शिवाजी और निर्भीक बालक

shivajiसाहस और शौर्य के साथ ही गुणग्राहकता और क्षमाशीलता शायद ही किसी शासक में देखी गई हों. परन्तु शिवाजी में ये गुण प्रचुर मात्रा में थे. वे चरित्रनिष्ठ और गुणवान शत्रु का भी आदर करते थे.

एक बार मालोजी नाम का एक बालक हाथ में कटार लेकर शिवाजी की हत्या करने के लिए उनके शयनकक्ष तक पहुँच गया लेकिन ऐन मौके पर सेनापति तानाजी ने उसे पकड़ लिया.

शिवाजी की नींद खुल गई और उन्होंने बालक से कई प्रश्न किये. बालक ने निर्भीक होकर सभी प्रश्नों के उत्तर दिए. उसमें ज़रा भी भय या घबराहट नहीं थी. बालक ने बताया कि उसकी माता बीमार थी और घर में अन्न का एक दाना भी नहीं था. उसने यह भी बताया कि उसके पिता शिवाजी की सेना में थे और सेवाकाल में ही उनकी मृत्यु हो गई थी. उसकी माता और बालक के भरण-पोषण के लिए राज्य की ओर से कुछ भी नहीं किया गया था.

हत्या के उद्देश्य के बारे में पूछने पर उसने बताया कि शिवाजी के शत्रु सुभान राय ने बहुत सारा धन देने का लालच देकर उसे हत्या करने के लिए उकसाया था. उसकी निर्भीकता और स्पष्टवादिता से प्रभावित होकर शिवाजी गहन चिंतन में डूब गए. इसी बीच तानाजी ने कहा – “दुष्ट बालक, अब तू मरने के लिए तैयार हो जा!”

बालक ने निर्भीकता से कहा – “मैं क्षत्रिय हूँ. मरने से नहीं डरता! परन्तु एक बार मैं अपनी माँ के दर्शन करना चाहता हूँ. सवेरा होते ही मैं वापस आ जाऊँगा!”

“और अगर तुम भाग गए तो?” – शिवाजी ने पूछा.

बालक ने उत्तर दिया – “कदापि नहीं! प्राण देकर ही मैं अपने वचन को पूरा करूंगा!”

शिवाजी ने उसे अपनी माता से मिलने की अनुमति दे दी.

दुसरे दिन राजदरबार खुलते ही बालक मालोजी हाज़िर हो गया और बोला – “अब आप मुझे मृत्युदंड दे सकते हैं.”

बालक की सच्चाई और निर्भीकता से शिवाजी मुग्ध हो गए. उन्होंने उसे क्षमा कर दिया और उसे अपनी सेवा में लेकर उसके परिवार के भरण-पोषण की समुचित व्यवस्था भी कर दी.

‘सर्वोत्तम’ (हिंदी रीडर्स डाइजेस्ट) के बहुत पुराने अंक से साभार.

(A motivational / inspirational anecdote of Chhatrapati Maharaj Shivaji – in Hindi)

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5 Comments

Filed under राजनयिक-नेता

5 Responses to शिवाजी और निर्भीक बालक

  1. शिवाजी की गुण-ग्राहकता प्रसिद्ध तो है ही । इस प्रसंग की प्रस्तुति के लिये आपका धन्यवाद ।

  2. हां, यह कथा पढ़ी है और इससे मानव चरित्र की ऊंचाइयों पर विश्वास दृढ़ बनाने में सहायता मिली है।

  3. Bahut acchi katha, pehle kabhi padhi thi aaj naye sandarbh ke sath punarjeevit hui….

  4. raj

    bahut achhi post…par sach bolne ke zmane wahi the ab nahi rahe…..

  5. sanjutaneja

    bahut aschi post

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