चीन के बांस को उगाना बड़ा दुरूह कर्म है. इसका छोटा सा बीज लेकर आप इस बोते हैं और साल भर तक इसे पानी और खाद देते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता.
दूसरे साल भी आप इसे पानी और खाद देते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता.
तीसरे साल भी आप इसे पानी और खाद देना ज़ारी रखते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता. अब आप झल्ला जाते हैं.
चौथे साल भी आप इसे पानी और खाद देना ज़ारी रखते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता. यह सब आपको बेहद उकता देता है.
पांचवें साल भी आप इसे पानी और खाद देना जारी रखते हैं. अब आपको कुछ हलचल प्रतीत होती है… देखते ही देखते आपका चीनी बांस का छौना छः हफ्तों में 90 फीट बढ़ जाता है. यह सच है!
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जिंदगी जीना भी चीनी बांस उगाने जैसा ही काम है.
यह कभी-कभी मनुष्य को तोड़ देता है. हम सब कुछ सही करते जाते हैं, लेकिन कुछ नहीं होता.
लेकिन वे लोग जो सब कुछ सही करते रहते हैं और हताश या निराश नहीं होते, उन्हें जिंदगी देरसबेर ईनाम ज़रूर देती है.
चित्र साभार – फ्लिकर
(Lessons from a Chinese bamboo – in Hindi)

चीनी बांस के माध्यम से बहुत सुंदर शिक्षा .. आजकल लोग इतना धैर्य कहां रख पाते हैं !!
पिछले पचास दशकों में सभ्यता की प्रगति इस बांस सी है। सहस्ताब्दियों से सब कुछ शिलिर शिलिर चल रहा था। अचानक हर दिशा में तकनीकी और ज्ञान का विस्फोट हो गया है।
बांस इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि बढ़ने की ध्वनि भी सुनी जा सकती है!
GOOD INFORMATION AND EDUCATIVE ONE.
good
अरे वाह। अच्छी शिक्षा ।
धन्यवाद
he bhagwan mujhe dhairya do or abhi do.