अपने-अपने सलीब

अम्ब्रिया (इटली) के एक गाँव में एक आदमी रहता था जो हमेशा अपने दुखों का रोना रोते रहता था. वह ईसाई था और उसे यह लगता था कि उसके कंधों पर रखा सलीब ही सबसे भारी है.

एक रात सोने से पहले उसने ईश्वर से प्रार्थना की – “प्रभु, मेरे दुखों का भार कुछ कम कर दो!”

उस रात उसने एक स्वप्न देखा कि ईश्वर उसे एक भंडार में ले गए हैं और उससे कह रहे हैं – “तुम खुद ही अपनी पसंद का सलीब चुन लो”.

आदमी पूरे भंडार में घूमता है. वहां हर आकार-प्रकार के सलीब रखे हैं जिनपर उनके मालिकों का नाम लिखा हुआ है. वह मंझोले आकार का एक सलीब उठाता है और उसपर लिखा नाम पढता है… वह सलीब तो उसके एक मित्र का है. वह उसे वहीं छोड़ देता है.

तब ईश्वर उससे कहते हैं कि वह चाहे तो सबसे छोटा सलीब भी चुन सकता है.

आदमी यह देखकर हैरत में पड़ जाता है कि सबसे छोटे सलीब पर उसका ही नाम लिखा हुआ है.

(पाउलो कोएलो की कहानी – A story of Paolo Coelho – in Hindi)

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3 Comments

Filed under Paulo Coelho, Stories

3 responses to “अपने-अपने सलीब

  1. प्रवीण पाण्डेय

    सुन्दर और प्रेरक ।

  2. बेहतर…
    यानि सलीबों को ही उतार फैंकने में जुटना होगा…चुनने में नहीं…

    प्रेरक कथा…

  3. sandhya

    बात सच है . लोगों को दूसरों का घर महल लगता है लेकिन बात यह है की अपनी कुटिया ही सुखो का भंडार है यह उस महल में जाने के बाद ही पता चलता है .ऐसे प्रेरक कहानी पढ़कर मन को बहुत शांति मिलती है .

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