जॉर्ज इवानोविच गुरजिएफ़

“हमारी प्रथाएं या संस्कार तभी तक मूल्यवान है जब उन्हें उनके मूल शुद्ध रूप में क्रियान्वित किया जाये. ये ऐसी पुस्तकें हैं जिनमें अथाह सन्देश छिपे हैं. उन्हें समझ सकनेवाले ही उन्हें पढ़ सकते हैं. प्रत्येक संस्कार अपने आपमें सैंकड़ों किताबों और कथाओं को संजोये रहता है.”

“यह मान लेना सबसे बड़ी गलतफहमी है कि मनुष्य हमेशा एक-सा ही रहता है. कोई भी व्यक्ति बहुत देर तक एक-सा नहीं रहता. उसमें सतत परिवर्तन होता रहता है. शायद ही वह कभी एक घंटे के लिए भी एक-सा रहता हो.”

“मनुष्य अपने सुखों को तिलांजलि दे सकता है पर अपने दुखों को छोड़ने के लिए वह कभी तैयार नहीं होगा.”

(Quotes of George Ivanovitch Gurdjieff – in Hindi)

 

2 Comments

Filed under Quotations

2 Responses to जॉर्ज इवानोविच गुरजिएफ़

  1. किसी से बँधा रहना क्या दुख है ?

    • प्रवीण जी, यदि कुछ सत्य है तो यही है.
      पिछले पांच हज़ार वर्षों की मीमांसा का निचोड़ है यह.
      और इससे इत्तेफाक न रखना मानव प्रकृति का मूल स्वभाव है.

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s