दूसरा जन्म

नववर्ष की पूर्वरात्रि को अपने घर जाते समय रब्बाई का सामना एक प्रेत से हो गया. रब्बाई उसे देखकर भयभीत था. उस व्यक्ति की मृत्यु उस दिन सुबह ही हुई थी और रब्बाई ने ही उसका अंतिम संस्कार करवाया था.

“तुम तो मर चुके हो!” – भय से जकड़े हुए रब्बाई ने उससे पूछा – “तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”

प्रेत ने कहा – “रब्बाई, आज की रात कुछ आत्माओं को दुबारा जन्म लेने के लिए भेजा गया है. मैं भी उनमें से एक हूँ.”

“और तुम्हें वापस क्यों भेजा गया है?” – रब्बाई ने पूछा.

“रब्बाई, तुम यह जानते हो कि मैंने पृथ्वी पर सत्य और परोपकार से पूर्ण जीवन जिया था…” – प्रेत ने कहा.

“फिर भी तुम्हें दोबारा जन्म लेने के लिए भेज दिया गया?” – रब्बाई ने उसे टोकते हुए कहा.

“हाँ” – प्रेत बोला – “मरने से ठीक पहले मेरे मन में यह विचार आ रहे थे कि मैंने सदैव आदर्श जीवन जिया है और कभी गलत मार्ग पर नहीं चला. यह सोचकर मेरे मन में पवित्र होने का अहंकार आ गया और उसी क्षण मेरी मृत्यु हो गयी. ऊपर जाने पर मुझे अपनी इस गलती को सुधारने के लिए वापस भेज दिया गया.”

यह कहते ही प्रेत अंतर्ध्यान हो गया और रब्बाई इस अनूठे घटनाक्रम पर विचार करते हुए घर आ गया. कुछ ही समय के भीतर उसकी पत्नी ने एक बालक को जन्म दिया. वह बालक बड़ा होकर रब्बाई वोल्फ कहलाया. उसे अहंकार कभी छू भी न सका.

(A Jewish story in Hindi)

About these ads

5 Comments

Filed under Stories

5 responses to “दूसरा जन्म

  1. शुभ विचार …!

  2. प्रवीण पाण्डेय

    मुझे ज्ञात नहीं था कि अन्य सभ्यताओं में भी यह सत्य स्थापित है कि मृत्यु के पहले की मनस्थिति अगले जन्म का निर्धारण करती है।

  3. निम्बस

    आपकी कहानी सच मैं एक प्यारा एसास दिलाती है !
    एक सुखेद अनुभूति हुई इसे पढ़ कर ,आशा है की ऐसे अछे और सारवान पोस्ट मिलते रहेंग धन्यवाद्

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s