मुझे मेरी किडनी वापस दो!

मुझे एक बेतुके मुकदमे के बारे में पता चला जिसमें न्यूयॉर्क का एक डॉक्टर अपनी तलाकशुदा पत्नी से वह किडनी मांग रहा है जो उसने 2001 में पत्नी को दान में दी थी. अब या तो उसे वह किडनी चाहिए या उसके एवज़ में डेढ़ मिलियन डौलर की रकम चाहिए.

डेली न्यूज़ की वेबसाईट में छपी खबर के मुताबिक डॉक्टर रिचर्ड बटिस्टा ने अपनी पत्नी पर उसके फ़िज़िओथेरेपिस्ट से अवैध सम्बन्ध रखने का आरोप लगाया. बेहद कड़वी मुकदमेबाजी के बाद रिचर्ड को तलाक तो मिल गया पर उसके तीन बच्चों की परवरिश उससे छिन गयी. इस सबसे खिन्न होकर उसने उसने अपनी पत्नी को दान में दी गयी किडनी को वापस उसे सौंपने के लिए आवेदन दिया. बटिस्टा ने कहा – “मैंने उसे किडनी दान में दी थी क्योंकि मैं अपने वैवाहिक जीवन को खंडित होने से बचाना चाहता था. किडनी दान देने का पहला उद्देश्य उसके जीवन की रक्षा करना था. इससे यह उम्मीद भी थी कि हमारे सम्बन्ध मधुर हो जायेंगे.”

जून, 2001 में किडनी प्रत्यारोपण का सफल ऑपरेशन हो गया. बटिस्टा के अनुसार उसे उम्मीद थी कि उसकी पूर्ण स्वस्थ हो चुकी पत्नी उसके दान का महत्व, उसकी कीमत समझेगी पर ‘कुछ भी नहीं बदला’.

सच्ची दानशीलता इसमें है कि शुद्ध मन से बिना किसी गर्व, घमंड, दिखावे, लाभ, या बदले में कुछ पाने की कामना से दान दिया जाए. ऐसा दान हमें ‘मैं, मेरा, मेरे लिए’ की अस्वस्थ भावना से मुक्त करता है और हमारे विचारों को पवित्र बनाता है. इसके द्वारा हम जीवन की विहंगमता को और अधिक पूर्णता में स्वीकार कर पाते हैं और क्षुद्रताओं से ऊपर उठ सकते हैं. इसके अतिरिक्त, यह मानसिक और भौतिक दरिद्रता को दूर कर शुभ कर्मों को करने और उनके संचय को प्रोत्साहित करता है.

इस प्रकार सच्चा दान हमारे अहम् से ऊपर उठने में है और दूसरों के प्रति निःस्वार्थ भाव से कर्म करने में निहित है. किस अपिरिचित व्यक्ति को अपनी किडनी दान में देना वास्तव में बहुत बड़ा दान है. अपने किसी प्रिय परिचित को किडनी दान में देना भी उतना ही विशाल शुभ कर्म है. किसी परिचित को किडनी या कोई अन्य महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दान देने के उपरान्त निज-सम्बन्ध से जनित महती उपकार करने की भावना आ जाती है जिसे हम आम बोलचाल में अहसान लादना कह सकते हैं. इसके विपरीत किसी अजनबी को दान देने के बाद आप उसे भूल भी सकते हैं.

बटिस्टा ने अपनी पत्नी को किडनी दान करने का निर्णय प्रेम के वशीभूत होकर ही लिया होगा पर इस निःस्वार्थ प्रतीत होने वाले कर्म के पीछे भी कुछ उद्देश्य छुपे थे जो गलत भी नहीं थे. बटिस्टा के अनुसार वह अपने वैवाहिक जीवन को पुनः स्वस्थ, खुशहाल, और चिरस्थाई बनाना चाहता था. जब ऐसा नहीं हुआ तो उसने अपने निवेश को वापस ले लेने का निर्णय कर लिया. पत्नी से मिले धोखे ने बटिस्टा के भीतर उसके और उसकी पत्नी के बीच न पटने वाली दूरी पैदा कर दी और वह धीरे-धीरे अपने में ही सिमटता रह गया.

