एक बार परमेश्वर ने मनुष्य के सिवाय सभी प्राणियों को अपने पास बुलाया और उनसे कहा – “मैं मनुष्यों से कुछ छुपाना चाहता हूँ. मैं परमसत्य को मनुष्यों से छुपाना चाहता हूँ लेकिन समझ नहीं पा रहा कि उसे कहाँ रखूं”!
गरुड़ ने कहा – “वह मुझे दे दो. मैं उसे चाँद में छुपा दूंगा”.
परमेश्वर ने कहा – “नहीं. एक दिन वे वहां पहुंचकर उसे ढूंढ लेंगे”.
सालमन मछली ने कहा – “मैं उसे सागरतल में गाड़ दूँगी”.
“नहीं. एक दिन वे वहां भी पहुँच जायेंगे”.
भैंस ने कहा – “मैं उसे चारागाहों में छुपा दूँगी”.
परमेश्वर ने कहा – “एक दिन वे धरती की खाल को उधेड़ देंगे और उसे खोज लेंगे”.
सभी प्राणियों की दादी छछूंदर धरती माँ की छाती से चिपकी रहती थी. परमेश्वर ने उसे भौतिक नेत्र नहीं बल्कि अलौकिक ज्योति प्रदान की थी. वह बोली – “उसे उन्हीं के भीतर रख दो”.
परमेश्वर ने कहा – “बहुत अच्छा”.
चित्र साभार – फ्लिकर
(A native American / Indian folktale – in Hindi)


ये तो सच बात है, परमेश्वर ने सत्य मनुष्य के भीतर ही छुपाया है|
Prerak Daastaan.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
Yeh to samajh main aya ki ishwar ne satay ko insaan ke andar hi chhupaya magar iski jarrorat kyon mahsoos ke
ishwar ne agar ispar kuch material aap ke haath ayen to
post karna kyonki is post ne deemag main kucch sawal
uthadiye hain intzar raheyega aap ki aisi post ka
बहुत अच्छा लिखा है साब . मेरा मानना है खुदा और मोत ही सच हैं बाकि सपना .कबीर दास जी का दोहा याद आरहा है
तेरा साईं तुझ में है ज्यों पहुपन में बास
कस्तूरी के मृग क्यों फिरर फिर सूंघे घांस
किस की हिम्मत है जों इस महान कलाम के आगे लिख सके कम से कम मेरे पास तो शब्द नहीं है.