सफ़ेद बाल

एक दाढ़ीवाले आदमी ने नाई की दुकान में जाकर उस्ताद नाई से कहा – “मैं एक और निकाह करने जा रहा हूँ. तुम मेरी दाढ़ी में से सारे सफ़ेद बाल अलग कर दो.”

उस्ताद नाई ने कैंची उठाकर पलक झपकते ही कच्च-कच्च करके पूरी दाढ़ी काट दी और उसे आदमी के हाथ में थमाकर कहा – “मेरे पास वक़्त नहीं है. तुम खुद ही सफ़ेद बाल छांट लो.”

(मसूद फरज़ान की कहानी – A Sufi story by Massud Farzan – in Hindi)

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9 Comments

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9 responses to “सफ़ेद बाल

  1. वाह बहुत ज्ञानवर्धक गहरी सोच

  2. प्रवीण पाण्डेय

    एक को छिपाने के लिये सबको रंगना भी पड़ता है ।

  3. वाह मजेदार कहानी।

  4. गागर में सागर!

  5. हा..हा..हा…हा…

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