दिल के टुकड़े

एक नौजवान ने शहर के चौराहे पर खड़े होकर ऐलान किया कि उसका दिल पूरे मुल्क में सबसे खूबसूरत है. उसके इर्द-गिर्द भीड़ जमा हो गयी और सभीने उसके दिल को देखने के बाद हामी भरी कि उसका दिल वाकई सबसे खूबसूरत था और उसमें कहीं कोई नुस्ख नहीं था.

लेकिन भीड़ के पीछे से एक बूढ़े की आवाज़ आई – “नहीं बच्चे, तुम्हारा दिल मेरे दिल जितना खूबसूरत नहीं है!”

भीड़ ने बूढ़े के दिल को गौर से देखा. वह भरपूर जोश से धड़क रहा था पर इसपर बहुत से जख्मों के निशान थे. इसके कुछ टुकड़े निकले हुए थे जिनकी जगह पर दूसरे टुकड़े निहायत ही कामचलाऊ तरीके से अटकाए हुए थे और वह देखने में भद्दा लग रहा था. नौजवान ने भी बूढ़े के दिल का मुआयना किया और ज़ोरों से हंस दिया.

“तुम बढ़िया मजाक कर लेते हो!” – नौजवान बोला – “मेरे दिल के सामने तुम्हारा दिल कहीं नहीं ठहरता. मेरा दिल बेजोड़ है और तुम्हारा दिल बहुत चोट खाया लगता है.”

“हाँ, वो तो है” – बूढ़ा बोला – “तुम्हारा दिल वाकई निर्दोष है… लेकिन मैं ऐसा दिल कभी नहीं चाहूँगा. मेरे दिल में लगा हर जख्म उस शख्स की ओर इशारा करता है जिसे मैंने अपने दिल का टुकड़ा दिया… मैंने अपने दिल को खोलकर उसके सामने रख दिया और उसे दे दिया. उसके बदले में उसने भी मुझे अपने दिल का एक हिस्सा दिया जिसे मैंने अपने दिल से जोड़ दिया. अक्सर ही ये टुकड़े बिलकुल सटीक नहीं बैठे और दिल की सतह ऊबड़-खाबड़ हो गयी…”

“और कभी ऐसा भी हुआ कि मैंने किसी को अपने दिल का एक टुकड़ा दिया लेकिन उसने मुझे अपने दिल का टुकड़ा नहीं दिया. मेरे दिल के खाली कोने यही किस्सा बयान करते हैं कि किसी से मोहब्बत करना दांव लगाने जैसा ही है. ये खाली कोटर सूने रहते हैं और दर्द पहुंचाते हैं पर मुझे यह भी याद दिलाते हैं कि मैंने कभी किसी से प्यार किया और शायद वे कभी मेरे पास आयें और मेरे दिल के ये खाली कोने फिर से भर जाएँ. क्या तुम्हें अभी भी यह लगता है कि मेरा दिल बदसूरत है?”

नौजवान मायूस खड़ा रहा और उसकी आँखों से आंसू बहने लगे. उसने अपने दिल की ओर हाथ बढाया और उसका एक टुकड़ा निकालकर बूढ़े के हाथ में रख दिया.

बूढ़े से नौजवान की पेशकश को अपने दिल से लगा लिया और अपने भग्न ह्रदय से एक टुकड़ा निकालकर नौजवान के दिल में नई बनी हुई जगह में रख दिया.

यह टुकड़ा बिलकुल तराशा हुआ नहीं था इसलिए नौज़वान का दिल अब पहले की तरह इंतहाई खूबसूरत नहीं रहा. नौजवान ने अपने दिल की तरफ देखा. उसका दिल अब पहले जैसा बेजोड़ नहीं था पर उसे अब वह ज्यादा खूबसूरत नज़र आने लगा क्योंकि बूढ़े के दिल का प्यार अब उसके दिल में घर बना चुका था.

(पाउलो कोएलो के ब्लॉग से – from the blog of Paulo Coelho)

8 Comments

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8 Responses to दिल के टुकड़े

  1. rafat alam

    निशांत जी बहन सुंदर और गहरी बात पाउलो कोएलो के ब्लॉग से से आपने लिखी है .देर तक बैठे सोचते रहो परत दर परत परदे उठते जाते है .साधुवाद .

  2. यह पोस्ट तो सचमुच दिल ले गई ,बहुत बढ़िया प्रस्तुति

  3. प्रवीण पाण्डेय

    उफ, प्यार भरा हो जिस दिल में, वही सुन्दर दिल।

  4. मुग्धावस्था में हूँ पढ़कर…

  5. पोस्ट जो है सो तो है ही। अपने दिल की स्टॉक टेकिंग को मजबूर कर रही है!

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