होंगे कामयाब, होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब एक दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन
होंगी शांति चारो ओर
होंगी शांति चारो ओर
होंगी शांति चारो ओर एक दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
होंगी शांति चारो ओर एक दिन
हम चलेंगे साथ-साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन
नहीं डर किसी का आज
नहीं भय किसी का आज
नहीं डर किसी का आज के दिन
हो-हो मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
नहीं डर किसी का आज के दिन
हम होंगे कामयाब एक दिन
(A very famous Hindi poem ‘ Hum Honge Kaamyaab’ by Girija Kumar Mathur)






nice………………………………………..
Bahut acchi ….bachapan ki yaad diladi aapne !!
haalanki aaj bhi shok se aksar ise gungunati hun….Dhanywaad.
आभार इस गीत को प्रस्तुत करने का.
यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी।
बहुत अच्छा किया आपने जो यह कविता प्रस्तुत की। यह उन कालजयी रचनाओं में से है जो रचनाकार से बड़ी हो जाती हैं। यदि आप ‘छाया मत छूना मन – होगा दुख दूना मन’ भी ले आएँ तो और अच्छा लगेगा।
आभार!
Aabhar is prastuti hetu..
क्या यह वाकई श्री गिरिजा कुमार माथुर की कविता है? अभी तक मैं इसे अमेरिकी कवि पीट सीगर की “वी शैल ओवरकम” का हिंदी अनुवाद समझता था. क्रिप्या वास्तविक तथ्यों से अवगत कराएं.
ther is a poem [satire]by Girija kumar Mathur -’bhashan De’ does any one have it? I will be thankful
usha