मैं अपने पाठकों से यह प्रश्न करता हूँ कि क्या हम किसी और के शरीर में प्रत्यारोपित किडनी को अपना अंग कह सकते हैं? यह देखना ही कितना विस्मयपूर्ण है कि मनुष्यों में ‘मैं और मेरा’ की भावना इतनी गहरी है कि यह शरीर से अलग हो चुके अंग पर भी अपना अधिकार जताती है. मैंने तुम्हें अपने शरीर का टुकड़ा दिया और तुमने ही मुझे चोट पहुंचाई! अब मुझे मेरी किडनी वापस दो!

बटिस्टा सौजन्यपूर्ण, करुणापूर्ण, और दयालुता भरे भाव से अपनी किडनी दान में दे सकता था लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका और उसने किडनी तो दे दी पर अपने अहंकार को पोषित करता रहा.

मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि कोई भी मनुष्य अपनी किडनी तभी दान में दे जब वह उसे वापस चाहने की इच्छा न करे.

(इस प्रकरण के अदालती फैसले को ढूँढने में बहुत समय लगा लेकिन मैंने यह पता लगा लिया कि अदालत ने बटिस्टा की अपील कई आधार पर ठुकरा दी. आप विस्तार से यहाँ देख सकते हैं)

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20 Comments

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20 responses to “मुझे मेरी किडनी वापस दो!

  1. .

    उसे किडनी वापस नहीं मांगनी चाहिए। वो निस्वार्थ सेवा थी। लेकिन अब मांग करना उसका Frustration है। तलाक के बाद उसके पास जो भी है , उसी में संतोष करके उसे अपनी तथा बच्चों की जिंदगी खुशहाल बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

    .

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  2. Khabar bahut purani hai aur aap ko ab is ki khabar lag rahi hai. Aaj ki taza khabar yeh hai

    http://www.msnbc.msn.com/id/21134540/vp/40396542#40345072

    Peace,

    Desi Girl

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    • Thanx for the link. It’s indeed one of the the greatest things a man can do for another human being.
      The news translated above is old but here it’s posted for the benefit of Hindi readers who may have not read it before.
      It’s nice to see you here once in a while:)

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  3. G Vishwanath

    मान लीजिए कोई अपनी माँ से बुरा व्यवहार करता है।
    क्या वह माँ अपने बेटे से बालवस्था में पिलाया स्तन का दूध वापस माँग सकती है?
    बटिस्टा की पत्नि उसे छोडकर तलाक ले गई इसके पीछे भी कारण होंगे।
    पत्नि भी बटिस्टा से अपना कौमार्य वापस माँग सकती है।
    बटिस्टा को बात भूलकर भविष्य की और ध्यान देना चाहिए।

    अमरीका में बेतुकी मुकदमें तो बहुत होते हैं।

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  4. Gyandutt Pandey

    यह तो कुछ वैसा ही है कि अबस कम्पनी में मैं निवेश करूं और घोटाले के बाद कम्पनी का शेयर चौपट हो जाये तो मैं कम्पनी से अपना निवेश वापस मांगूं।
    रिचर्ड बटिस्टा ने इक्विटी में इनवेस्ट किया था। दान नहीं दिया था!

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  5. किसी भी व्यक्ति का दर्द जाने बिना हम उस पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर देते है , आज सब आदर्श वाले कमेन्ट ही आयेंगे निशांत ! दूसरों की तकलीफ को बिना समझे उस पर ऊँगली उठाना सिर्फ ” ब्लागर ” ही कर सकते हैं !

    उपरोक्त घटना नैतिक रूप में गलत है मगर यह मत भूलिए की उस व्यक्ति ने वह काम किया है जो यह हम टिप्पणी कर्ता सोच भी नहीं सकते …

    मगर मैं उस व्यक्ति का विरोध नहीं करता , मुझे लगता है कि बुरी तरह आहत व्यक्ति ऐसा ही करेगा ! यह महिला विश्वास घाती और स्वार्थी है !
    शुभकामनायें

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  6. @satish saxena
    You are the best. You just proved it by saying you won’t judge the guy like all other bloggers but you’ll definitely judge the wife.

    http://www.nydailynews.com/ny_local/2009/01/18/2009-01-18_dawnell_batista_wife_at_center_of_kidney.html?page=0

    http://www.nydailynews.com/news/2009/02/09/2009-02-09_kidney_divorce_doctor_richard_batista_be.html

    Now you’ll say he was bound to cheat coz’ she had double mastectomy and other health issues. Also, he gave a kidney so he has a legitimate right to cheat and beat.

