कैलिफोर्निया में एक प्रसिद्द सूफ़ी गुरु का ध्यान-प्रवचन शिविर लगा था. कार्यक्रम की शुरुआत सुबह के आठ बजे तय किये गए समय पर होने वाली थी. ठीक आठ बजे सूफ़ी गुरु का एक शिष्य स्टेज पर आया और उसने आगंतुकों से कहा – “गुरु बस नींद से जागने वाले ही हैं. कृपया धैर्य रखें.”
समय बीतता गया. धीरे-धीरे लोग वहां से खिसकने लगे. दोपहर को शिष्य पुनः स्टेज पर आया और बोला – “कोई खूबसूरत लड़की गुरुदेव से मिलने आई है. उससे बातें ख़त्म करते ही वे अपना प्रवचन प्रारंभ करेंगे.” यह सुनकर ज्यादातर लोग वहां से चले गए.
शाम के चार बजे सूफ़ी गुरु नशे में धुत्त होकर स्टेज पर आया. यह नज़ारा देखकर तीन-चार व्यक्तियों को छोड़कर बाकी बचे लोग कानाफूसी करते हुए निकल लिए.
उनके बाहर जाते ही गुरु ने शराबी के अभिनय से बाहर निकलकर कहा – “सबसे पहले मैं तुम लोगों को यह बताना चाहता हूँ कि बहुत लम्बे सफ़र पर चलने से पहले शुरुआती नाउम्मीदियों से अपना हौसला कभी भी पस्त नहीं करना!”













bahut achi or bahut sahi
सच में यदि सफर लम्बा हो तो छोटी निराशायें आपको पस्त न कर सकें, इतना धैर्य हो हममें ।
Bahut badiya seekh deti hai ye kahani.
great story again
thanks
धैर्य ही सबसे बड़ा गुण है, जीवन में आगे बढ़ने के लिए.
such hai, sahi bhi hai.
यही तो हममे नहीं है धेर्य ही तो नहीं है . धीरज लाओ ऐसा बचपन से हमें बताया जाता है पैर कैसे .
बहुत बढ़िया !
जो हम पर विश्वास ही नहीं करता वहां क्या करना रुक कर , पहले पूरा यकीन उसके बाद राम राम !
शुभकामनायें निशांत !
बहुत अच्छा।
सूफीयों के बारे में और जानकारी के लिए qhizr.blogspot.com देखें