सत्य छुपा दो : Hide the Truth

indian chief

एक बार परमेश्वर ने मनुष्य के सिवाय सभी प्राणियों को अपने पास बुलाया और उनसे कहा – “मैं मनुष्यों से कुछ छुपाना चाहता हूँ. मैं परमसत्य को मनुष्यों से छुपाना चाहता हूँ लेकिन समझ नहीं पा रहा कि उसे कहाँ रखूं”!

गरुड़ ने कहा – “वह मुझे दे दो. मैं उसे चाँद में छुपा दूंगा”.

परमेश्वर ने कहा – “नहीं. एक दिन वे वहां पहुंचकर उसे ढूंढ लेंगे”.

सालमन मछली ने कहा – “मैं उसे सागरतल में गाड़ दूँगी”.

“नहीं. एक दिन वे वहां भी पहुँच जायेंगे”.

भैंस ने कहा – “मैं उसे चारागाहों में छुपा दूँगी”.

परमेश्वर ने कहा – “एक दिन वे धरती की खाल को उधेड़ देंगे और उसे खोज लेंगे”.

सभी प्राणियों की दादी छछूंदर धरती माँ की छाती से चिपकी रहती थी. परमेश्वर ने उसे भौतिक नेत्र नहीं बल्कि अलौकिक ज्योति प्रदान की थी. वह बोली – “उसे उन्हीं के भीतर रख दो”.

परमेश्वर ने कहा – “बहुत अच्छा”.

चित्र साभार – फ्लिकर

(A native American / Indian folktale – in Hindi)

(~_~)

The Creator gathered all of creation and said,
“I want to hide something from the humans until they are ready for it.
It is the realization that… they create their own reality.”
The eagle said, “Give it to me, I will take it to the moon.
“The creator said “No. One day they will go there and find it.”
The salmon said, “I will hide it on the bottom of the ocean.”
“No. They will go there too.”
The buffalo said, “I will bury it on the great plains.”
The creator said, “They will cut into the skin of the earth and find it even there.”
The Grandmother Mole, who lives in the breast of Mother Earth,
and who has no physical eyes but sees with spiritual eyes, said: “Put it inside them.”
And the Creator said, “It is done.”

Comments

  1. RS SHARMA says

    Yeh to samajh main aya ki ishwar ne satay ko insaan ke andar hi chhupaya magar iski jarrorat kyon mahsoos ke
    ishwar ne agar ispar kuch material aap ke haath ayen to
    post karna kyonki is post ne deemag main kucch sawal
    uthadiye hain intzar raheyega aap ki aisi post ka

  2. rafatalam says

    बहुत अच्छा लिखा है साब . मेरा मानना है खुदा और मोत ही सच हैं बाकि सपना .कबीर दास जी का दोहा याद आरहा है

    तेरा साईं तुझ में है ज्यों पहुपन में बास
    कस्तूरी के मृग क्यों फिरर फिर सूंघे घांस
    किस की हिम्मत है जों इस महान कलाम के आगे लिख सके कम से कम मेरे पास तो शब्द नहीं है.

  3. rafatalam says

    बहुत अच्छा लिखा है साब . मेरा मानना है खुदा और मोत ही सच हैं बाकि सपना .कबीर दास जी का दोहा याद आरहा है

    तेरा साईं तुझ में है ज्यों पहुपन में बास
    कस्तूरी के मृग क्यों फिरर फिर सूंघे घांस
    किस की हिम्मत है जों इस महान कलाम के आगे लिख सके कम से कम मेरे पास तो शब्द नहीं है.

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