रामावतार त्यागी – कविता – एक भी आँसू न कर बेकार

 

एक भी आँसू न कर बेकार
जाने कब समंदर माँगने आ जाए

पास प्यासे के कुँआ आता नहीं है
यह कहावत है अमरवाणी नहीं है
और जिसके पास देने को न कुछ भी
एक भी ऎसा यहाँ प्राणी नहीं है

कर स्वयं हर गीत का श्रंगार
जाने देवता को कौन सा भा जाय

चोट खाकर टूटते हैं सिर्फ दर्पण
किन्तु आकृतियाँ कभी टूटी नहीं हैं
आदमी से रूठ जाता है सभी कुछ
पर समस्यायें कभी रूठी नहीं हैं

हर छलकते अश्रु को कर प्यार
जाने आत्मा को कौन सा नहला जाय!

व्यर्थ है करना खुशामद रास्तों की
काम अपने पाँव ही आते सफ्रर में
वह न ईश्वर के उठाए भी उठेगा
जो स्वयं गिर जाए अपनी ही नजर में

हर लहर का कर प्रणय स्वीकार
जाने कौन तट के पास पहुँच जाय

(A poem of Ram Avtar Tyagi)

Categories: गीत-ग़ज़ल-कविता | 8s टिप्पणियाँ

Post navigation

8 thoughts on “रामावतार त्यागी – कविता – एक भी आँसू न कर बेकार

  1. हर लहर का कर प्रणय स्वीकार
    जाने कौन तट के पास पहुँच जाय.nice

  2. sanjaybhaskar

    बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा

  3. आभार रामावतार त्यागी जी की रचना प्रस्तुत करने का

  4. वाह…आनंद आ गया….
    बहुत बहुत आभार इस अद्वितीय रचना को पढवाने के लिए…

  5. really meanigful

  6. aradhana

    मैं रामावतार त्यागी जी को पहली बार पढ़ रही हूँ. एकदम नयी सी लग रही है यह कविता. आभार आपका इसे पढ़वाने के लिये.

  7. Badiya lagi!

  8. umesh tyagi

    maine ramavtar tyagi ji ki kavita padi mujhe achchhi lagi ab main apka fan ho gaya ho ab jarur padunga

टिप्पणी देने के लिए समुचित विकल्प चुनें

Fill in your details below or click an icon to log in:

Gravatar
WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s

Blog at WordPress.com. Theme: Adventure Journal by Contexture International. Fonts on this blog.

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 753 other followers