    Janab par partner violence ka charge hai 1980s se. Once an abuser always an abuser, just the modus operandi changes…

    In the US “it’s illegal for an organ to be exchanged for anything of value.” So his claim was thrown out the moment it came to the judge.

    Kuchh aur expert comments ka intzaar rahega.

    Peace,

    Desi Girl

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  7. विश्वनाथ जी की बातों से मैं भी सहमत हूँ.

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  8. G Vishwanath

    Dear Desi Girl,

    You have commented on the comments of others.
    I would be curious to read your own comments on this issue.
    Regards
    G Vishwanath

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    • @G Vishwanath

      So here is my take. It is donation (daan) not a grant or largesse that the giver can revoke or lay conditions on it.

      Hamare dehat mein kahavat hai ,daan maine kodi (leper) ka bhande mein dala. Once you have given something even if it is a daimond you cannot ask it back.

      Think before you give, give it to a supatar (deserving) and then forget it ,don’t gloat on your benovelence. Cut your losses and move on. Live and learn.

      Peace,
      Desi Girl

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  9. प्रवीण पाण्डेय

    किडनी वापस माँगना बदले की भावना से प्रेरित था, किडनी देना प्रेम का प्रतीक था। प्रेम को बदले का विलोम मानने वालों को इस माँग में कोई तथ्य दिखाई पड़ेगा, नहीं तो न्यायालय ने ठीक ही किया।

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  10. G Vishwanath

    Dear Desi Girl,

    I have just gone through the links you cited.
    I must say the blog was eminently readable.

    The original post and comments kept me hooked right till the end.
    “Confused wife” is an excellent writer.
    I feel sorry for her but unless I read her mother-in-law’s version, I cannot come to any conclusion or offer any advice.

    The mother in law may not be as skilled as “confused wife” with words but that does not mean she won’t have a valid case of her own.

    Being much older and also a male, I felt like an intruder in a strictly “Women only” zone and hence refrained from commenting.

    I will definitely return to this blog on and off and follow the deliberations and also catch up with the older posts.

    Thank you for leading me to a good place.
    I am always on the look out for good blogs and I feel I am going to enjoy this blog you lead me to.

    Thanks.

    Regards and best wishes.
    G Vishwanath

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  11. rachna

    comments are wonderful they give an insight of the mind . we judge people because we are human .

    i agree once a offender is always a offender and i have read in many rape cases that any rapist when acquitted on benefit of doubt always rapes again .

    we wake up when its too late

    desi girl keep it up

    regds
    rachna

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  12. वाणी गीत

    नैतिकता की ही बात करें तो उक्त महिला ने भी पति के प्रेम को नहीं समझा …!

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    • @Vani Geet,

      Kya prem ka matlab hai mar peet aur vivahetar sambhandhon ko sehte rehana?

      Please see my response to Satish Saxena for other news items on this case.

      Peace,
      Desi Girl

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      • rachna

        Kya prem ka matlab hai mar peet aur vivahetar sambhandhon ko sehte rehana?

        indian wifes are social security conscious and accept aal this as “general disorder in man ” not only this they always say ” he will come back home”

        the primary reason is the indian woman are conditioned to accept all this most of them are not financially independent and they marry so that they get a comfort zone according to most non working wifes the woman their husband gets involved is ” characterless ” and their husband is a “baby” who she lured in her web

        पति पत्नी और वो यानि गलती बलिदान व्यभिचार
        http://indianwomanhasarrived.blogspot.com/2010/11/blog-post_473.html

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        • @rachna,

          In this post we were talking about a western woman. DG has no doubt if an Indian woman in similar situation would have continued to take nonsense and felt obligated and lucky that her spouse gave her a kidney.

          Desi women feel lucky if their spouses offer them food and medicine when they are sick. It is like they feel they don’t deserve humanly treatment. As if the centuries of servituted has just taken away the human quotient out of their genetic programing. :)

          I read the link you posted. Yes, it raises legitimate questions. I just posted a comment on why women participate in patriarchy if it oppresses it, check it out
          http://indianhomemaker.wordpress.com/2010/11/28/a-woman-is-not-a-womans-worst-enemy-patriarchy-is/

          Peace,
          Desi Girl

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