv.wordpress.com

  7. says

    @G Vishwanath: “कथनी और करनी में अंतर ”

    Good Post. Nishant ji, this blog adds value..and is really appreciable. I will recommend this to some of my friends.

  8. Kamal valera says

    इनसान मे जो बेइमानी छुपी हे वो जानवरो मे भी नहि वो जयादा सहज हे

  9. says

    Dear Nishant as per your valuable suggestion I have changed the color scheme of my blog. I have in fact I have changed the text color. Please let me know through your comment on my blog whether this is fine and there is no strain on eyes now. Thanks

  10. says

    hi,

    I want to keep the background black only…as it makes the pictures look very attractive and clear…also when u last suggested the change, i had whitest of white only as text….but as you know it put sm strain on eyes,,,but i think the current scheme has no such strain…what do u say???

    I f you leave apart the anesthetics do u still have some problem reading text???

    If u can give ur gmail id we may chat!!!! mine is mailgopalmishra@gmail.com

  11. rafat alam says

    निशांत जी , यदि कोई किसी ने पूंछा अक्ल बड़ी या भेंस तो उसकी बात का जवाब इस कहानी से दे सकुंगा.

Leave a Reply