प्रार्थना

एक मजदूर की पत्नी बहुत बीमार थी. उसके पास इलाज़ कराने के लिए पैसे नहीं थे. किसी ने उससे कहा कि वह पास में ही रहने वाले बौद्ध भिक्षु से अपनी पत्नी के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करने के लिए कहे.

मजदूर ने बौद्ध भिक्षु को अपनी झोपड़ी में बुला लिया. भिक्षु ने आसन ग्रहण करने के बाद सकल जगत के प्राणियों के लिए प्रार्थना प्रारंभ कर दी – “सबका मंगल हो, सबका कल्याण हो, सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों, सबके दुख दूर हों, ….”

“रुकिए!” – मजदूर ने कहा – “मैंने तो आपको अपनी पत्नी के भले के लिए प्रार्थना करने के लिए बुलाया है और आप दुनिया के सभी बीमारों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं!?” 

“मैं तुम्हारी पत्नी के लिए भी प्रार्थना कर रहा हूँ” – भिक्षु ने कहा.

“हाँ, लेकिन आप औरों के लिए भी प्रार्थना कर रहे हैं. इस तरह तो आप मेरे दुष्ट पडोसी की भी मदद कर देंगे जो बीमार है. मैं चाहता हूँ कि वह कभी अच्छा न हो”.

“तुम प्रार्थना और रोगमुक्ति के बारे में कुछ नहीं जानते हो” – भिक्षु ने उठते हुए कहा – “सभी के लिए मंगलकामना करते समय  मेरी प्रार्थना उन करोड़ों लोगों की प्रार्थना में समाहित हो जाती है जो अपने परिजनों के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. सभी की प्रार्थनाएं एक दूसरे में मिलकर विराट चेतनता से युक्त हो जाती हैं और सभी का हित करती हैं. केवल स्वयं के हित के लिए की गयी प्रार्थनाएं अपनी शक्ति खो देती हैं और विलुप्त हो जातीं हैं.”

(A Buddhist story about the merits of prayers – in Hindi)

 

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7 Comments

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7 responses to “प्रार्थना

  1. विचारों का अनुनाद ।

  2. बहुत खूब..

  3. ओह, आगे प्रार्थना में सयास यह ध्यान रखूंगा।

  4. Aanand aa gayaa…
    Bahut dino ke baad aayaa, aur gyaan hi paayaa.. :)

    Dhanywaad.

    JC

    • जयंत, धन्यवाद. आप बहुत लम्बे अरसे, शायद कई महीनों के बाद आये. आपकी उपस्थिति अप्रत्याशित थी. बहुत अच्छा लगा.

      हिंदीज़ेन की धारा हौले-हौले प्रवाहित हो रही है. यह अभी बहुत दूर जाएगी. अभी यहाँ बहुत कुछ छपना बाकी है. यहाँ आकर आपको सदैव अच्छा ही लगेगा.

  5. अगर प्रार्थना मे ऊर्जा है तो शायद ऎसी प्रार्थनाये एक अनन्द ऊर्जा का स्रोत बनाती हो जिससे जरूरतमन्द लोगो को उनकी जरूरत के मुताबिक ऊर्जा मिल जाती हो.. और इसपर एनेर्जी कन्जर्वेशन का नियम भी लगता हू.. ये उर्जा भी कभी नष्ट नही होती होगी… सिर्फ़ ट्रान्स्फ़र्मेशन होगा दूसरी उर्जाओ मे..
    मै प्रार्थना करते वक्त यही सोचकर प्रार्थना करता हू.. हो सकता है कि विज्ञान के नजरिये से गलत हो या सही भी.. बट हू केयर्स…

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