युवक शिष्य का दीक्षाकाल समाप्त होने वाला है. निकट भविष्य में वह भी किसी आश्रम का संचालन करेगा. आश्रम छोड़ने से पहले वह यह जान लेना चाहता है कि वह अपने गुरु को भी चुनौती देने और परास्त करने में सक्षम है अथवा नहीं. वह एक छोटी सी चिड़िया को अपने हाथ में भींचकर अपनी पीठ की ओर करके गुरु से पूछता है:-
“गुरुदेव, मेरे हाथ में एक चिड़िया है. क्या आप बता सकते है कि वह जीवित है अथवा मृत है?”
शिष्य की योजना इस प्रकार है – यदि उसके गुरु चिड़िया को ‘मृत’ बताएँगे तो वह अपना हाथ खोल देगा और चिड़िया उड़ जाएगी. और यदि गुरु चिड़िया को ‘जीवित’ बताएँगे तो वह चिड़िया की गर्दन दबाकर उसे मार देगा – इस प्रकार किसी भी स्थिति में वह अपने गुरु को गलत सिद्ध कर देगा.
गुरु ने मुस्कुराते हुए कहा – “पुत्र, यह तो तुमपर ही निर्भर करता है.”

बहुत ही गहरी बात।
chal prapnch pr bhari guru hai yeh sikhlati hai rachna.
jb bhi milna guru shree se brhm aur kapt ko bahr rakhna.
बहुत हि प्रेरणादायी रचना
पुत्र, यह तो तुमपर ही निर्भर करता है.”….nishant ji darsal admi ki yahi pareshani hai wah sada apne ko sabit karne ki koshish karta hai ,bina yeh samjhe ki weh kuch nahi janta aur jojanta hai yani guru hai us ka jawab to apne uper likh hi dia hai .
Really I love the way how you presented it and Paulo is one of my fav.Author.
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Beautiful and inspiring story.
Thanks.
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वाह….ग्रेट !!!