विवाह कर लेने के उपरांत एक प्रोटेस्टेंट पादरी को शांति से प्रार्थना करने के लिए अवसर नहीं मिल पा रहा था. एक शाम जब वह प्रार्थना करने के लिए बैठा तो पास ही के कमरे में खेल रहे बच्चों के शोर ने उसे परेशान कर दिया.
“भगवान के लिए बच्चों को चुप कराओ”! – उसने पत्नी से चिल्लाकर कहा.
सहमी हुई पत्नी ने बच्चों को डरा-धमकाकर चुप करा दिया.
उस दिन के बाद से जब भी पादरी घर आता, सारे बच्चे सहमे से कहीं दुबक जाते. कुछ दिनों में पादरी को यह लगने लगा कि परमेश्वर उसकी प्रार्थनाओं को नहीं सुन रहा है. एक रात उसने प्रार्थना में परमेश्वर से पूछा – “यह क्या हो रहा है प्रभु? मुझे प्रार्थना करने के लिए करने के लिए शांति तो उपलब्ध है पर मेरे मन में अशांति व्याप्त है!”
एक फरिश्ते ने उससे कहा – “वह तुम्हारे शब्द सुनता है पर उसे हंसने-खिलखिलाने की आवाजें सुनाई नहीं देतीं. उसे तुम्हारी भक्ति दिखती है पर घर में आनंद नहीं दिखता”
यह सुनकर पादरी खड़ा हो गया और चिल्लाकर पत्नी से बोला – “बच्चों को हंसने-खेलने दो! वह भी प्रार्थना का ही रूप है!”
इस बार उसकी प्रार्थना परमेश्वर तक पहुंच गई.
(A motivational / inspirational story about prayers – in Hindi)














प्रभावशाली रचना ….
बहुत सुंदर संदेश!
ye priest, ye pandit, maulvi inki prarthna se pahle hamari prarthna pahunchti hai ishwaar ke paas …itni museebaton aur jimmewaariyon ko poora karne ke baad agar ham 2 minut bhi bhagwaan ko yaad karte hain to wo 2 minut inki prarthna se jyad keemti hote honge ..bhagwaan ke liye bhi…
bahut sundar pravishthi..!
मुझे याद है आपकी वह पोस्ट जिसमें आपने एक पादरी महाशय की बोलती बंद की थी. बढ़िया वाकया था वह.
good
but hw many time u make it
बहुत सुन्दर कहानी है ।
bilkul thik kaha farishte ne bachho me hi to saccha bagwan basta hai…….. too good
बहुत बढ़िया !!
Class photo !!!!!!!!!!!
kisi ka dil dukha kar god ka khush nahi kiya ja sakta………..good story