झूठी क्षमायाचना

एक अध्यापक को भिक्षु चू लाइ की शिक्षाओं में आस्था नहीं थी. एक दिन उसने चू लाइ का अपमान कर दिया. अध्यापक की पत्नी चू लाइ की भक्त थी. उसने अध्यापक  को  चू लाइ से अपने कृत्य के लिए क्षमा मांगने को कहा.

अध्यापक क्षमा माँगना तो नहीं चाहता था लेकिन पत्नी से झिक-झिक करने से अच्छा उसने सोचा कि भिक्षु से ही क्षमा मांग ली जाये. वह मंदिर पहुंचा और क्षमा के दो शब्द कहे.

“मैं तुम्हें क्षमा नहीं करता!” – चू लाइ ने कहा – “जाओ अपना काम करो!”

बेचारे अध्यापक को कुछ न सूझा. उसने लौटकर अपनी पत्नी को यह बात बताई. वह चू लाई के पास आई और शिकायत के स्वर में बोली – “मेरे पति अपने किये पर इतने शर्मिंदा थे पर आपने उनपर थोड़ी सी भी दया नहीं दिखाई!”

चू लाइ ने कहा – “मेरे मन में तुम्हारे पति के किसी भी आचरण के लिए कोई क्षोभ नहीं है परन्तु मैं यह जानता हूँ कि वह वास्तव में अपने किये पर लज्जित नहीं है. ऐसी स्तिथि में उसे मेरे प्रति नाराज़ ही बने रहने दो. उसकी क्षमायाचना को स्वीकार कर लेने पर हमारे मध्य संबंधों में झूठी मधुरता आ जाती जो तुम्हारे पति के क्रोध को और अधिक ही बढ़ाती”.

(A zen story on asking/giving forgiveness – in Hindi)

3 Comments

Filed under Zen Stories

3 Responses to झूठी क्षमायाचना

  1. अहा । सम्बन्ध हों तो स्पष्ट ।

  2. अति सुन्दर

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s