ज़ेन गुरु के कक्ष में प्रवेश करने से पहले शिष्य ने अपना छाता और जूते बाहर छोड़ दिए.
“मैंने खिड़की से तुम्हें आते हुए देख लिया था” – गुरु ने पूछा – “तुमने अपने जूते छाते के दाईं ओर उतारे या बाईं ओर?”
“यह तो मुझे याद नहीं आ रहा. इससे क्या फर्क पड़ता है? मैं तो हर समय ज़ेन के रहस्य का ही मनन करता रहता हूँ”.
“यदि तुम जीवन की इन छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान नहीं दे सकते तो तुम कभी भी कुछ नहीं सीख पाओगे. हर समय सतत जागरण में रहो, हर क्षण तुमसे ध्यान देने की अपेक्षा करता है – यही ज़ेन का एकमात्र रहस्य है”.
(A short Zen story on being alert and attentive – in Hindi)



prerak
वाह जी..
bahut sundar -sahmat
सच है । जीवन में बहुधा छोटी बातों से बहुत बड़ी बड़ी बातें सीखी हैं ।
सुन्दर
सच है
SACH ME HAR SAMAY JAAGARIT REHANA BAHUT BADI BAAT HAI