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अच्छे विचार : बुरे विचार

“मुझे कोई मार्ग नहीं सूझ रहा है. मैं हर समय उन चीज़ों के बारे में सोचता रहता हूँ जिनका निषेध किया गया है. मेरे मन में उन वस्तुओं को प्राप्त करने की इच्छा होती रहती है जो वर्जित हैं. मैं उन कार्यों को करने की योजनायें बनाते रहता हूँ जिन्हें करना मेरे हित में नहीं होगा. मैं क्या करूं?” – शिष्य ने गुरु से उद्विग्नतापूर्वक पूछा.

गुरु ने शिष्य को पास ही गमले में लगे एक पौधे को देखने के लिए कहा और पूछा कि वह क्या है. शिष्य के पास उत्तर नहीं था.

“यह बैलाडोना का विषैला पौधा है. यदि तुम इसकी पत्तियों को खा लो तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी. लेकिन इसे देखने मात्र से यह तुम्हारा कुछ अहित नहीं कर सकता. उसी प्रकार, अधोगति को ले जाने वाले विचार तुम्हें तब तक हानि नहीं पहुंचा सकते जब तक तुम उनमें वास्तविक रूप से प्रवृत्त न हो जाओ”.

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66 Comments Post a comment
  1. प्रेरणादायक ।

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    June 18, 2010
    • shailesh singh #

      INSPIRABLE……………………….

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      February 28, 2013
  2. बहुत ही शिक्षाप्रद और प्रेरक निशांत जी।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com

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    June 18, 2010
  3. विचार बहुत सुंदर है….लिप्त नही होना चाहिए..सोच लेने मात्र से कुछ नही होता..सुंदर उपदेशक बातों के लिए बधाई..निशांत जी

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    June 18, 2010
  4. बहुतों के संकट हल कर दिए, इस कथा ने।

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    June 18, 2010
  5. सुन्दर प्रेरक पोस्ट आभार

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    June 18, 2010
  6. आभार इस पोस्ट के लिए/

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    June 18, 2010
  7. अधोगति को ले जाने वाले विचार तुम्हें तब तक हानि नहीं पहुंचा सकते जब तक तुम उनमें वास्तविक रूप से प्रवृत्त न हो जाओ”.

    regards

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    June 18, 2010
    • mohd ahmad #

      you r right

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      August 11, 2012
  8. sandhya #

    aapko bahut – bahut dhanyavad. aaj mere bete ko iss vichar ko batakar mai khushi mahshush karungi . man ko shanti dene wala vichar hai . aage bhi aap aeise vichar se hame khusi denge.

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    June 18, 2010
  9. neeti #

    But, Watch your thoughts, they become words.
    Watch your words, they become actions….
    yeh bhi to kaha jata hai.

    Phir?

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    June 18, 2010
    • धन्यवाद. इसके लिए दूसरी कथा तक का इंतज़ार ठीक रहेगा:)

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      June 18, 2010
  10. प्रवीण पाण्डेय #

    पर विचार धीरे धीरे दृढ़ रूप ले क्रिया में प्रवत्त होते हैं ।

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    June 18, 2010
  11. Quite inspirational as always. Keep sharing !

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    June 18, 2010
  12. शानदार विचार।

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    June 18, 2010
  13. Nice thoughts…. makes me think that in life the semantics are more inportant but all we get stuck in usually are syntax…

    Thanks for sharing a thought proviking post

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    June 18, 2010
  14. “अधोगति को ले जाने वाले विचार तुम्हें तब तक हानि नहीं पहुंचा सकते जब तक तुम उनमें वास्तविक रूप से प्रवृत्त न हो जाओ”

    बिलकुल सही है … आपकी हर पोस्ट का अपना अलग ही महत्त्व होता है

    मुझसे रहा नहीं गया इसलिए अपनी तरफ से कुछ लिख रहा हूँ…..
    मेरे मन में भी ये ही तर्क उठा था की विचार से ही तो कर्म बनते हैं पर तब मैंने इसी पोस्ट को दोबारा तिबारा पढ़ा और निष्कर्ष निकाला की अगर उस वर्ग विशेष के मानवों की बात की जाए जो इस अपराध बोध में रहते हों की सिर्फ बुरे विचार आने भर को पाप मान लिया जाता है तो उनके मन में आये अपराध बोध को मिटाने के लिए ये शिक्षाप्रद प्रसंग है . एक प्रसंग से मिली शिक्षा सभी स्थानों पर फिट नहीं आ सकती … जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ये प्रसंग है उस उद्देश्य की पूर्ति ये सहजता से कर रहा है .

