रामावतार त्यागी – कविता – एक भी आँसू न कर बेकार

 

एक भी आँसू न कर बेकार
जाने कब समंदर माँगने आ जाए

पास प्यासे के कुँआ आता नहीं है
यह कहावत है अमरवाणी नहीं है
और जिसके पास देने को न कुछ भी
एक भी ऎसा यहाँ प्राणी नहीं है

कर स्वयं हर गीत का श्रंगार
जाने देवता को कौन सा भा जाय

चोट खाकर टूटते हैं सिर्फ दर्पण
किन्तु आकृतियाँ कभी टूटी नहीं हैं
आदमी से रूठ जाता है सभी कुछ
पर समस्यायें कभी रूठी नहीं हैं

हर छलकते अश्रु को कर प्यार
जाने आत्मा को कौन सा नहला जाय!

व्यर्थ है करना खुशामद रास्तों की
काम अपने पाँव ही आते सफ्रर में
वह न ईश्वर के उठाए भी उठेगा
जो स्वयं गिर जाए अपनी ही नजर में

हर लहर का कर प्रणय स्वीकार
जाने कौन तट के पास पहुँच जाय

(A poem of Ram Avtar Tyagi)

9 Comments

Filed under गीत-ग़ज़ल-कविता

9 Responses to रामावतार त्यागी – कविता – एक भी आँसू न कर बेकार

  1. हर लहर का कर प्रणय स्वीकार
    जाने कौन तट के पास पहुँच जाय.nice

  2. sanjaybhaskar

    बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा

  3. आभार रामावतार त्यागी जी की रचना प्रस्तुत करने का

  4. वाह…आनंद आ गया….
    बहुत बहुत आभार इस अद्वितीय रचना को पढवाने के लिए…

  5. aradhana

    मैं रामावतार त्यागी जी को पहली बार पढ़ रही हूँ. एकदम नयी सी लग रही है यह कविता. आभार आपका इसे पढ़वाने के लिये.

  6. umesh tyagi

    maine ramavtar tyagi ji ki kavita padi mujhe achchhi lagi ab main apka fan ho gaya ho ab jarur padunga

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