अच्छे विचार : बुरे विचार

atropa belladonna

“मुझे कोई मार्ग नहीं सूझ रहा है. मैं हर समय उन चीज़ों के बारे में सोचता रहता हूँ जिनका निषेध किया गया है. मेरे मन में उन वस्तुओं को प्राप्त करने की इच्छा होती रहती है जो वर्जित हैं. मैं उन कार्यों को करने की योजनायें बनाते रहता हूँ जिन्हें करना मेरे हित में नहीं होगा. मैं क्या करूं?” – शिष्य ने गुरु से उद्विग्नतापूर्वक पूछा.

गुरु ने शिष्य को पास ही गमले में लगे एक पौधे को देखने के लिए कहा और पूछा कि वह क्या है. शिष्य के पास उत्तर नहीं था.

“यह बैलाडोना का विषैला पौधा है. यदि तुम इसकी पत्तियों को खा लो तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी. लेकिन इसे देखने मात्र से यह तुम्हारा कुछ अहित नहीं कर सकता. उसी प्रकार, अधोगति को ले जाने वाले विचार तुम्हें तब तक हानि नहीं पहुंचा सकते जब तक तुम उनमें वास्तविक रूप से प्रवृत्त न हो जाओ”.

Comments

  1. says

    अधोगति को ले जाने वाले विचार तुम्हें तब तक हानि नहीं पहुंचा सकते जब तक तुम उनमें वास्तविक रूप से प्रवृत्त न हो जाओ”.

    regards

  2. sandhya says

    aapko bahut – bahut dhanyavad. aaj mere bete ko iss vichar ko batakar mai khushi mahshush karungi . man ko shanti dene wala vichar hai . aage bhi aap aeise vichar se hame khusi denge.

  3. neeti says

    But, Watch your thoughts, they become words.
    Watch your words, they become actions….
    yeh bhi to kaha jata hai.

    Phir?

  4. प्रवीण पाण्डेय says

    पर विचार धीरे धीरे दृढ़ रूप ले क्रिया में प्रवत्त होते हैं ।

  5. says

    Nice thoughts…. makes me think that in life the semantics are more inportant but all we get stuck in usually are syntax…

    Thanks for sharing a thought proviking post

  6. says

    “अधोगति को ले जाने वाले विचार तुम्हें तब तक हानि नहीं पहुंचा सकते जब तक तुम उनमें वास्तविक रूप से प्रवृत्त न हो जाओ”

    बिलकुल सही है … आपकी हर पोस्ट का अपना अलग ही महत्त्व होता है

    मुझसे रहा नहीं गया इसलिए अपनी तरफ से कुछ लिख रहा हूँ…..
    मेरे मन में भी ये ही तर्क उठा था की विचार से ही तो कर्म बनते हैं पर तब मैंने इसी पोस्ट को दोबारा तिबारा पढ़ा और निष्कर्ष निकाला की अगर उस वर्ग विशेष के मानवों की बात की जाए जो इस अपराध बोध में रहते हों की सिर्फ बुरे विचार आने भर को पाप मान लिया जाता है तो उनके मन में आये अपराध बोध को मिटाने के लिए ये शिक्षाप्रद प्रसंग है . एक प्रसंग से मिली शिक्षा सभी स्थानों पर फिट नहीं आ सकती … जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ये प्रसंग है उस उद्देश्य की पूर्ति ये सहजता से कर रहा है .

    • says

      कुछ सार तर्क पेश कर रहा हूँ इस प्रसंग के पक्ष में

      १. एक छोटी सी स्वतंत्रता किसी सुहृदय प्रतिभावान के हाथ में हो तो एक सकारात्मक क्रांति में सहयोगी बन सकती है और वही स्वतंत्रता किसी दुष्ट व्यक्ति के हाथ में विनाश भी ला सकती है . हथियारों पर ये बात बिलकुल फिट होती है.
      २. कुछ मानसिक परेशानियों में ऐसा होता है की मानव किसी तरह के नकारात्मक विचार आने मात्र से अपने आप को अपराधी महसूस करने लगता है
      ३. अगर किसी शिक्षा प्रद कहानी को पढने के बाद भी को विरोधी तर्क मन में उठता है तो सिर्फ दो ही बातें हो सकती हैं या तो हम अर्जुन की तरह प्रश्न पूछ रहें हैं ……तब तो ठीक है पर अगर ऐसा नहीं है तो हमारे मन की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिन्ह उठाना चाहिए
      —————————————————————————-
      निशांत जी , मैं इतने बड़े कमेंट्स के लिए क्षमा चाहता हूँ …अगर आप इन्हें गैर जरूरी समझे तो डिलीट कर दें , या मेरी बात से सहमत न भी हो अवश्य बता दें

      • says

        प्रिय गौरव, पोस्ट को विस्तार देने के लिए धन्यवाद.

        कुछ भी एब्सोल्यूट नहीं है.

  7. says

    चलिए कई प्रश्नों के हल मिल गए इस प्रेरक-प्रसंग में … आभार !