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    June 18, 2010
    • कुछ सार तर्क पेश कर रहा हूँ इस प्रसंग के पक्ष में

      १. एक छोटी सी स्वतंत्रता किसी सुहृदय प्रतिभावान के हाथ में हो तो एक सकारात्मक क्रांति में सहयोगी बन सकती है और वही स्वतंत्रता किसी दुष्ट व्यक्ति के हाथ में विनाश भी ला सकती है . हथियारों पर ये बात बिलकुल फिट होती है.
      २. कुछ मानसिक परेशानियों में ऐसा होता है की मानव किसी तरह के नकारात्मक विचार आने मात्र से अपने आप को अपराधी महसूस करने लगता है
      ३. अगर किसी शिक्षा प्रद कहानी को पढने के बाद भी को विरोधी तर्क मन में उठता है तो सिर्फ दो ही बातें हो सकती हैं या तो हम अर्जुन की तरह प्रश्न पूछ रहें हैं ……तब तो ठीक है पर अगर ऐसा नहीं है तो हमारे मन की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिन्ह उठाना चाहिए
      —————————————————————————-
      निशांत जी , मैं इतने बड़े कमेंट्स के लिए क्षमा चाहता हूँ …अगर आप इन्हें गैर जरूरी समझे तो डिलीट कर दें , या मेरी बात से सहमत न भी हो अवश्य बता दें

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      June 18, 2010
      • प्रिय गौरव, पोस्ट को विस्तार देने के लिए धन्यवाद.

        कुछ भी एब्सोल्यूट नहीं है.

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        June 19, 2010
  15. eye opening story

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    June 19, 2010
  16. चलिए कई प्रश्नों के हल मिल गए इस प्रेरक-प्रसंग में … आभार !

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    June 19, 2010
    • SUNNY #

      THANKS

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      September 30, 2010
  17. jugal #

    achchhe vichar hai tatha ise patha kar karya kshamata me vridhdhi hoti hai man me shanti aur ek samanit jiwan jine ka rah ki aur insan ke kadam badhate hai. pani ko niche ki taraf bahana aasan hai parantu uper ki or le jana bahut mehanat v sayam ki jarurat hoti hai so ham sab ko es taraf prayas karane chahiye. yadhyapi jhyan dena aasan hai par usako nibhane ke bahut prayas karane parate hai. ishwar ham ko shakti deve esi vichar ke sath

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    August 13, 2010
  18. rafat alam #

    सोच जीवन का हिस्सा है .श्वास सामान विचार भी लगातार चलते हैं .सोच वर्जित कभी नहीं होती. सामाजिक परिस्थितयां तै करती है क्या अच्छा है और क्या बुरा .यहाँ तक की एक के लिए जो वस्तु आनंद का साधन है दूसरे के लिए निषेध है .किसी विचार से तो कभी हानि नहीं होती, हाँ अपराधबोध ज़रूर जानलेवा होसकता है

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    August 27, 2010
  19. बहुत बढ़िया!! प्रेरक विचार।

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    October 3, 2010
  20. Vinesh Dhiman #

    Achchi soch se man ki chanchalta dur hoti hai……….

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    October 10, 2010
  21. gubbara apne colour k vajah se nahi udhta balki usme bhri hawa k vajh se udhta hai.

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    January 9, 2011
  22. ajay sharma #

    प्रेरक विचार अच्छा है।
    बधाई..निशांत

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    January 12, 2011
  23. बहुत सुन्दर प्रेरक विचार । ऐसे प्रेरणाप्रदायक लेख के लिये निशांत जी आपकोँ हार्दिक धन्यवाद ।

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    February 28, 2011
  24. inshan ke under do baty hoti hai. who hai man or atama. Man bahut hi chanchal hota hai. Her chij pany ki khanny ki or karny ki lalsa/chahat ki
    yojana man hi man main banata hai. Dusari taraf atama hai jo achhe bury ki
    jankari (karo or matkaro) aapke chanchal Man ko samay rahtay hi batata hai.
    Aab yeh dono chij aap ke sharir main hai. Jo ke aapke control main hai.Aab
    ushmay vash pana ya napana woh aap ke upper nerbhar karta hai.

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    April 8, 2011
  25. ya baat tho sach ki jab tak hum bura vichar par ammal nahi kartai tho vai huma kuch hani nahi paucha saktaa lakin jab bhe huma ya ashaas ho ki ya vichar bura tho uspar vichar karna zaruree tho nahi kuch accha vichar karna ke kosis kraa

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    May 15, 2011
  26. SIR: SAHI SIKSHA VA SAHI DISHA SUNDER SANSKARO KO JANAM DAYTEY HA. AUR SUNDE-SANSKARO KE DAWARA HI VYAKTI KE SUNDER KARMO KO JANA JHATA HA.

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    July 1, 2011
  27. johnrambo86 #

    khub sundar vichar hai nishant g aapke. Kitne sare bate kahati hai aapke is quite ne. thanks for sharing.

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    July 1, 2011
  28. flightstoafrica #

    यह सच में अच्छा पद और अद्भुत विचार है. धन्यवाद

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    July 1, 2011
  29. Ashok Kumar #

    Agar aise vichar aayenge to kabi n kabi to us ke chakar me pad hi jayega .
    to acha hoga ki aise vicharo ko aane hi nahi diya jaye matlab rok diya jaaye….

    To aap bahut jyada bure vichar man me Iaate rhena ..fir dekhna aap kab tak bach kar rhete hai…

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    July 17, 2011
  30. bahoot achhe vichar

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    January 8, 2012
  31. bhushan sharma #

    कई प्रश्नों के हल मिल गए इस में

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    January 11, 2012
  32. ASHISH RASILE #

    AB MUJHE ISE PADNE KE BAD EK HI BAT LAG RAHI HAI………..RASTA SAF HAI….JIT KI OR AB ME BADUNGA HI………….THANKS 4 THAT

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    January 31, 2012
  33. dhaneshwar #

    bahut sundar vichaar

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    February 18, 2012
  34. ritika #

    thoughts is for remember

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    February 18, 2012
  35. बहुत बढ़िया सीख …

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    March 1, 2012
  36. ma itna preshan tha in bure vicharo se ye pad kar 20 percent shanti mili hai yadi kisi ke pas is bare me ache vishar ho to please call me 09992222127 thankyou

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    April 21, 2012
  37. Vikrant #

    बात कुछ समझ नहीं आई, सब तो कहते हैं विचार अच्छे होने चाहिए, बाकी सबकुछ अच्छा अपने हो जाएगा, ये वृतांत कुछ और ही कह रहा है। कृपया स्पष्ट करें

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    May 29, 2012
  38. pawan #

    really guideful.

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    May 30, 2012
  39. sonali sharma #

    gud story

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    July 14, 2012
    • Dear sonali
      जानना हि है तो उस खुदा को जानो,
      मेरी क्या हस्ती है..
      इन अनजान अजनबीयो के बीच,
      अनजान मेरी मिट्टी है…!!

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      December 8, 2012
  40. guru NE sh hi k aha

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    August 16, 2012
  41. Prabodh kumar Govil #

    vah,aapne to kaiyon ko dozakh se bacha liya…kaiyon ko zannat bakhsh dee.

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    August 22, 2012
  42. harshit jain #

    but prabhu unchahe vicharo ko kaise dur karen

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    September 12, 2012
  43. yashwant rawat #

    bhut acha laga yar

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    November 21, 2012
  44. Hamare Nirnay hi hamara jivan ko disha pradaan karte hai

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    December 14, 2012
  45. anil sanghvi #

    your vichar n your story of pagalpan is realy heart touch thanks nishant g

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    December 31, 2012
  46. Atyant Uttam.

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    February 4, 2013
  47. akash #

    bahut sahi yadi parinam jankar koi bura kaam chod diya jaiy to isse accha kya ho sakta hai.

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    March 10, 2013
  48. jagdish d #

    जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ये प्रसंग है उस उद्देश्य की पूर्ति ये सहजता से कर रहा है .

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    April 19, 2013
  49. braham swarup #

    is duniya me jo bhi hain wo sab sankalp matra se hai. is liye hamare sankalp jitne drad honge utni hi unke pure hone ki sambhavna hoti hai. is liye apne sankalp se hone vale durvicharo ko bhi nakara nahi ja sakta kyo ki wo hamare antah karan ko dusit karte hain jiski vajah se suvichar ke aane ki sambhavna kam ho jati hai. ……………”jai sachchidanand” From Braham swarup

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    April 24, 2013
  50. MUKESH KUMAR SINGH #

    AAP KE VICHAR BAHUAT ACHHE HAI .

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    June 1, 2013

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