  8. jugal says

    achchhe vichar hai tatha ise patha kar karya kshamata me vridhdhi hoti hai man me shanti aur ek samanit jiwan jine ka rah ki aur insan ke kadam badhate hai. pani ko niche ki taraf bahana aasan hai parantu uper ki or le jana bahut mehanat v sayam ki jarurat hoti hai so ham sab ko es taraf prayas karane chahiye. yadhyapi jhyan dena aasan hai par usako nibhane ke bahut prayas karane parate hai. ishwar ham ko shakti deve esi vichar ke sath

  9. rafat alam says

    सोच जीवन का हिस्सा है .श्वास सामान विचार भी लगातार चलते हैं .सोच वर्जित कभी नहीं होती. सामाजिक परिस्थितयां तै करती है क्या अच्छा है और क्या बुरा .यहाँ तक की एक के लिए जो वस्तु आनंद का साधन है दूसरे के लिए निषेध है .किसी विचार से तो कभी हानि नहीं होती, हाँ अपराधबोध ज़रूर जानलेवा होसकता है

  10. says

    बहुत सुन्दर प्रेरक विचार । ऐसे प्रेरणाप्रदायक लेख के लिये निशांत जी आपकोँ हार्दिक धन्यवाद ।

  11. says

    inshan ke under do baty hoti hai. who hai man or atama. Man bahut hi chanchal hota hai. Her chij pany ki khanny ki or karny ki lalsa/chahat ki
    yojana man hi man main banata hai. Dusari taraf atama hai jo achhe bury ki
    jankari (karo or matkaro) aapke chanchal Man ko samay rahtay hi batata hai.
    Aab yeh dono chij aap ke sharir main hai. Jo ke aapke control main hai.Aab
    ushmay vash pana ya napana woh aap ke upper nerbhar karta hai.

  12. says

    ya baat tho sach ki jab tak hum bura vichar par ammal nahi kartai tho vai huma kuch hani nahi paucha saktaa lakin jab bhe huma ya ashaas ho ki ya vichar bura tho uspar vichar karna zaruree tho nahi kuch accha vichar karna ke kosis kraa

  13. johnrambo86 says

    khub sundar vichar hai nishant g aapke. Kitne sare bate kahati hai aapke is quite ne. thanks for sharing.

  14. Ashok Kumar says

    Agar aise vichar aayenge to kabi n kabi to us ke chakar me pad hi jayega .
    to acha hoga ki aise vicharo ko aane hi nahi diya jaye matlab rok diya jaaye….

    To aap bahut jyada bure vichar man me Iaate rhena ..fir dekhna aap kab tak bach kar rhete hai…

  15. ASHISH RASILE says

    AB MUJHE ISE PADNE KE BAD EK HI BAT LAG RAHI HAI………..RASTA SAF HAI….JIT KI OR AB ME BADUNGA HI………….THANKS 4 THAT

  16. says

    ma itna preshan tha in bure vicharo se ye pad kar 20 percent shanti mili hai yadi kisi ke pas is bare me ache vishar ho to please call me 09992222127 thankyou

  17. Vikrant says

    बात कुछ समझ नहीं आई, सब तो कहते हैं विचार अच्छे होने चाहिए, बाकी सबकुछ अच्छा अपने हो जाएगा, ये वृतांत कुछ और ही कह रहा है। कृपया स्पष्ट करें

    • says

      Dear sonali
      जानना हि है तो उस खुदा को जानो,
      मेरी क्या हस्ती है..
      इन अनजान अजनबीयो के बीच,
      अनजान मेरी मिट्टी है…!!

  18. jagdish d says

    जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ये प्रसंग है उस उद्देश्य की पूर्ति ये सहजता से कर रहा है .

  19. braham swarup says

    is duniya me jo bhi hain wo sab sankalp matra se hai. is liye hamare sankalp jitne drad honge utni hi unke pure hone ki sambhavna hoti hai. is liye apne sankalp se hone vale durvicharo ko bhi nakara nahi ja sakta kyo ki wo hamare antah karan ko dusit karte hain jiski vajah se suvichar ke aane ki sambhavna kam ho jati hai. ……………”jai sachchidanand” From Braham swarup

  20. ER. NISHANT KUMAR says

    hum kisi se kitna pyar kerte hai ye baat etne ehemiyat nhe rkhte balki koe huse kitna pyar kerta hai ye jyada jarure hai

  21. babloo rao says

    bahut badiya bhai ji…meri problem solve kar diya apake vichar ne….dhanyavaad.

    Babloo Rao
    (Uttar pradesh)

  22. Anand Maurya says

    Only Man is an animal who Can Do Any Thing if he want to do it….
    Kisi Bhi Insan Ke Vichar hi Use Bura ya A6a Banate Hai…….
    So Think Positive and Be Happy….

  23. Anand Prakash Kushwaha says

    Aapke kiye achchhe kaam aur sahi faisale bhavishya me utni bar yaad dilaye jate jitna ki aapke kiye bure kaam aur faisle, so apne discision aur kaam soch samajh kar kare.

  24. deepak says

    Bahot hi gahrai h aapke vicharon me aor mujhe bhot hi acha laga aapse attached hoke lekin mujhe ek baat aap se share karni h Kaise aor kis time plz mujhe batayen bhot hi ahem baat h mere liye

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